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बेहतर होता लोजपा बिहार में अकेले चुनाव लड़ती - मनोज कुमार सिंह।*

BHARAT NEWS *बेहतर होता लोजपा बिहार में अकेले चुनाव लड़ती - मनोज कुमार सिंह।*   
बिहार के बडी़ खबर 
रिपोर्टः .ajay pandey
    मगध ब्यूरो 

बिहार में     बिहार विधानसभा आम चुनाव 2020                  
  ( भाजपा नेता रामेश्वर चौरसिया द्वारा शनिवार को औरंगाबाद में मीडियाकर्मियों  के समक्ष बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ दिए गए बयान को लोजपा नेता मनोज कुमार सिंह ने भी संवाददाता से हूई भेंट वार्ता के दौरान रविवार को किया समर्थन, संवाददाता ने जब लोजपा नेता से सवाल पूछा की लोकतंत्र में चार स्तंभ तो माने जाते हैं? कार्यपालिका,  न्यायपालिका, विधायिका एवं पत्रकारिता? तीन स्तंभों को तो सारी सुख - सुविधाएं,  सुरक्षा मौजूद होती है? लेकिन जब कोई भी पत्रकार निष्पक्ष खबर प्रकाशित करता है या अपने चैनलों के माध्यम से प्रमुखता से दिखाता है? तो उसे धमकी मिलती है?  या उसकी हत्या करा दी जाती है? तब लोजपा नेता ने पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी खतरा है? इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को गंभीरता से सोचना होगा और अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को राजनीति में लाने से रोकना होगा? वैसे नेताओं को भी चाहिए कि अपनी स्तुति सुनने के साथ-साथ निंदा सुनने की भी क्षमता होनी चाहिए? तभी होगा असली भारतीय लोकतंत्र का सपना साकार, लोजपा नेता ने कहां की लोजपा सुप्रीमो माननीय रामविलास पासवान जी ने तो पूर्व में घोषणा भी किया है की हम अपने पार्टी में पत्रकारों को भी टिकट देंगे, मुख्य धारा में जोड़ने का काम करेंगे )।                         ( बिहार ) लोक जनशक्ति पार्टी के सन 2007 से 2015 तक दो टर्म पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके एवं वर्तमान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार सिंह के मुख्यालय स्थित आवास पर जब रविवार दिनांक - 20 सितंबर 2020 को पूर्वाहन लगभग 10 बजे मुलाकात हुई?  तो  संवाददाता एवं लोजपा नेता के बीच विभिन्न तीखी राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा प्रारंभ हुई! तब लोजपा नेता भी अपने बेबाक अंदाज में संवाददाता द्वारा विभिन्न मुद्दों पर पूछे गए तीखे सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हो गए! तत्पश्चात संवाददाता ने पूछा कि सर्वप्रथम तो आप बताइए की आपने लोजपा की पार्टी कब ज्वाइन की? तब कहा कि जिस वक्त लोक जनशक्ति पार्टी का निर्माण हुआ था! उसी स्थापना के वक्त हम 28 नवंबर 2000 को  दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में स्थापना काल का सदस्य बना था! उस वक्त पार्टी का संगठन बन रहा था! उस वक्त हम भी मौजूद थे! जब पूछा कि आपको राजनीति में आने के लिए प्रेरणा किससे मिली? तब कहा कि मैं काफी सुनता था की माननीय रामविलास पासवान जी जिस विभाग में भी मंत्री रहे! उस विभाग में काफी अच्छा काम किए! उस वक्त भी माननीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी के शासनकाल में माननीय लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान जी दूरसंचार मंत्री थे! इसलिए रामविलास पासवान जी के रिकॉर्ड को सुन कर मैं प्रेरित हो गया था! उस वक्त हम सोचे कि इनके नेतृत्व में यही बिहार का विकास होगा! मुझे एक बार जादूगोड़ा, यूरेनियम माइन्स ( भारत - सरकार ) और दूसरी बार बिहार राज्य विद्युत बोर्ड से भी नौकरी करने का मौका मिला! लेकिन मैं सोचा इससे बेहतर होगा की राजनीति में ही मन लगाएं! मैं दोनों नौकरी को छोड़ दिया और लोकसभा स्तर - पर लोजपा के लिए काम किया! पार्टी निर्माण के वक्त मुझे युवा लोजपा जिलाध्यक्ष बनाया गया! फिर पार्टी प्रवक्ता, पार्टी कार्यकारी जिलाध्यक्ष, 2007 में पार्टी जिलाध्यक्ष बनाया गया! लगातार दो टर्म 2015 तक पार्टी के औरंगाबाद जिलाध्यक्ष रहे! जब प्रदेश अध्यक्ष प्रिंस राज की मौजूदगी में चिराग पासवान जी की कमेटी बनाई जा रही थी तो मुझे प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य में शामिल किया गया!  इसके बाद  जब पूछा कि क्या आपको लगता है? की जिस प्रकार से चिराग पासवान नीतीश कुमार के खिलाफ हमेशा बयान दे रहे हैं? तो बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी आगामी बिहार -  विधानसभा चुनाव 2020 में अकेले चुनाव लड़ेगी? या फिर एन0डी0ए0 के साथ ही मिलकर बिहार में चुनाव लड़ेगी? तब कहा कि विशेष परिस्थिति में ऐसा हो सकता है? कि बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी अकेले चुनाव भी लड़ सकती है? लेकिन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार देश को पुनर्स्थापित किया है! अंतरराष्ट्रीय -  स्तर पर भारत विकसित श्रेणी मैं शामिल हुआ है! भाजपा का सहयोग होना चाहिए! लेकिन जदयू का अपना नेतृत्व अड़ियल रवैया के कारण लोजपा को सम्मानजनक सीट नहीं देगी? तो लोजपा जनता के बीच जाएगी और बिहार में अकेले चुनाव भी लड़ेगी!  ऐसे भी पूर्व में ही लोजपा सुप्रीमो एवं संसदीय बोर्ड द्वारा घोषणा कर दी गई है की बिहार में लोजपा 143 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ सकती है! जिसमें पत्रकारों को भी टिकट दिए जाने की बात लोजपा सुप्रीमो द्वारा कहीं जा चुकी है! लोजपा नेता मनोज कुमार सिंह ने अपनी राय प्रकट करते हुए कहा कि यदि बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी अकेले चुनाव लड़ती है? तो बेहतर होगा?  क्योंकि लोजपा कार्यकर्ताओं में भी जो निराशा बढ़ती जा रही है? वे लोजपा के प्रति जागरूक होंगे? और इससे लोक जनशक्ति पार्टी को भी काफी फायदा होगा? अब ऐसी परिस्थिति में देखना होगा कि लोक जनशक्ति पार्टी आलाकमान क्या फैसला लेते हैं? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा? जब संवाददाता ने लोजपा नेता प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य से पूछा कि शनिवार दिनांक -  19 सितंबर 2020 को भाजपा नेता रामेश्वर चौरसिया जब औरंगाबाद आए थे?  तो  अपने ही एन0डी0ए0 गठबंधन की सरकार पर भी मीडिया के समक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ बयान देते हुए कहा है कि बिहार में *लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह से ध्वस्त है*? जब -  तक कानून - व्यवस्था मैं सुधार नहीं होता है? तब - तक किसी भी राज्य में औद्योगिक विकास संभव नहीं? इसमें आपका क्या राय है? तब श्री सिंह ने भाजपा नेता द्वारा दिए गए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि ठीक ही कहा है! बिना कानून - व्यवस्था सुदृढ़ किए हुए विकास की बात करना बेईमानी होगा! नीतीश जी ने सत्ता के लिए लालू जी की पार्टी, तेजस्वी प्रसाद यादव जैसे लोगो से गिरकर समझौता किए? पुनः बिहार में अपराध बढ़ने लगा? अपराध स्थापित हुआ? बलात्कार,  अपहरण की घटनाएं बढ़ने लगी?  जब पूछा कि बिहार में जब भी चुनाव का वक्त आता है? तो अन्य विकसित देशों की तरह विकास के नाम पर वोट मांगने के बजाय अधिकांश पार्टियों के नेता सिर्फ जाति, धर्म, विशेष जातियों के आरक्षण के नाम पर ही राजनीति करने लगते हैं? लेकिन आर्थिक आधार पर नए सिरे से सर्वे कराकर देश में आरक्षण लागू करने की बात कोई भी पॉलीटिकल पार्टी के लोग क्यों नहीं करते? तब अपने मन की बात शेयर करते हुए कहा कि दुर्भाग्य है की देश में सभी पार्टियों का एक ही राग है? तुष्टीकरण के राजनीति के तरह उकसाकर वोट  की बात करते हैं? आजादी के 73 साल बाद भी सुधार नहीं हुआ? आरक्षण से भी कुछ लोगों को छोड़ विशेष किसी व्यक्ति को भी फायदा नहीं हुआ? इसलिए इस मामले में सभी पार्टियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए? देश में आर्थिक विकास सर्वप्रथम जरूरी है! माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इस पर पहल कर रही है! फिर आरक्षण नीति भी खत्म होगी! 10% पहली बार आरक्षण स्वर्णों को भी दिया! उस वक्त माननीय लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान जी ने भी 15% स्वर्णों को आरक्षण देने की बात किया था!स्वर्णों में भी गरीब है! जब पूछा कि नवीनगर प्रखंड अंतर्गत महुआव पंचायत के अलावे कई स्थानों से भी जानकारी मिलती है कि बी0पी0एल0 सूची में भी ऐसे लोगों का नाम शामिल किया गया है? जिनके घर में लोग नौकरी करते हैं? अच्छी - खासी आमदनी भी है? करोड़पति भी है? इसके बावजूद भी उनका नाम बी0पी0एल0 सूची में दर्ज है? अधिकांश वैसे लोग जन - वितरण प्रणाली दुकानदार से बी0पी0एल0 सूची कै रेट में चावल, गेहूं उठाकर स्थानीय दुकानदार के यहां ही तुरंत ऊंचे दामों पर बेचकर पैसा भजा लेते हैं? जो जगजाहिर है? अधिकांश नरेगा में भी वैसे लोगों का ही नाम शामिल किया गया है? जो सुखी संपन्न है?  सरकारी पैसे का गलत तरीके से हमेशा बंदरबांट किया जा रहा है? तब लोजपा नेता ने कहां की जिसने भी ऐसे लोगों को गलत तरीके से सूची में नाम शामिल किया? उस पर भी जांच के क्रम में दोषी पाए जाने पर नियमानुकूल विभागीय कार्रवाई होना चाहिए? मैं आपको कहना चाहूंगा राज्य की व्यवस्था बिल्कुल फेलियर है? इसमें सुधार की नीति पर कार्य करना होगा? सरकार को चाहिए कि किसी को भी मुफ्त में राशन या राशि देने के बजाय कुछ काम लिया जाए? नहीं तो लोग मुफ्तखोरी पर ही निर्भर हो जाएगा? यह मुफ्तखोरी का काम ज्यादा दिन तक नहीं चल सकता है? इसके अलावे श्री सिंह ने बिहार - सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा की बिहार -  सरकार द्वारा बिहार में शराबबंदी कानून, बालू, पहाड़ ( माइंस ) पर रोक तो लगा दी गई? लेकिन बिहार में क्या चौक - चौराहे पर लोग दारु नहीं पी रहे हैं? होम डिलीवरी नहीं हो रही है?  शराबबंदी  कंप्लीट फेलियर है? इस कानून को लागू करने से सिर्फ गलत लोगों को ही धंधा में फायदा हो रहा है? और नीतीश कुमार द्वारा बिहार में इस कानून को लागू करने से सिर्फ सरकार को राजस्व प्राप्ति मे लॉस हुआ है? जब पूछा कि भारतीय लोकतंत्र में चार स्तंभ तो माने जाते हैं? कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका और पत्रकारिता? तीनों स्तंभों को तो सारी सुख सुविधाएं एवं सुरक्षा मौजूद होती है? लेकिन जब कोई भी पत्रकार निष्पक्ष खबर प्रकाशित करता है या अपने चैनल पर चलाता है? तो उसे धमकी मिलती है? या फिर उसे हत्या करा दी जाती है? इस संबंध में आप क्या कहेंगे? तब जवाब देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी खतरा है? सर्वप्रथम तो सभी राजनीतिक पार्टियों को सोचना होगा कि अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को राजनीति में न लाए? न टिकट दे?  वैसे सोच रखने वाले नेताओं को भी चाहिए कि अपनी बड़ाई ( स्तुति ) सुनने के साथ निंदा सुनने की भी क्षमता होनी चाहिए? ऐसे हमारे माननीय लोजपा प्रमुख ने तो घोषणा भी कर दिया है कि हम पत्रकारों को भी टिकट देंगे! मुख्यधारा में जोड़ने का काम करेंगे! जब पूछा कि नवीनगर प्रखंड अंतर्गत महुआव पंचायत में जल - नल योजना के तहत ग्रामीणों से शिकायत प्राप्त हो रही है कि कहीं भी 45 - 50 फिट से अधिक समरसेबल बोरिंग नहीं किया गया है? जो नियमानुकूल नहीं है? गली - नली में भी अधिकांश स्थानों पर घटिया ईट का ही प्रयोग किया गया है? तब लोजपा नेता ने जवाब देते हुए कहा की यह जांच का विषय है? अधिकारियों को देखना चाहिए? और जांच में दोषी पाए जाने पर दोषियों के ऊपर नियमानुकूल विभागीय कार्रवाई करनी चाहिए? लोजपा नेता ने कहा कि मैं आपको बताना चाहूंगा कि बिहार में बहुत जगह बोरिंग किया गया, धंस गया? जल - मीनार बनकर खड़ा है? चालू नहीं हुआ? पूरे राज्य का मामला है? बिहार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है!  बिहार - सरकार को जिस कोरोनाकाल के वक्त बिहार की जनता को मदद करने की जरूरी थी? उस वक्त बिहार -  सरकार निरीह जनता से मदद करने के बजाय वाहन जांच के नाम पर लाखों - लाख की अवैध वसूली चालान के नाम पर प्रशासन से करवाया? जब पूछा कि कई लोगों का कहना है कि प्रशासन को वाहन चेकिंग के नाम पर यदि वाहन चेकिंग ही करना है? तो शहरी क्षेत्र से अलग हटकर किया करें? क्योंकि कोई व्यक्ति अपने बच्चे को स्कूल पहुंचाने जाता है? या जल्दबाजी में अपने घर, दुकान से कोई भी व्यक्ति मार्केट में सामान खरीदने के लिए निकल जाता है? तो पुलिस बे - वजह उस व्यक्ति को तंग करके नाजायज पैसा कमाना चाहती है? और लोग बेवजह परेशान होते हैं? लेकिन यदि शहरी क्षेत्र के बाहर प्रशासन वाहन चेकिंग भी करेगी?  तो कोई नहीं कहेगा? कि हम मार्केट करने के लिए अपने घर से निकल गए? तब कहा कि आपका कहना सही है! पुलिस को शहरी क्षेत्र से बाहर ही वाहन चेकिंग करना चाहिए!

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