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पारेशवर पंचायत में विकास कार्य के नाम पर लाखों के घोटालों को अंजाम दिया सरपंच सचिव ने

*पारेशवर पंचायत में विकास कार्य के नाम पर लाखों के घोटालों को अंजाम दिया सरपंच सचिव ने
*


*प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर 10,000 रुपए से लेकर 15000 रुपए तक की मांग सचिव द्वारा की जा रही है*


*भ्रष्ट सरपंच और सचिव की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज की गई*



*खेल मैदान की राशि सरपंच-सचिव द्वारा डकारी गई*


*स्वच्छ भारत अभियान की खुलेआम उड़ रही धज्जियां*



*पिछोर ब्रेकिंग न्यूज*



शिवपुरी/पिछोर जनपद पंचायत के अंर्तगत आने वाली ग्राम पंचायत पारेशवर में विकास कार्य के नाम पर सरपंच सचिव ने लाखों रुपए के घोटाले कर डाले और राशि निकालकर डकारी स्वच्छ अभियान की खुलेआम उड़ रही है धज्जियां और ग्रामीणों ने बताया की खेल मैदान की संपूर्ण राशि निकालकर सरपंच सचिव ने डकार ली है और ग्राम वासियों से वृद्ध पेंशन योजना और विधवा पेंशन योजना के नाम पर प्रत्येक हितग्राही पर ₹2000 की मांग सचिव द्वारा की जा रही है और रास्ते में इतना कीचड़ मचा हुआ है कि ग्राम वासियों को निकलने में बहुत ही समस्या का सामना करना पड़ रहा है और ग्रामीणों ने बताया कि चार महीने जो वर्षा के होते हैं तो इस दौरान कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है तो वह रास्ते में ही दम तोड़ देता है। क्योंकि उस व्यक्ति को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है और दो किलोमीटर दूर तक कीचड़ से होकर निकलना पड़ता है जिससे व्यक्ति रास्ते में ही दम तोड़ देता है। और मंदिर जाने के लिए भी कीचड़ से होकर निकलना पड़ता है और कई व्यक्तियों की गंदगी के कारण मृत्यु हो चुकी है जिन्हें समय पर उपचार न मिल पाने से और उनकी अंतिम विदाई के लिए भी कोई मुक्तिधाम पारेशवर पंचायत में नहीं है जिसकी राशि सरपंच सचिव द्वारा निकाली जा चुकी है और जब कोई ग्रामीण अपनी समस्या लेकर पंचायत भवन में जाता है तो पंचायत भवन में भारी गंदगी देखने को मिलती है परंतु सरपंच सचिव में से कोई भी व्यक्ति पंचायत भवन में नहीं मिलता है और ग्रामीणों ने बताया कि बरसों से पंचायत भवन खुला भी नहीं है और यदि कोई व्यक्ति सरपंच सचिव के पास छोटे से छोटे काम लिए जाता है तो सचिव द्वारा ₹1000 की मांग की जाती है जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज की है परंतु आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है और प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भी प्रत्येक हितग्राही से 10,000 से लेकर 15000 तक की मांग की गई है और ग्रामीणों ने कहा कि हमारे सचिव गांव में आते हैं तो शराब पीकर भाग जाते हैं और ग्रामीण अपनी समस्या को लेकर दर-दर भटक रहे हैं फिर भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है विकास कार्य के नाम पर लाखों रुपए की राशि निकाली गई सरपंच सचिव के द्वारा और धरातल पर कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ



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