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BHARAT NEWS LIVE24 पूर्व मंत्री ने अपनी धर्मपत्नी का पैतृक आवास से संपन्न किया अंतिम संस्कार, उमड़े समर्थक

BHARAT NEWS LIVE24 पूर्व मंत्री ने अपनी धर्मपत्नी का पैतृक आवास से संपन्न किया अंतिम संस्कार, उमड़े समर्थक           


                 अजय कुमार पाण्डेय।   औरंगाबाद: ( बिहार ) सच ही कहावत है की कोई भी व्यक्ति अपने जन्मभूमि को कदापि नहीं भूल सकता! जहां बचपन से खेला, कुदा, गांव - जवार में पढ़ -  लिख कर बचपन गुजारा! इसके बाद चाहे वह व्यक्ति कहीं भी क्यों न चला जाए? ऊंचे पदों पर भी क्यों न विराजमान हो जाए? लेकिन उस व्यक्ति का वास्तव में अपने पैतृक आवास की याद कभी न कभी अवश्य आ ही जाएगी? चाहे उसका जन्मभूमि जैसा भी क्षेत्र में क्यों न हो? यही हकीकत नजारा संवाददाता ने बुधवार दिनांक - 23 सितंबर 2020 को बिहार - सरकार के पूर्व मंत्री डॉ0 सुरेश पासवान के पैतृक आवास पर देखा! मौका था पूर्व मंत्री के धर्मपत्नी स्वर्गीय धनकली देवी के अंतिम संस्कार का! संवाददाता ने जब इस मौके पर पूर्व मंत्री के पैतृक आवास क्षेत्र का भ्रमण किया?  तो देखा कि आज भी पूर्व मंत्री के पैतृक आवास ( जन्मभूमि ) तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क तक नहीं है! चंद्रगढ़ गांव के बाद खरौंधा, मुनगा मोड, मुंगिया,  सरातू, कंचन के रास्ते से गुजरते हुए लोग जैसे - तैसे टंडवा थाना क्षेत्र अंतर्गत बुधन बिगहा, बेला गांव तक मंत्री जी के घर पहुंचते हैं! जो औरंगाबाद मुख्यालय से लगभग 46 किलोमीटर की दूरी एवं नवीनगर प्रखंड से लगभग 13 -  14 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़,  जंगल से घिरा दुर्लभ क्षेत्र में बुधन बिगहा, बेला गांव, गजना धाम मंदिर के समीप पड़ता है! जहां बिहार और झारखंड दोनों राज्यों की सीमा जुड़ती है! इसके बावजूद भी पूर्व मंत्री ने अपने धर्मपत्नी का अंतिम संस्कार अपने पैतृक घर से ही करने का निर्णय लिया! जबकि इनके धर्मपत्नी का निधन 31 अगस्त 2020 को पटना अस्पताल में हुआ था! उसी दिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का भी निधन हुआ था! लेकिन पूर्व मंत्री ने अपनी धर्मपत्नी का अग्नि संस्कार बांस घाट पटना में दूसरे दिन यानी 01 सितंबर 2020 को किया था! उस हिसाब से पूर्व मंत्री जी के धर्मपत्नी का हिंदू रीति - रिवाज के मुताबिक अंतिम संस्कार 13 सितंबर 2020 को ही संपन्न हो जाता! लेकिन मंत्री जी के धर्मपत्नी का निधन होने से पूर्व ही खुद, पुत्र एवं पुत्री भी कोरोना पॉजिटिव हो गए थे! इसलिए धर्मपत्नी के निधन से पूर्व ही सपरिवार स्वेच्छा से पटना स्थित अस्पताल में क्वॉरेंटाइन के नाम पर भर्ती हो गए थे! इसी वजह से पूर्व मंत्री ने अपनी धर्मपत्नी का अंतिम संस्कार 13 दिन के बजाय 23 दिनों पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से अपने पैतृक आवास से ही किया! जिसमें चाहने वाले समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी! उमड़े समर्थकों के भीड़ देखने के बाद पूर्व मंत्री डॉ0 सुरेश पासवान भाव - विभोर हो गए! इसके बाद बिहार - सरकार के पूर्व मंत्री सह राष्ट्रीय जनता दल प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर सुरेश पासवान ने समर्थकों की भरी सभा में कहां की आज - तक तो मैंने किसी को रुपए का बंडल तो नहीं दिया, लेकिन यही स्नेह - प्यार मुझे हमेशा विवश कर देता है!  भरी सभा में पूर्व मंत्री ने कहा की जब -  तक यह बंद रहेगा! तब - तक यह स्नेह - प्यार को कभी खत्म नहीं होने देगा! अब मुझे पूर्ण एहसास हो गया है कि यदि मैं पहाड़ पर भी रहूंगा?  तो मेरे चाहने वाले समर्थक पहाड़ पर भी मिलने के लिए अवश्य पहुंच ही जाएंगे! हालांकि जिस दिन पूर्व मंत्री के पैतृक आवास पर उनके धर्मपत्नी का अंतिम संस्कार कार्यक्रम था! उस दिन बारिश का भी मौसम हो चुका था! इसके बावजूद भी मंत्री जी के समर्थक पैतृक आवास पर दुर्लभ क्षेत्र में भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में पहुंच गए और लोगों ने पहुंचकर मंत्री जी के धर्मपत्नी को पुष्पांजलि अर्पित कर ही दिया! जो मंत्री जी को हमेशा के लिए यादगार पल अवश्य बना ही रहेगा! गौरतलब हो कि मंत्री जी के धर्मपत्नी के अंतिम संस्कार में लोक जनशक्ति पार्टी के 2005 में पूर्व नवीनगर विधायक रह चुके विजय कुमार सिंह उर्फ डब्ल्यू सिंह की पत्नी, औरंगाबाद नावाडीह निवासी मुमताज अहमद जुगनू,  झारखंड राज्य अंतर्गत पडने वाली हुसैनाबाद ( जपला ) के पूर्व विधायक संजय सिंह के अलावे बिहार - झारखंड दोनों राज्यों से अन्य नेता एवं समर्थक पहुंच कर शामिल हुए! पूर्व नबीनगर लोजपा विधायक रह चुके  विजय कुमार सिंह उर्फ डब्ल्यू सिंह के संबंध में विधायक की पत्नी ने जानकारी देते हुए बताया कि उनका तबीयत खराब हो गया था! इसी वजह से उन्होंने मुझे कहा की तुम मंत्री जी के घर पर अंतिम संस्कार में अवश्य चली जाओ! इसलिए मैं खुद अाई! ज्ञात हो कि पूर्व नबीनगर लोजपा विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह वर्तमान राष्ट्रीय जनता दल के आगामी बिहार -  विधानसभा चुनाव 2020 में नबीनगर विधानसभा क्षेत्र के संभावित प्रत्याशी माने जा रहे हैं! इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनता दल की वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री रह चुकी डॉ0 कांति सिंह भी आने वाली थी! लेकिन काफी विलंब होने के कारण मंत्री जी के पैतृक आवास पर नहीं पहुंच सकी थी! लेकिन ओबरा पहुंचने के बाद मंत्री जी को फोन की थी! मंत्री जी के घर पर आने के लिए भी व्याकुल थी! लेकिन मंत्री जी ने ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से मना कर दिया की काफी विलंब हो जाएगा! दुर्लभ एरिया के साथ-साथ मौसम भी ठीक नहीं है! इसलिए आप चिंता ना करें! मंत्री जी ने भरी सभा में कहा कि मैं जब पूरे परिवार के साथ पटना स्थित अस्पताल में क्वॉरेंटाइन हो गया था? तो उस वक्त भी प्रतिकूल माहौल में पहुंच कर हमको सभी लोगों ने बहुत हौसला दिया और उसी हौसला, हिम्मत को लेकर आज हम वही दुआ, प्रार्थना के बदौलत  उठ करके परिवार के साथ खड़ा है! इसलिए परिवार के साथ साथ समाज सेवा का जो मेरा दायित्व है! उसे बिल्कुल मैं जिस रूप में रहूंगा, हर हाल में जनता के बीच रहकर उनका जो दुख - दर्द होगा? उसमें शामिल होने के लिए कल जो अंतिम संस्कार में मुझे हौसला मिला? उसको हम कदापि भुला नहीं सकते! कष्ट के बावजूद भी लोग जो पहुंचे हैं!  उनके प्रति मेरा अगाध प्यार है! जो आए सो भी, बारिश के मौसम में रास्ते में भीग गए सो भी, जो कारणवश नहीं पहुंच पाए? जो जहां थे?  वहीं से मेरी धर्मपत्नी की आत्मा शांति के लिए दुआ किया है, पुष्पांजलि किया है! जिस दिन हम लोग बीमार पड़े!  उस दिन से हजारों हजार लोगों ने जो दुआ किया है, प्रार्थना किया है? उसे मैं कदापि नहीं भूल सकता और हमेशा उनके बीच में खड़ा रहूंगा! जिले के गोह, हसपुरा, रफीगंज, दाउदनगर, ओबरा, मदनपुर, कुटुंबा, अंबा, नबीनगर विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन  काफी संख्या में लोग पहुंचकर मुझे हौसला देने का काम किया! मैं अपने पैतृक घर पर पटना से 10 सितंबर 2020 को सपरिवार आया था! ज्ञात हो कि बिहार - सरकार के पूर्व मंत्री डॉ0 सुरेश पासवान ने ही अपने पैतृक गांव बुधन बिगहा बेला में विद्यालय निर्माण के लिए निजी जमीन दिया था! जो शुरू से प्राथमिक विद्यालय था! इसके बाद प्राथमिक विद्यालय से मध्य विद्यालय हुआ और पूर्व मंत्री के मुताबिक बिहार -  सरकार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने इसे गंभीरता से लेते हुए औरंगाबाद जिला का एकलौता विद्यालय जून 2020 में ही 10+2 में अप ग्रेड कर इंटरमीडिएट तक बुद्धन बिगहा, बेला गांव में विद्यालय कर दिया है! पूर्व मंत्री ने अपनी धर्मपत्नी के शेष बचे अंतिम संस्कार समाप्त करने के बाद समाचार प्रेषण पूर्व शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि सन 1996 में मैं अपने पैतृक गांव में उच्च विद्यालय के लिए राष्ट्रीय जनता दल शासनकाल में ही नीव रखा था! इस विद्यालय के लिए मैं एक कमरा पूर्व नबीनगर राजद विधायक भीम यादव से, एक कमरा पूर्व नबीनगर विधायक वीरेंद्र सिंह से पूर्व राष्ट्रीय जनता दल राज्यसभा सांसद रह चुके प्रेमचंद गुप्ता से आग्रह कर 05लाख रुपए की राशि दिलवा कर कैसे कैसे विद्यालय कमरे का निर्माण कराया था! मेरे गांव में प्रतिवर्ष फुटबॉल मैच का आयोजन होता था! उसमें मैं विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों को भी अपने पैतृक गांव में आने के लिए आमंत्रित करता था?  तो लोगों ने अपने स्तर से विद्यालय बनाने के लिए योगदान भी किया है! अंततः 24 वर्षों के बाद मेरा काफी संघर्ष परिणाम स्वरूप अब यहां का विद्यालय अपने अस्तित्व में आया है! इसके अलावे पूर्व मंत्री ने वार्ता के दौरान कहा कि आज मेरे पैतृक घर के क्षेत्र में यदि सड़क की स्थिति दयनीय है? तो यहां के स्थानीय विधायक, सांसद, सरकार दोषी है? नीतीश कुमार की सरकार ने हर तरफ से क्षेत्र के लिए उपेक्षा किया है! राष्ट्रीय जनता दल के शासनकाल में ही इस क्षेत्र में सन 2004 - 2005 में सड़क बनवाने का काम किया था! जो वर्तमान टूटी - फूटी हालत में है! लेकिन बिहार में जब से नितीश कुमार की सरकार बनी?  तब से न इस क्षेत्र में सड़क बनी? न एक भी पुल - पुलिया? हमेशा इस क्षेत्र का उपेक्षा किया गया? लेकिन अब वह दिन दूर नहीं?  कि मेरे जन्मभूमि,  कर्मभूमि का सेवा करने का अवसर जिस रूप में भी मिलेगा? तो जो अभाव है? उसको हम स - समय लोगों के बीच समर्पित करने का भी काम अवश्य करेंगे!

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