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ओजस्विनी' द्वारा 'गृहलक्ष्मी के रूप में महिलाएं' विषय पर आनलाइन परिचर्चा*

BHARAT NEWS LIVE24* 'ओजस्विनी' द्वारा 'गृहलक्ष्मी के रूप में महिलाएं' विषय पर अॉनलाइन परिचर्चा*

*-आर्य हिन्दू-संस्कृति को सुरक्षित और संरक्षित रखने की है परम आवश्यकता।*

*स्वच्छता है, तो स्वास्थ्य है; स्वास्थ्य है, तभी सुख-समृद्धि और सम्पन्नता है*
रिपोर्टः डीके पंडित 
बिहार के गया में 

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद द्वारा संचालित संस्था 'ओजस्विनी' द्वारा आगामी महापर्व दीपावली के मद्देनजर एक आंनलाइन परिचर्चा आयोजित की गयी, जिसका संचालन तथा समन्वयन ओजस्विनी की जिलाध्यक्ष डॉ०कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। इस परिचर्चा में डॉ० प्रियदर्शनी ने विगत सोमवार को आहूत बैठक में ओजस्विनी गया जिले के सदस्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय हिदू परिषद, दक्षिण बिहार के प्रांतीय महामंत्री डॉ. सुरेंद्र योगी जी तथा  डॉ०रेखा सिंह द्वारा हिन्दू संस्कृति को संरक्षित रखने हेतु दिए गये बहुमूल्य  दिशानिर्देशों को सविस्तार सदस्यों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू संस्कृति को संरक्षित रखने की आवश्यकता बढ़ती ही जा रही है। वेदों की महत्ता आज भी उतनी ही है जितनी पहले थी। हमारी वैदिक संस्कृति का सूर्य कभी अस्त न हो इसलिए वेदों के पठन-पाठन पर भी जोर देने की है ज़रूरत।  'लव जेहाद' के नाम पर हिन्दू बालिकाओं और महिलाओं से जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है, उनपर तरह-तरह के ज़ुल्म ढाए जा रहे हैं, जो संपूर्ण मानवता के लिए शर्म की बात है। हमें आधुनिकीकरण के इस दौर में रहते हुए श्री रामचंद्र और श्री कृष्णचन्द्र जैसे महापुरूषों की आर्य हिन्दू संस्कृति के गौरव को बचाए रखना है। नारियों को संगठित होकर अत्याचार और भेदभाव पूर्ण नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। आपस में भले ही कभी मनमुटाव हो जाए, फिर भी विपत्ति आने पर सभी महिलाओं को एकजुट हो जाना चाहिए। इसके पश्चात दीपावली पर्व के मध्येनज़र 'गृहलक्ष्मी के रूप में महिलाओं की भूमिका पर' सदस्यों ने अपने विचार रखे। गृहणी रजनी त्यागी ने कहा कि उनकी बेटी ही घर की लक्ष्मी है। दोनों माँ-बेटी घर-परिवार का हर तरह से ध्यान रखती हैं। उनके अनुसार उनकी बेटी पढ़ने-लिखने में भी काफी ध्यान देती हैं और यह पूरे परिवार के लिए अत्यंत खुशी और गौरव का विषय है। आदर्श मध्य विद्यालय, चिरैली की विज्ञान शिक्षिका डॉ०ज्योति प्रिया ने कहा कि महिलाएँ माँ, बहन, बेटी तथा बहू के रूप में सुबह से लेकर रात तक घर की देखभाल करती हैं और वास्तव में वे ही लक्ष्मी का साक्षात रूप हैं। उनके साथ किया गया अभद्र व्यवहार अत्यंत निंदनीय तथा अफसोसजनक है। ऐसा अनर्थ न हो, यह सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।  मोनिका कुमारी ने कहा कि हाड़-मांस की बनी नारी का सम्मान किए बिना लक्ष्मी पूजा का कोई महत्व नहीं रह जाता।  अमीषा भारती के अनुसार एक स्त्री घर-परिवार के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखती है। दीपावली में तो पहले से ही हर घर में साफ-सफाई का काम ज्यादातर महिलाएं ही करती आई हैं और कर भी रही हैं। इसी दृष्टिकोण से तो महिलाएं देवी लक्ष्मी का ही साकार रूप हैं। ओजस्विनी की जिला महामंत्री आरती कश्यप ने भी महिलाओं को एकजुट होकर समाज में होने वाले दुर्व्यवहारों का विरोध करने कहा। विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ० रश्मि ने कहा कि दीपावली पर्व यह भी संदेश देता है कि स्वच्छता है तो स्वास्थ्य है, स्वास्थ्य है, तभी सुख-समृद्धि तथा सम्पन्नता है। कोरोना-संकट ने भी स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति ऐसे भी समाज में जागरूकता बढ़ा डाली है। बालिकाओं और महिलाओं को खुद अपनी शिक्षा-दीक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए प्रयत्न करने होंगे। डॉ० रश्मि ने कहा कि शीघ्र ही ओजस्विनी की सदस्यता ग्रहण करने हेतु गया जिले में भी अॉफलाइन फॉर्म उपलब्ध हो जाएंगे। हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति तथा संस्कारों की सुरक्षा भी हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें अपनी प्राचीन सभ्यता पर गर्व है और श्रीराम तथा श्रीकृष्ण की इस भारतभूमि की गरिमा अक्षुण्ण बनाए रखनी है। आर्य-संस्कृति का दीपक निरंतर अपनी गौरवमय लौ के साथ प्रज्वलित रहे, इसी शुभकामना के साथ ओजस्विनी जिलाध्यक्षा ने सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार जताया।

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