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कलेक्टर रीवा डॉ.इलैया राजा टी का औचक निरीक्षण, पटवारी को निलंबित करने के दिए निर्देश


कलेक्टर रीवा ने तहसील हुजूर वृत्त बंकुईयां का किया निरीक्षण, त्वरित जांच कर दोषी पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के दिए निर्देश।

मध्य प्रदेश रीवा का राजस्व विभाग एक बार फिर सुर्खियां बटोर रहा है। मामला तहसील हुजूर के बनकुईयां वृत्त का है जहां कलेक्टर रीवा डॉ. इलैया राजा टी के पहुंचते ही हड़कंप मच गया।

ज्ञात हो पटवारी हल्का जुड़मनिया वृत्त बनकुइयां के किसान की भूमि खसरे पर हल्का पटवारी द्वारा गिर्दावरी में धान की जगह उड़द दर्ज कर दिया गया था, जिसकी जानकारी उक्त किसान को धान विक्रय का पंजीयन कराते समय पता चला, जब पंजियनकर्ता ने किसान के भूमि खसरे की गिर्दावरी में धान की जगह उड़द दर्ज होना बताया। किसान पुत्र द्वारा उक्त खसरे की गिर्दावरी में सुधार करवाने हेतु कई दिनों से हल्का पटवारी, तहसीलदार के कार्यालय का चक्कर लगाया जा रहा था, लेकिन किसान की किसी ने नहीं सुनी। थक हार कर किसान पुत्र द्वारा कार्यालय कलेक्टर जाकर डॉ इलैया राजा टी को समस्त मामले की जानकारी दी, जिसमें जहां एक ओर तत्परता दिखाते हुए कलेक्टर रीवा द्वारा पैदल जाकर तहसील हुजूर वृत्त बनकुईयां का औचक निरीक्षण कर तहसीलदार आरपी त्रिपाठी से जांच कर दोषी पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं दूसरी ओर तहसीलदार तहसील हुजूर आर.पी. त्रिपाठी पटवारी का पक्ष बचाव करते नजर आए। उक्त मामले में तहसीलदार आर.पी. त्रिपाठी से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने पटवारी का पक्ष बचाव करते हुए यह कहा कि किसान स्वयं पोर्टल ऐप के माध्यम से अपनी फसल दर्ज कर सकता है, मात्र फसल की पुष्टि पटवारी करता है। *बड़ा सवाल* यह है कि यदि हल्का पटवारी फसल की पुष्टि घर बैठे करता है तो क्या यह सही है? *यदि किसान इतना ही पढ़ा लिखा होता कि वह इंटरनेट पोर्टल एवं ऐपों की जानकारी रखता उन्हें चला सकता तो वह नक्शा खसरा पंचसाला आदि की जानकारी हेतु तहसील के चक्कर लगाने या खेतों में हल चलाने की बजाय अलीशान जगह में बैठकर कंप्यूटर लैपटॉप चलाता या आसमान में फाइटर प्लेन नहीं उड़ाता?* राजस्व विभाग में लगभग 70% मामले मात्र पटवारियों की उदासीनता, गलती या लापरवाही के कारण होते हैं कहीं पटवारियों द्वारा खसरे में गलत जानकारी, नाम दर्ज कर दिया जाता है तो कहीं उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के लिए गलत तथ्यों पर आधारित जानकारियां दी जाती है। और उसका खामियाजा निर्दोष किसानों को भुगतना पड़ता है।

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