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बोधगया मठ के परंपरा के अनुसार गायों को साधु एवं स्थानीय समाज के द्वारा गुड़ खिलाकर किया गया गोवर्धन पूजा।

BHARAT NEWS LIVE24 बोधगया मठ के परंपरा के अनुसार गायों को साधु एवं स्थानीय समाज के द्वारा गुड़ खिलाकर किया गया गोवर्धन पूजा।
रिपोर्टः 

डीके पंडित
बिहार से 
बिहार के अन्तर्राष्ट्रीय ज्ञान भूमि बोधगया में मठ गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर बोधगया मठ के पूर्व कोठारी सह उपाध्यक्ष गोस्वामी त्रिवेणी गिरी मठ के परंपरा के अनुसार गायों को गुड़ खिलाया एवं गायों की महिमा समाज के लोगों को बताया। परंपरा के संबंध में उन्होंने बताया कि बोधगया मठ में मठ के महंत ही सभी प्रकार के धार्मिक गतिविधि में भाग लेते हैं। एवं उनकी अध्यक्षता में ही कार्यक्रम होता है। किंतु उनकी अनुपस्थिति में मठ का साधु ही किसी भी धार्मिक गतिविधि को संपन्न कर सकता है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मठ के महंत जी की अनुपस्थिति में गोस्वामी त्रिवेणी गिरी जी ने इस कार्यक्रम को संपन्न किया। एवं उनके द्वारा यह जानकारी दी गई कि जबसे महंत जी मठ से अनुपस्थित हैं। तब से गौशाला का प्रबंधन उनके द्वारा एवं उनके कुछ सहयोगी के द्वारा किया जा रहा है। जिसमें विशेषता बोधगया दुकानदार समिति, संजय सिंह (डेल्टा होटल), अशोक जी, शंकर यादव जी, सुरेंद्र जी के द्वारा किया जा रहा है।

मठ के स्वामी गोस्वामी त्रिवेणी गिरी एवं अन्य महात्माओं ने बताया कि कल रात्रि और आज सुबह महिला साधु सरोजिनी गिरी के द्वारा जबरजस्ती महंत के स्थान पर पूजा किया गया।जो कि बिल्कुल अनुचित एवं परंपरा के विरुद्ध है। जबसे मठ की स्थापना हुई है तब से कभी भी इस परंपरा का खंडन नहीं हुआ था। स्वामी जी ने बताया कि इस परंपरा का खंडन होने से मठ पर और बोधगया पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ेगा।इस परंपरा के टूटने से बोधगया मठ के सभी साधु एवं स्थानीय हिंदू समाज बहुत आक्रोशित हैं। बोधगया मठ में महिला का रात्रि विश्राम भी वर्जित है। किंतु जबरदस्ती मठ में रहते हुए महिला सरोजिनी गिरी ने महंत के स्थान पर धार्मिक गतिविधि परंपरा के विरोध में जबरदस्ती कर रही है। गोस्वामी त्रिवेणी गिरी एवं अन्य साधु परंपरा टूटने से बहुत दुखी और पीड़ित हैं। एवं इस बात की सूचना जिला अधिकारी महोदय को भी दे दिया गया है। एवं साधुओं के द्वारा उनसे मिलने का समय मांगा गया है। मठ से जुड़े हुए बोधगया के स्थानीय हिंदू समाज ने भी इसका पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि जल्द से जल्द महिला साधु पर परंपरा तोड़ने पर कार्रवाई की जाए एवं शीघ्र अति शीघ्र इन्हें मठ से बाहर किया जाए।

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