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BHARAT NEWS LIVE24 *बेटी दिवस के अवसर पर 'ओजस्विनी' द्वारा 'बेटियों की अभिलाषा' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन*

BHARAT NEWS LIVE24  *बेटी दिवस के अवसर पर 'ओजस्विनी' द्वारा 'बेटियों की अभिलाषा' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन*

गया *बिहार)
बेटी दिवस के सुअवसर पर अंतरराष्ट्रीय  हिंदू परिषद द्वारा संचालित गया जिला की 'ओजस्विनी' ईकाई द्वारा बेटी दिवस के सुअवसर पर 'बेटियों की अभिलाषा' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसका संचालन ओजस्विनी की जिलाध्यक्ष डॉ०कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने किया।  इस अवसर पर  आमंत्रित विशिष्ट वक्ता आदर्श मध्य विद्यालय की विज्ञान शिक्षिका डॉ०ज्योति प्रिया, ओजस्विनी की जिलामंत्री आरती कश्यप, महामंत्री शिल्पा साहनी, मोनिका कुमारी, नमन्या रंजन, निकिता कुमारी, रिया पाठक, रिंकू कुमारी, रिया कुमारी, अमीषा भारती, शालू कुमारी, ईशा शेखर सहित अन्य सभी प्रतिभागियों ने घर तथा समाज में बेटियों की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार रखे। मोनिका कुमारी ने कहा कि जिस घर में बेटे और बेटियों में फर्क होता है, वह घर कभी भी सुखी नहीं रह सकता। छात्रा नमन्या रंजन ने बेटियों के साथ होने वाले दोयम दर्जे के व्यवहार के प्रति नाराज़गी जताते हुए कहा कि प्रश्न बेटियों के लिए ही क्यों किए जाते हैं। निकिता कुमारी ने के अनुसार माता-पिता अपनी बेटियों पर विश्वास रखते हुए उन्हें आगे बढ़ने हेतु हर अवसर उपलब्ध करवाने चाहिए। रिंकू कुमारी ने कहा कि अपनी पहचान बनाने हेतु हम बेटियों को मन लगाकर पढ़ना लिखना चाहिए। रिया कुमारी ने कहा कि बेटियों की अभिलाषाओं और सपनों को कभी भी ऩज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए। सुश्री शालिनी के अनुसार विपरीत परिस्थितियों से कभी भी डरना नहीं चाहिए। डॉ० ज्योति प्रिया ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए बेटियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वरचित कविता 'बेटियों की अभिलाषा' का पाठ करते हुए कहा कि "हम भी चाहती हैं प्यार और दुलार, मात-पिता की समदृष्टि, समभाव और अपना अधिकार" छात्रा अमीषा ने कहा कि बेटी बनकर आई हूँ, माँ-बाप के जीवन में, बसेरा होगा कल मेरा, किसी और के आँगन में,क्यों रिश्ता हमारा इतना अजीब होता है, क्या बस यही हम बेटियों का नसीब होता है? संगीत की छात्रा रिया पाठक ने कहा कि वे अपने गीतों के माध्यम से समाज में बेटों और बेटियों के बीच स्थापित भेदभाव को दूर करने का प्रयत्न करेंगी। डॉ०रश्मि ने कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को बेटी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैसी भी हों विपरीत परिस्थितियाँ, लड़ती हैं बेटियाँ, संघर्ष कर सफलताओं की सीढ़ियाँ चढ़ती हैं बेटियाँ। उन्होंने सभी महिलाओं को मनसावाचाकर्मणा ओजस्विनी बनने कहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कर्तव्यों के संग-संग अपने अधिकारों के प्रति भी सजग रह आगे बढ़ते रहने की कोशिश करते रहनी चाहिए। भेदभाव, हिंसा तथा दुर्व्यवहार का निडरता के साथ विरोध करना चाहिए। आज सभी महिलाओं को एकजुट होने की जरूरत है। बेटियों को पढ़-लिखकर अपने अस्तित्व को गौरवपूर्ण बनाने हेतु हर संभव कोशिश करने की ज़रूरत है। बेटियाँ भी बेटों की तरह ही माँ-बाप के भविष्य को संरक्षित रखती आई हैं और रखती रहेंगी।

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