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न्यूज़ सीधी✍️ धान एवं अरहर की फसल में कीट नियंत्रण करें किसान भाई- डॉ. धनंजय सिंह👇👇👇
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भारत न्यूज़ लाइव 24 हर  खबर आप तक संवाददाता धीरेंद्र पांडेय  (M.P. क्राइम हेड) सीधी 


    कृषि विज्ञान केन्द्र, के सस्य वैज्ञानिक डॉ. धनंजय सिंह एवं अमृता तिवारी, कृषि विभाग के सहायक संचालक कृषि रवीश सिंह एवं उत्तम सिंह बागरी के द्वारा सीधी जिले के विभिन्न ग्रामों में भ्रमण किया गया। वैज्ञानिकों के द्वारा निरीक्षण में पाया गया कि धान की फसल में इस समय दूधिया अवस्था होने के कारण फसल में गंधी कीट ‘‘मॉछी‘‘ कीट का प्रकोप देखा गया यह कीट धान की फसल का एक प्रमुख घातक कीट है जो कि धान की दूधिया अवस्था में ज्यादा फसल को नुकसान पहुॅचाता है यह कीट धान की फसल में बालियों में अपने मुखांग चुभाकर उसके अंदर का रस चूस लेते है जिसकी वजह से बालियां में बीज का भराव नहीं हो पाता हैं और पूरी-की पूरी बाली सूख जाती है। जिस खेत में गंधी कीट उपस्थित होते हैं उस खेत से एक विशेष प्रकार की गंध का आभास होता है अगर किसान भाई इस गंध को पहचान कर समय रहते उचित कीटनाशक का प्रयोग करें तो वह अपनी फसल का बचाव कर सकते हैं। इस कीट के लिये फिप्रोनिल $ इमिडाक्लोरोप्रिड 10 एम.एल प्रति 15 लीटर की टंकी में डालकर यदि इस कीटनाशक का छिड़काव करें तो फसल की सुरक्षा की जा सकती है। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिकों द्वारा अरहर के खेतों का भ्रमण किया गया जहॉ उन्होने यह अनुभव किया कि अरहर के खेत में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप है पत्ती लपेटक कीट के द्वारा पत्तियॉ सूख जाती है और पौधे की सही बढ़वार नहीं हो पाती है इस कीट से बचाव के लिये प्रोपेनोफास 30 एम.एल प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से इस कीट से निजात पाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अरहर की फसल में कम्बल कीट का भी प्रकोप देखा गया इस कीट के द्वारा भी फसल की सही तरीके से बढ़वार नहीं हो पाती है जिससे किसान भाई अच्छा उत्पादन प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इस कीट के प्रबंधन के लिये लिये इण्डाक्साकार्ब 15 एम.एल प्रति टंकी के हिसाब से छिड़काव करने पर कीट की रोकथाम की जा सकती है।   

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