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BHARAT NEWS LIVE24 बिहार में साक्षत ईश्वर  पूजा आराधना साधना लोक आस्था की प्रकाष्ठा छठ महापर्व।
 एक परिचय दूध की नदी  आजा भी  कल भी रहेगा ।जय बिहार ज्ञान और प्राप्त धर्म स्थल नगरी ।राज।



 आज भारत देश के कई राज्यों में आस्था का महापर्व छठ पूजा धार्मिक अनुष्ठान  के साथ धूमधाम से मनाया जाता है ।
इस पर्ब में आस्था की महत्वपूर्ण प्रकाष्ठा  (आदित्य देव  ) सूर्य के सूर्यास्त और सूर्योदय के अर्घ्य देकर मनाया जाता है।  आदित्य देव भास्कर को पहला अरध सूर्यास्त के समय देकर यह कामना की जाती है  कि हे सूर्य देव समस्त मानव जाति , जीव - जंतुओं के कल्याण के लिये आप अपनी लालिमा से पूरे विश्व को उजाला मान, उदियमान, प्रकाश मय,  बनाये और  इस शीत कालीन ऋतु में समस्त मानव जाति के कल्याण के लिये अपनी समस्त ऊर्जा प्रकृति के कल्याण के लिये प्रदान करें।।।
    उदियमान   सूर्योदय  (आदित्य देव)  से यह प्रकाष्ठा होती है कि शीत कालीन ऋतु में रबी फसलों के उत्पादन के लिये , जल संचयन के लिये ,  समस्त मानव जीवन के कल्याण के लिये  , हे सूर्य देव आप अपनी समस्त लालिमा  प्रकृति की संरक्षण  के लिये उदियमान हो। 
        सूर्य देव आदित्य , भास्कर , की छोटी बहन   छठ  मैया को  छठ ब्रती जब अस्तगामी सूर्य को अरघ देती है तो छठ मईया बहुत खुश होकर समस्त मानव जाति ,और प्रकृति की कल्याण करने के लिये बारदायी होती है।  
                   छठ पूजा   की सम्पूर्ण प्रकाष्ठा के स्वरूप में यह कहा जा सकता है कि यह   प्रकृति की संरक्षक होती है। 
           लेकिन  आज  के  बैश्विक दौर में  हम मानव अपनी इन प्रकाष्ठा से इतर अलग ही पहचान बना रहे है।    
        आज मानवीय जीवन आस्था के साथ सिर्फ दिखावा कर रहे है , जल, जंगल, जमीन , जीव , जानवर , यही हमारे मानवीय जीवन की पराकाष्ठा है इनकी संरक्षण ही प्रकृति की सुरक्षा है, हम सभी मानव को मानवीय जीवन की संरक्षण के लिये प्रकृति की प्रक्रिया की जानना , समझना , और इनके अनुरूप कार्य को क्रियान्वित करने की  जरूरत है तभी हम अपने जीवन को क्रियान्वित कर सकते है। 
      और आदित्य देव प्रसन्न हो सकते है।   जय सनातन धर्म की मानव जीवन की प्राकाशोत्सव  के बाद महाछठपुजा उपासना साथ सम्पन्न हो गया ।दिनेश कुमार पंडित उपसंपादक भारतन्यूज लाइव 24 / मीडिया हेड .WBM(Japan) 
     

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