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🚎🛑🛑मामला गुढ़  बस  हादसा का उच्च स्तरीय जांच की जरूरत  आरटीओ के खिलाफ बनता था  अपराधिक मामला




भारत न्यूज़ लाइव 24 हर खबर आप तक जिला रीवा संभागीय ब्यूरो चीफ विनोद कुमार पाठक🔷💎👇👇




पुलिस के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में था मामला 

आरटीओ की कार्रवाई संदिग्ध बलि का बकरा बने विभाग के दो बाबू
 
 
 मामला 5 दिसंबर 2000 19 की सुबह का है,इतना भीषण हदशा जो आज भी किसी के जेहन से उतर नहीं रहा है, लेकिन अब मामले को अधिकारियों द्वारा धीरे धीरे अपने दिमाग से हटाया जा रहा है, हालांकि मामले में कार्यवाही की गई थी, कार्यवाही की गाज आरटीओ विभाग के दो बाबू के ऊपर गिरी लापरवाही एवं अनियमितता के चलते उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था उन बाबू में एक बाबू का कुछ दिन पहले देहांत हो गया और एक बाबू अभी भी आस लगाए हुए बैठे हैं की कब हमें बेगुनाह साबित कर दोबारा अपनी कुर्सी पर बैठने की अनुमति मिलेगी

 क्या था मामला
 दरअसल 5 दिसंबर की सुबह जबलपुर से सीधी वाया रीवा जाने वाली प्रधान ट्रैवल्स की बस क्रमांक एमपी 17 पी 0851 गूढ़ बाईपास में सड़क के किनारे खड़े ट्रक क्रमांक यूपी  2257 से टकरा गई थी हादसे में जहां मौके पर ही 9 लोग काल के गाल में समा गए थे तो वहीं 32 यात्री घायल हो गए थे हादसे के बाद आरटीओ द्वारा बस चालक का लाइसेंस और बस का परमिट निरस्त कर दिया गया था इसके बाद पुलिस की जांच में बस संचालक को दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था बस संचालक पर आरोप है कि पूर्व से संचालित बस क्रमांक एमपी 17 पी 2651 को मरम्मत कार्य करवाना दिखाकर दुर्घटनाग्रस्त होने वाली बस एमपी 17 पी 0851 को उक्त मार्ग में चलाने की अनुमति मांगी गई थी जबकि जांच में पाया गया कि दोनों इसी मार्ग पर चल रही थी दोनों बसों का चलना और एक बस का सिलेंडर दिखाना माना जा रहा था  कि बिना आरटीओ के मिलीभगत से संभव नहीं है इसके चलते माना जा रहा था कि आरटीओ मनीष त्रिपाठी के खिलाफ भी अपराधिक मामले दर्ज हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ हर कोई जानना चाहता है कि आखिर क्यों?

 आरटीओ की कारवाही में लीपापोती की बु

 अब अगर बस हादसा के बाद परिवहन विभाग के रीवा आरटीओ मनीष त्रिपाठी की बात करें तो उनके प्रत्येक कार्यवाही में लीपापोती की बू आ रही है,कुछ ऐसे मामले सामने आरहे हैं जिससे प्रतीत होता है की आरटीओ की कार्यवाही कहीं न कहीं संदिग्ध है, दरशल  हादसे के  दिन था 5 दिसंबर उसी दिन आरटीओ मनीष त्रिपाठी ने गुड़ थाना प्रभारी को पत्र जारी कर बताया था कि जो बस में हादसा हुआ है उसके सभी कागजात वैद्य हैं लेकिन मनीष त्रिपाठी ने अपने मुख्यालय में यह रिपोर्ट की थी कि  बस को प्रमाण पत्र हमारे द्वारा जारी नहीं किया गया, हमारे संज्ञान में भी नहीं था, आरटीओ मनीष त्रिपाठी की इस रिपोर्ट से परिवहन विभाग के अधिकारियों ने उन दो बाबू को सस्पेंड कर दिया जिनका कोई दोष नहीं था उन्होंने वही किया जो अधिकारियों ने कहा लेकिन हादसे का, मामले को गंभीरता से देखा जाए तो रीवा आरटीओ मनीष त्रिपाठी के ऊपर भी अपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए था उसका कारण यह था कि हादसे में जिस बस की टक्कर ट्रक से हुई थी वह बस दूसरी बस के परमिट में चल रही थी और मोटर मालिक के द्वारा आरटीओ में पहली बस को मेंटेनेंस कराने के नाम पर सरेंडर दिखाया गया था जबकि पुलिस की जांच में दोनों गाड़ियां चलती पाई गई थी वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जितना दोसी  बस संचालक को माना था उतना ही दोषी आरटीओ रीवा को भी माना था क्योंकि  वाहन स्वामी द्वारा एक गाड़ी को सरेंडर दिखाकर जहां राजस्व की चोरी कर रहा था वही बस सड़क में चला कर कमाई की जा रही थी बस मालिक द्वारा इस तरह से जो धोखाधड़ी की जा रही थी इसकी जांच कराना आरटीओ का काम था आरटीओ की मिलीभगत से ही वाहन स्वामी एक परमिट पर दो गाड़ियों का संचालन कर रहा था क्योंकि उक्त मामले में स्वयं तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने भी कहा  था कि जांच में एक बस को सरेंडर  दिखा कर दोनों बसों का संचालन किया जा रहा था तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने कहा था कि मामले की जांच की जा रही है आरटीओ की भूमिका भी संदिग्ध समझ में आ रही है जांच उपरांत कार्यवाही  भी हो सकती है लेकिन अब उक्त मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है, जनता यह जानना चाहती है कि आखिर उन लोगों को क्या जिनके घर तबाह हो गए कुछ अधिकारियो और कर्मचारियो के कारन

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