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BHARAT NEWS LIvE24 नहीं चला औरंगाबाद जिले में एन0डी0ए0 का जादू

BHARAT NEWS LIvE24  नहीं चला औरंगाबाद जिले में एन0डी0ए0 का जादू                             ( औरंगाबाद जिले के सभी 06 विधानसभा क्षेत्रों में इस बार  महागठबंधन के उम्मीदवारों में शामिल राजद एवं कांग्रेस प्रत्याशियों ने ही लहराया बिहार -  विधान सभा चुनाव 2020  में परचम ) ).                                  मगध ब्यूरो: अजय कुमार पाण्डेय  औरंगाबाद: ( बिहार ) इस बार प्रथम चरण के दौरान ही दिनांक -  28 अक्टूबर 2020  को औरंगाबाद जिले के सभी 06 विधानसभा क्षेत्रों में संपन्न हुई बिहार  - विधानसभा चुनाव 2020 का परिणाम जो मतगणना के दिन दिनांक - 10 नवंबर 2020 को सामने आया! वास्तव में एन0डी0ए0 के लिए चौंकाने वाला रहा!  ऐसा इसलिए कहा जा रहा है? कि इस बार संपन्न चुनाव के पूर्व तक गोह विधानसभा क्षेत्र संख्या - 219 से भाजपा के सिटिग विधायक मनोज कुमार शर्मा थे! लेकिन बिहार -  विधानसभा चुनाव 2020 में इस बार गोह विधानसभा क्षेत्र की जनता ने महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी बने भीम कुमार सिंह उर्फ भीम यादव पर भरोसा करते हुए चुनाव जीता दिया! जो पूर्व में नवीननगर - बारुण विधानसभा क्षेत्र के भी विधायक रह चुके थे! लेकिन इस बार इनको पार्टी ने क्षेत्र बदल कर गोह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था! हालांकि विधानसभा क्षेत्र से बनाए गए राजद प्रत्याशी का शुरुआती दौर में लोगों ने क्षेत्र में जबरदस्त विरोध भी किया था? लेकिन अंततः गोह विधानसभा क्षेत्र की जनता ने राजद प्रत्याशी को मदद करते हुए पार्टी के नाम पर चुनाव भी जीता दिया! इसके अलावे गोह विधानसभा क्षेत्र से जदयू के पूर्व विधायक रह चुके डॉ0 रणविजय शर्मा भी रा0लो0स0पा0 के सीट पर चुनाव मैदान में उतर गए थे? जिसके कारण गोह विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल प्रत्याशी को काफी फायदा हो गया? क्योंकि भाजपा प्रत्याशी एवं रा0लो0स0पा0 प्रत्याशी दोनों उम्मीदवार एक ही जाति से आते थे?  नतीजतन दोनों प्रत्याशियों का अपने जाति का बोट दो भागों में बट गया? वही ओबरा विधानसभा क्षेत्र संख्या -  220 में इस बार महागठबंधन में शामिल *राष्ट्रीय जनता दल* ने अपने सिटिंग विधायक *वीरेंद्र कुमार सिन्हा* का टिकट काट कर *ऋषि कुमार* को प्रत्याशी बनाया था! जो पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री रह चुकी *डॉ0 कांति सिंह* के पुत्र है! इसी वजह से ओबरा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने भी शुरुआती दौर में टिकट वितरण से पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री रह चुकी डॉ कांति सिंह का लोगों ने विरोध करते हुए काला झंडा भी दिखाने का काम किया था? लेकिन धैर्य रखते हुए पूर्व केंद्रीय *कोयला राज्य मंत्री रह चुकी डॉक्टर कांति सिंह* ने मीडिया को जवाब देते हुए कहा था?  कि ओबरा -  दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र की सारी जनता मेरे अपने ही हैं?  इन लोगों ने काला झंडा दिखाकर मेरी नजर उतारने का काम किया है? मैं इन लोगों पर कभी भी लाठी चार्ज करवा ही नहीं सकती? ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने  मुझे शुरू से ही काफी मान -  सम्मान दिया है! ज्ञात हो कि जिस दिन पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री को ओबरा -  दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने काला झंडा दिखाने का काम किया था? उस दिन *शनि महाराज* का ही दिन भी था? जो वास्तव में ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने काला झंडा दिखाकर नजर उतारने का काम कर दिया था? तभी तो पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री के पुत्र ने ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत् से ही चुनाव लड़कर बिहार -  विधानसभा चुनाव 2020 में विधायक बनने का परचम लहरा दिया? और ओबरा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने दिल से राजद प्रत्याशी *ऋषि कुमार* को अपना आशीर्वाद देते हुए चुनाव जीता दिया!  इसके अलावे ओबरा विधानसभा क्षेत्र से ही इस बार लोकल लोजपा प्रत्याशी *डॉक्टर प्रकाश चंद्रा* भी चुनाव मैदान में थे? और बॉलीवुड अभिनेत्री *अमीषा पटेल* तक को भी अपने क्षेत्र में चुनाव जीतने के मकसद से बुलाया? इसके बावजूद भी फिल्म अभिनेत्री ने *बिहार से वापस मुंबई लौटने के बाद डॉ0 प्रकाश चंद्रा के खिलाफ एक जबरदस्त बयान देते हुए मीडिया ग्रुप में एक रिकॉर्डिंग डाली थी!  जो काफी वायरल भी हुआ था*! यही वजह है कि फिल्म अभिनेत्री द्वारा आमजनता से  किया गया अपील का बयान भी सटीक बैठ गया?  और ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने भी लोक जनशक्ति पार्टी प्रत्याशी को चुनाव हरा दिया! ज्ञात हो कि ओबरा विधानसभा क्षेत्र से ही इस बार के चुनाव में पूर्व ओबरा के थाना प्रभारी रह चुके *सोमप्रकाश यादव* भी चुनाव मैदान में थे?  जो 2010 बिहार - विधानसभा चुनाव में *निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर* ओबरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर प्रथम बार जीत का परचम लहराया था! उस वक्त 2010 बिहार -  विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी *सोमप्रकाश यादव* के खिलाफ जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी बने *प्रमोद चंद्रवंशी* चुनाव मैदान में थे; जिनके लिए मतगणना के दिन उत्साहित जदयू समर्थकों ने जीत का माला पहनाने के लिए भी बनवा कर ले आए थे? लोगों को पूर्ण भरोसा हो गया था?  कि ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र से *प्रमोद चंद्रवंशी* ही निश्चित चुनाव जीत गए?  लेकिन उस वक्त तक मतगणना का कार्य चल ही रहा था? तब ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय प्रत्याशी सोमप्रकाश यादव के समर्थकों ने भी 2010 बिहार -  विधानसभा चुनाव में मतगणना केंद्र *सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय* प्रांगण के बाहर भरोसा करते हुए नारेबाजी करने लगे थे? कि जिला -  प्रशासन जिंदाबाद,  पुलिस -  प्रशासन जिंदाबाद?  तब औरंगाबाद के  जिला -  प्रशासन पुलिस - प्रशासन ने भी निष्पक्ष मतगणना कराते हुए निर्दलीय प्रत्याशी *सोमप्रकाश यादव* को ही चुनाव जीतने के बाद जीत का सर्टिफिकेट दिया था? जो ओबरा विधानसभा क्षेत्र से 2010 में पहली बार विधायक बनने का इतिहास रच दिया था? ज्ञात हो कि 2010 में नामांकन से पूर्व तक सोम प्रकाश यादव ओबरा के ही थाना प्रभारी भी रह चुके थे? और अपने पद पर रहते हुए ओबरा थाना क्षेत्र के अंदर उत्पन्न विवादित मामला के अधिकांश केसों में समझौता कराने पर ही काफी जोर दिया था? इसी वजह से ओबरा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने 2010 में निर्दलीय प्रत्याशी होने के बावजूद भी सोम प्रकाश यादव को चुनाव जीता दिया था? जो 2010 में जिले वासियों में चर्चा का विषय बन गया था? इसके अलावे ओबरा विधानसभा क्षेत्र से इस बार के चुनाव में पूर्व जदयू उम्मीदवार प्रमोद चंद्रवंशी को अपने पार्टी की ओर से टिकट नहीं दिया गया? तो निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ओबरा विधानसभा क्षेत्र से ही अपना नामांकन दाखिल कर दिया था? और जदयू उम्मीदवार के रूप में ओबरा विधानसभा क्षेत्र से इस बार बारुण निवासी सुनील कुमार यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया गया था? जो मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार के काफी करीबी भी माने जाते रहे हैं*?   लेकिन महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी *ऋषि कुमार* ने सभी को पछाढ़ते हुए ओबरा - दाउदनगर विधानसभा क्षेत्र में जीत का परचम लहरा दिया? ज्ञात हो कि टिकट वितरण से पूर्व तक ओबरा विधानसभा क्षेत्र के लोजपा प्रत्याशी बने *डॉ0 प्रकाश चंद्रा* हमेशा मीडिया के समक्ष बैठकर बयान देते रहते थे?  कि राजद मुझे ओबरा - दाऊदनगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर देखें? तो सर्वप्रथम राजद को ओबरा विधानसभा क्षेत्र से ही सीट जीतने की घोषणा होगी? लेकिन अंत में जब राष्ट्रीय जनता दल *डॉ0 प्रकाश चंद्रा* को टिकट नहीं दिया? तो लोजपा में जाकर ओबरा विधानसभा क्षेत्र से ही टिकट लेकर चुनाव लड़ गए? लेकिन ओबरा विधानसभा क्षेत्र की क्षेत्रीय जनता ने *डॉ0 प्रकाश चंद्रा* को चुनाव हरा दिया? और क्षैत्रिय जनता ने  अपना आशीर्वाद  राजद प्रत्याशी *ऋषि कुमार* को देते हुए ओबरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता दिया?   वही नवीनगर विधानसभा क्षेत्र संख्या -  221 से इस बार दो बार से लगातार विधायक रहे *वीरेंद्र कुमार सिंह* को जनता ने चुनाव हरा दिया?  और महागठबंधन में शामिल राजद प्रत्याशी *विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह* को जनता ने चुनाव जीता दिया? ज्ञात हो कि  सन *2010 एवं 2015* में दोनों बार जदयू के सीट पर ही नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ कर *वीरेंद्र कुमार सिंह* विधायक बने थे? इसके अलावे *वीरेंद्र कुमार सिंह* पूर्व में भी एक बार विधायक बनने के तुरंत बाद औरंगाबाद लोकसभा सीट पर ही सन 1995 में चुनाव लड़ कर सांसद भी बन गए थे? मतलब वीरेंद्र कुमार सिंह नवीनगर विधानसभा क्षेत्र के 03 बार विधायक बने एवं सन 1995 में एक बार औरंगाबाद लोकसभा का चुनाव भी जीता था? इसके अलावे नबीनगर के वर्तमान चुनाव जीत चुके राजद प्रत्याशी विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह प्रथम बार नबीनगर विधानसभा क्षेत्र से लोजपा के सीट पर 2005 में चुनाव लड़ कर विधायक बने थे? इसके बाद 2010 बिहार -  विधानसभा चुनाव में नबीनगर विधानसभा क्षेत्र से जदयू उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार सिंह चुनाव जीत गए थे और डब्ल्यू सिंह चुनाव हार गए थे? लेकिन 2015 बिहार - विधानसभा चुनाव में भी जब डब्लू सिंह को नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से लोजपा ने टिकट नहीं दिया था? और एन0डी0ए0 गठबंधन में शामिल होने की वजह से 2015 बिहार - विधानसभा चुनाव  में *लोक जनशक्ति पार्टी* ने अपना नबीनगर विधानसभा क्षेत्र का सीट छोड़कर भारतीय जनता पार्टी को दे दिया था? इसी वजह से 2015 बिहार -  विधान सभा चुनाव में नवीन नगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के तरफ से उम्मीदवार बनाए गए भाजपा के दिग्गज *गोपाल नारायण सिंह* ने नामांकन दाखिल किया था? तब जिद में आकर डब्लू सिंह ने अपना नामांकन 2015 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नवीननगर विधानसभा क्षेत्र से ही दाखिल कर दिया था? नतीजतन 2015 विधानसभा चुनाव में नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी एवं निर्दलीय प्रत्याशी दोनों चुनाव हार गए थे? और पुनः जदयू विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह ने ही अपना परचम लहराया था? हालांकि बिहार - विधानसभा चुनाव 2015 से पहले जब बिहार के मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* जदयू विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह के क्षेत्र में ही बड़ेम गांव में  जनता दल के जिलाध्यक्ष रह चुके स्वर्गीय  संतन सिंह के *तृतीय पुण्यतिथि* पर  आए थे?  तो   उस वक्त भी जदयू विधायक *वीरेंद्र कुमार सिंह* को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मौजूदगी में ही क्षेत्र की जनता ने मंच से नहीं बोलने दिया था? इसके बाद तुरंत खुद माइक थाम कर बिहार के *मुख्यमंत्री* ने जनता को संबोधित किया था? इसके अलावे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को *बड़ेम* गांव जाने के वक्त ही बारुण बाजार में क्षेत्रीय जनता ने अपने - अपने हाथों में तख्ती लेकर वाहन को रुकवा दिया था? क्षेत्रीय जनता का मुख्यमंत्री से कहना था? कि इसी बारुण -  नबीनगर एन0टी0पी0सी0 मुख्य पथ से प्रतिदिन दिन - रात हजारों वाहन अवैध बालू *सोननद से लोड कर* उत्तर प्रदेश राज्य अंतर्गत वाराणसी तक ले जाते हैं? जिसके वजह मुख्य पथ की हालत बद से बदतर हो गई है?  और आम लोगों को पैदल भी चलना दुर्लभ हो गया है? लगातार कई घटनाएं भी हो चुकी है? कई लोगों की जानें चली गई है? तब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभागीय पदाधिकारियों को मौके पर ही आदेश देते हुए कहा था?  कि बारुण बाजार से एनीकट बालू घाट तक ऐसा रोड बनवा दे? कि कभी भी टूटे नहीं? जिसका जिक्र मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* ने बडेम गांव की जनसभा में भी की थी? हालांकि बाद में उस वक्त बारून में अच्छी सड़क बनवा भी दी गई थी? लेकिन वर्तमान भ बारून -  नबीनगर एन0टी0पी0सी0 मुख्य पथ की हालत दिन - रात हजारों वाहन से अवैध बालू ढुलाई की वजह से ही बद से बदतर हो गई है? और आम लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है? क्षेत्र की जनता हमेशा इस मुख्य पथ के लिए चिल्ला रही है? इसके बावजूद भी प्रशासन व सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है? कि इस मुख्य पथ का पब्लिक रोज मरे या बचे?  इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* ने दोबारा 2015 विधानसभा चुनाव में वीरेंद्र कुमार सिंह पर ही भरोसा करते हुए नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से अपने पार्टी का टिकट देकर चुनाव लड़ा दिया था? इसके अलावे 2015 बिहार -  विधानसभा चुनाव में नवीनगर प्रचार करने पहुंचे *केंद्रीय गृह मंत्री* रहे  राजनाथ सिंह को भी जदयू विधायक *वीरेंद्र कुमार सिंह* को ही नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से पून टिकट दिए जाने की वजह से जनसभा में काफी विरोध किया गया था? तब केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि मैं आप लोगों की बातों को समझ रहा हूं? इसी प्रकार बिहार - विधानसभा चुनाव 2020 में भी नबीनगर के जदयू विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह का क्षेत्र की जनता ने चुनाव से पहले  गांव में काफी विरोध किया था?  इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* ने लगातार तीसरी बार नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से ही टिकट देकर अपने पुराने जदयू विधायक *वीरेंद्र कुमार सिंह* को ही चुनाव मैदान में उतार दिया था? नतीजतन 2020 बिहार - विधानसभा चुनाव में नबीनगर क्षेत्र की जनता ने गुस्से में आकर अपने पुराने जदयू विधायक को‍ चुनाव हरा दिया?  और राजद प्रत्याशी डब्ल्यू सिंह को चुनाव जीता दिया? वही कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र संख्या - 222 से गी लगातार दूसरी बार महागठबंधन उम्मीदवार कांग्रेस प्रत्याशी *राजेश कुमार उर्फ राजेश राम* को ही पार्टी ने टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया? और चुनाव जीतने में सफलता भी मिली? लेकिन कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने पार्टी से लाचार होकर अपने पुराने प्रत्याशी को वोट देकर चुनाव जिता दिया ? लेकिन यह भी हकीकत है कि कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र की जनता कांग्रेस विधायक राजेश कुमार उर्फ राजेश राम  से अंदरूनी खफा है?  कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र की जनता का कहना है की अपने 05 वर्षों के कार्यकाल में राजेश राम ने किया ही क्या? लेकिन हकीकत है कि हम लोगों ने इस बार के चुनाव में प्रतिपक्ष नेता *माननीय तेजस्वी प्रसाद यादव* को देखते हुए अपना कांग्रेस प्रत्याशी को दोबारा वोट देकर चुनाव जीता दिया? क्योंकि राजद भी महागठबंधन में ही शामिल था




  इसके अलावे कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी *राजेश कुमार उर्फ राजेश राम* को बिहार -  विधान सभा चुनाव 2015 में भी चुनाव जीतने का मुख्य कारण था?  कि उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* भी *महागठबंधन के बैनर तले* ही बिहार में चुनाव लड़ा था? जिसमें कांग्रेस, राजद भी साथ में ही थी?  इसी वजह से बिहार के मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* ने अपने सीटिंग विधायक को हटाकर *कांग्रेस* को सीट दे दी थी? इसलिए कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के *राजेश कुमार* प्रत्याशी बना दिया गया था? और *नीतीश कुमार* को अपने ही *जदयू सीट* का काफी नुकसान हो गया था? लेकिन फिर भी 2010 में कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से जदयू के विधायक बने *ललन राम* ने अपना टिकट कटने के बावजूद भी महागठबंधन उम्मीदवार बने *राजेश राम* को इमानदारी पूर्वक समर्थन करते हुए 2015 में चुनाव जीता दिया था? उसी वक्त 2015 के चुनाव में जब संवाददाता ने *ललन राम उर्फ ललन भुईया* से सवाल पूछा था?  कि आप कुटुंबा  - देव विधानसभा क्षेत्र के सिटिंग विधायक हैं? इसके बावजूद भी आपको जदयू ने टिकट नहीं दिया? और कांग्रेस प्रत्याशी *राजेश कुमार* को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया? इसके बावजूद भी आपने नामांकन क्यों नहीं दाखिल किया? तब *ललन राम* ने पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा था?  कि कभी - कभी बड़ी जंग जीतने के लिए छोटी - छोटी बातों को भूल जाना चाहिए? और मैं ईमानदारी पूर्वक महागठबंधन प्रत्याशी *राजेश कुमार* को ही भरपूर मदद करके कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीताऊंगा? और काफी मदद भी किया था? इसके अलावे बिहार -  विधानसभा चुनाव 2015  में ही जब बिहार - सरकार के पूर्व पर्यटन राज्य मंत्री रह चुके डॉ0 *सुरेश पासवान* को भी किसी पार्टी से टिकट नहीं मिला था?  तो अपना नामांकन *निर्दलीय प्रत्याशी* के तौर पर दाखिल कर दिया था? और लगभग जितना मत *डॉ0 सुरेश पासवान* को प्राप्त हुआ था?  उतना ही मत से 2015 बिहार -  विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल *राजेश कुमार उर्फ राजेश राम* चुनाव जीते थे? अन्यथा 2015 में कांग्रेस प्रत्याशी *राजेश कुमार उर्फ राजेश राम* कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से कभी भी विधायक बनना संभव नहीं था? जो हकीकत था? और बिहार -  विधानसभा चुनाव 2015  में कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक रहे *ललन राम* का *राजेश राम* को पूरा समर्थन करना एवं पूर्व पर्यटन राज्यमंत्री रह चुके *डॉ0 सुरेश पासवान का निर्दलीय चुनाव लड़ने* की वजह से ही 2015 विधानसभा चुनाव में बिहार -  सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं *हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सुप्रीमो जीतन राम मांझी* के पुत्र *संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी* एन0डी0ए0 में शामिल रहने के बावजूद भी कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए थे? और बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भी कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में ताज्जुब की बात रही? कि  पूर्व जदयू विधायक *ललन राम* को फिर जदयू की तरफ से सीट न देकर एन0डी0ए0 में शामिल *हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा*के सीट पर ही  *श्रवन भुइया* को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया गया था? इसी वजह से पूर्व जदयू विधायक लगन राम ने भी कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र की जनता के आग्रह पर *निर्दलीय प्रत्याशी* के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया था? तब नामांकन के दिन पूर्व जदयू विधायक द्वारा निर्दलीय नामांकन किए जाने के बाद *समाहरणालय परिसर* में ही संवाददाता ने सवाल पूछा था? कि पिछले बिहार -  विधानसभा चुनाव 2015 में भी आपसे जब सवाल पूछा गया था? कि आपको सिटिंग विधायक रहते हुए भी महागठबंधन में शामिल *कांग्रेस प्रत्याशी राजेश राम* को बनाया गया है? इसके बावजूद भी आपने नामांकन दाखिल क्यों नहीं किया? तो आपने तो कहा था? कि कभी-कभी बड़ी जंग जीतने के लिए छोटी - मोटी बातों को भूल जाना चाहिए? और उस वक्त कांग्रेस प्रत्याशी को आपने पूर्ण समर्थन करके चुनाव जिताने का काम किया था? तो इस बार भी तो एन0डी0ए0 में हीं *हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा* की पार्टी भी शामिल है? तो आप इस बार हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा प्रत्याशी को *सपोर्ट* क्यों नहीं कर रहे हैं? और आप निर्दलीय नामांकन क्यों किए? तब समाहरणालय परिसर में ही मीडिया कर्मियों की मौजूदगी में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि? बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सुप्रीमो *जीतन राम मांझी* मुझे बार- बार नीचा दिखाने का काम करते हैं? इसलिए ही मैं कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र के जनता  के बार - बार चुनाव लड़ने के लिए आग्रह किए जाने की वजह से *निर्दलीय नामांकन* दाखिल करके चुनाव लड़ रहा हूं? जब पूछा कि यदि आप निर्दलीय चुनाव जीत जाते हैं? तो एन0डी0ए0 मे शामिल *नीतीश कुमार* की पार्टी *जदयू* में हीं रहेंगे या *महागठबंधन* के साथ? तब कहा कि *माननीय नीतीश कुमार जी* मेरे लिए भगवान के समान है? और मै  *माननीय नीतीश कुमार जी* के साथ ही रहूंगा? और कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में *ललन राम* ने निर्दलीय प्रत्याशी होने के बावजूद भी *20,433  मत* प्राप्त किया? और कुल 50,822 मत प्राप्त कर महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के सिटिंग विधायक *राजेश राम* दोबारा चुनाव जीता? और *एन0डी0ए0 में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा प्रत्याशी श्रवण भुइया भी *16,653* मतों के अंतर से चुनाव हार गया*? वही औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र संख्या - 223 में भी इस बार के बिहार - विधानसभा चुनाव में बिहार - सरकार के पूर्व मंत्री रह चुके एवं भाजपा प्रत्याशी *रामाधार सिंह* भी महागठबंधन में शामिल कांग्रेस प्रत्याशी *आनंद शंकर सिंह* से लगातार दूसरी बार चुनाव हार गए? हालांकि इस बार पूर्व सहकारिता मंत्री *रामाधार सिंह* का विधानसभा चुनाव में हार मैं मात्र 2,243 मतों का ही अंतर था? ज्ञात हो कि इस बार औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व सहकारिता मंत्री का जो चुनाव में हार हुई है? इसी मुद्दे पर पिछले चुनाव में भी हुई हार की बात को याद कराते हुए जब नामांकन के बाद समाहरणालय परिसर में कई मीडिया कर्मियों की मौजूदगी में संवाददाता ने भी पूर्व *सहकारिता मंत्री* से सवाल पूछा था? की भाजपा में ही खेमा बटा हुआ है? आपका *भितरघात* होने की काफी संभावना है? आप इससे चुनाव में कैसे निपटेगे? तब पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा था? कि मुझे पूर्व में 04 चुनाव जितने का भी अनुभव प्राप्त है? और उसी *टेक्निक* का मैं  अवश्य प्रयोग करूंगा? और निश्चित चुनाव जीतूंगा? लेकिन अंत में वह *टेक्निक* पूर्व *सहकारिता मंत्री* का काम नहीं आया? और औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए? और चुनाव हारने के बाद अंधाधुंध गंभीर आरोप भाजपा सांसद *सुशील कुमार सिंह* पर चुनाव हराने का लगाते जा रहे हैं? और कहते हैं कि *भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह* ने बिहार -  विधानसभा चुनाव 2015 एवं बिहार - विधानसभा चुनाव 2020 दोनों में कांग्रेस प्रत्याशी *आनंद शंकर सिंह* को मदद करके चुनाव जीताया? और मुझे *भाजपा प्रत्याशी होने के बावजूद* भी दोनों बार चुनाव हराया? जो औरंगाबाद की पब्लिक भी जानती है? ज्ञात हो कि बिहार - सरकार के पूर्व सहकारिता मंत्री  *रामाधार सिंह* एवं *भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह* दोनों के बीच काफी पुराना विवाद है? इस बात को पूरे जिले बासी भी जानते हैं? कई बार इन लोगों के बीच काफी *वाक युद्ध* भी हुआ है? जो मीडिया की सुर्खियों में भी पूर्व में छाया हुआ रहा है?
ठीक इसी प्रकार इस बार संपन्न बिहार - विधानसभा चुनाव 2020 में *रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या - 224* के अंदर भी   अजीब ही मतगणना के बाद *चुनाव परिणाम* देखने को मिला? कि एक *निर्दलीय प्रत्याशी होने के बावजूद भी प्रमोद कुमार सिंह* ने  महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल प्रत्याशी *मोहम्मद नेहालुद्दीन* या फिर दो बार से लगातार *जदयू के सिटिंग विधायक रहे *अशोक कुमार सिंह*  को भी सोचने पर मजबूर कर दिया? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है? कि इस बार रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर भी *प्रमोद कुमार सिंह* नै 53,896 मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर जगह बना ली? जबकि महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल प्रत्याशी एवं पूर्व मे रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से ही सन 2005 में चुनाव लड़ने के बाद विधायक बने *मोहम्मद नेहालुद्दीन* को भी कुल 63,325  मत प्राप्त हुआ? जो इस बार के चुनाव में रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने *मोहम्मद नेहालुउद्दीन* से निर्दलीय प्रत्याशी *प्रमोद कुमार सिंह* का कुल प्राप्त मतों का अंतर सिर्फ 9,429 मतों का ही है? वही दो बार से जदयू के लगातार विधायक रहे *अशोक कुमार सिंह* का कुल प्राप्त मत 26,833 ही रहा? और रफीगंज विधानसभा क्षेत्र *बसपा प्रत्याशी बने रंजीत कुमार* का कुल प्राप्त मत 14, 597 है? इसके अलावे रफीगंज विधानसभा क्षेत्र में पहली बार लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी बने *मनोज कुमार सिंह* को कुल 8,491 मत प्राप्त हुआ? ध्यातव्य हो कि ऐसे तो इस बार रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से  महागठबंधन में शामिल राजद प्रत्याशी *मोहम्मद नेहालुद्दीन* ने चुनाव जीतकर *राजद* का परचम लहरा ही दिया? लेकिन यह भी बात सत्य है कि जिस प्रकार से निर्दलीय प्रत्याशी बने *प्रमोद कुमार सिंह* ने मत प्राप्त किया है? आगामी दिनों में किसी भी दल के प्रत्याशियों के लिए मुश्किल अवश्य खड़ा कर देंगे? इसमें दो राय नहीं? और दूसरी बात मतगणना के दिन ही मतगणना केंद्र के अंदर उठ रही थी?  कि खासकर *रफीगंज शहर वासियों* ने जिस प्रकार से *प्रमोद कुमार सिंह* को अपना भरपूर मदद करते हुए मत दिया था? वह चौंकाने वाला था? जो किसी भी दल के लोगों ने यह नहीं सोचा था? कि इस प्रकार से रफीगंज शहरवासी भी *प्रमोद कुमार सिंह* को वोट दे देंगे? और इसी बात को लेकर जब रफीगंज *राजद* के खेमे में भी *रफीगंज शहर* के लिए *मतगणना केंद्र*  पर बात उठी थी? तो रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने *मोहम्मद नेहालुद्दीन* भी बोल रहे थे कि खासकर *रफीगंज शहर* में ऐसा क्या हुआ? कि शहर वासियों ने भी *प्रमोद कुमार सिंह* को ही लगभग सारा वोट दे दिया! इसलिए चुनाव तो मैं अवश्य जीत गया? लेकिन *रफीगंज शहर* के लिए हम समीक्षा अवश्य करेंगे? यदि इस समीकरण को वास्तव में देखा जाए?  तो रफीगंज निर्दलीय प्रत्याशी *प्रमोद कुमार सिंह* को यदि किसी भी पार्टी से टिकट मिला होता?  तो चुनाव जीतना तय था?

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