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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 'ओजस्विनी' द्वारा 'कितनी सुरक्षित हैं बालिकाएं?' विषय पर आंनलाइन परिचर्चा'*

BHARAT NEWS LIVE24*. अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 'ओजस्विनी' द्वारा 'कितनी सुरक्षित हैं बालिकाएं?' विषय पर

आंनलाइन परिचर्चा'*
रिपोर्टः
डीकेपंडित
 गया (बिहार )में 

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के सुअवसर पर अंतरराष्ट्रीय  हिंदू परिषद द्वारा संचालित गया जिला की 'ओजस्विनी' ईकाई द्वारा 'कितनी सुरक्षित हैं बालिकाएं' विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गयी, जिसका संचालन ओजस्विनी की गया जिलाध्यक्ष डॉ०कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने किया।  इस अवसर पर प्रतिभागियों ने समाज में बालिकाओं और महिलाओं के असुरक्षित अस्तित्व पर अपने विचार रखते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न युक्तियाँ सुझाईं। परिचर्चा के प्रारंभ में कार्यक्रम की संयोजिका डॉ०रश्मि ने इस साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मुख्य प्रतिपाद्य "हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य" को प्रतिभागियों से साझा किया। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाएँ और बच्चियाँ कहीं भी सुरक्षित नहीं है। न बाहर, न घर न माता के गर्भ में ही। इक्कीसवीं सदी में भी लोगों की दकियानूसी मानसिकता नहीं बदल सकी। आज भी हर जगह बच्चियों और महिलाओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है और उन्हें हर जगह, हर समय, बार-बार उनके बेटी या बहू होने का बोध करा कर मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें समाज में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने से रोक देने हेतु हर प्रयत्न किए जाते हैं। डॉ० रश्मि ने हाथरस में हुई दुष्कर्म की अति निंदनीय दुर्घटना का संदर्भ लाते हुए कहा कि आज महिलाओं की सुरक्षा की वास्तविक फिक्र कुछ ही लोगों को है। अधिकांश लोग तो जाति, धर्म , संप्रदाय, प्रांत और राजनीतिक पार्टियों की आँच को दहका कर अपने संकीर्ण स्वार्थ की रोटियाँ सेंकने में ही लगे होते हैं। इसलिए ज़रूरत है कि बालिकाएँ,  युवतियांँ, महिलाएँ और संवेदनशील जागरूक पुरुष सभी एकजुट होकर समाज में हो रहे लैंगिक भेदभाव का विरोध करें। आदर्श मध्य विद्यालय, चिरैली की विज्ञान शिक्षिका डॉ०ज्योति प्रिया ने कहा कि हम महिलाओं और बेटियों को हमारे साथ किए जा रहे भेदभाव के विरुद्ध स्वयं अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी तभी हमारा भविष्य संरक्षित हो सकेगा। हमें ही आगे आना होगा। ओजस्विनी की महामंत्री शिल्पा साहनी ने कहा कि माता-पिता दोनों का यह कर्तव्य है कि वह प्रारंभ से ही अपने बेटों में लड़कियों और महिलाओं का निःस्वार्थ सम्मान करने की बात बताएं। रिया पाठक ने अॉटो आदि पर अॉटोचालकों द्वारा बजाए जा रहे भद्दे गानों पर आपत्ति जताई। रिंकू कुमारी ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा-दीक्षा अत्यंत आवश्यक है, जिससे वो दुनिया को ठीक से समझ सकें और खुद को सुरक्षित रख सकें। रिया कुमारी ने भ्रूणहत्या जैसे अमानवीय जघन्य अपराधों पर अपना रोष प्रकट किया, तो अमीषा भारती ने भविष्य में महिलाओं की सुरक्षा हेतु जी-जान से हर कर्तव्य किए जाने हेतु अपनी इच्छा जताई । आशना ने कहा कि पुरुषों को सभी माँ-बहन-बहू-बेटियों में अपनी ही माँ, बहन, बहू-बेटी की छवि देखनी चाहिए। यदि सभी पुरुष ऐसी पवित्र भावना से स्वतः-संचालित होंगे तो समाज में कहीं भी बच्चियों और महिलाओं के साथ अन्याय, अत्याचार, विभेद, क्रूरता और दुष्कर्म जैसी घटनाएं नहीं होंगी। कार्यक्रम के अंत में शिक्षिका डॉ०ज्योति ने सभी प्रतिभागियों को बेटी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैसी भी परिस्थिति हो हम महिलाओं को उनका सामना डंटकर करना होगा, आवाज उठानी होगी। कार्यक्रम की संचालिका डॉ०रश्मि ने अन्य सभी प्रतिभागियों को उनकी धैर्यपूर्ण प्रतिभागिता हेतु धन्यवाद देते हुए कहा कि-

"विपत्तियाँ के समक्ष ढाल बनकर खड़ी रहती हैं बेटियाँ।
दुःख-दर्द-पीड़ा-वेदना को हँस-हँस सहती हैं बेटियाँ।
खुद टूट कर भी जोड़ती आई हैं रिश्तों की डोर को।
स्नेह-सलिल-सी परिवार-सुरसरिता में बहती हैं बेटियाँ।"

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