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 ✍️✍️✍️✍️✍️जेपीएन के लेबर  रूम व ऑपरेशन थिएटर को मिला लक्ष्य सर्टिफिकेशन🔷🔷🔷🔷👇👇👇




जेपीएन के लेबर रूम व आँपरेशन थियेटर को मिला लक्ष्य सर्टिफिकेशन

शेरघाटी अनुमंडल अस्तपाल के लेबर रूम भी हुआ लक्ष्य सर्टिफाइड 

डीएम के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग को मिली है महत्वपूर्ण उपलब्धि 

गया, 04 सितंबर2020
रिपोर्टःडीके पंडित
बिहार के जिला गया में आमजन तक स्वास्थ्य सेवाओं की अधिकाधिक पहुंच और सेवाओं के सुचारू संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजगता से काम कर रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं में गर्भवती महिलाओं के प्रसव  व शल्य चिकित्सा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित जिला के सदर अस्पताल के आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत बनाया गया है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से दिया जाने वाला लक्ष्य सर्टिफिकेशन इस बात का प्रमाण है.​ जय प्रकाश नारायण अस्पताल तथा शेरघारी अनुमंडल अस्पताल ने लक्ष्य सर्टिफिकेशन प्राप्त कर एक नजीर पेश की है. 

जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया जय प्रकाश नारायण अस्पताल का मैटरनिटी आॅपरेशन थियेटर व लेबर रूम तथा शेरघाटी अनुमंडल अस्पताल के लेबर रूम को मंत्रालय के तरफ से लक्ष्य ​सर्टिफिकेशन दे दिया गया है.  यह जिला के स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण उप​लब्धि है. उन्होंने बताया जिलापदाधिकारी अभिषेक कुमार सिंह के नेतृत्व में जिला के विकास के लक्ष्यों में शामिल स्वास्थ्य सेवाओं को आमजनों तक और अधिक सुगम बनाने के प्रयास लगातार किये गये हैं. कोविड 19 के दौरान भी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य योजनाओं व सेवाओं का उनके द्वारा नियमित अनुश्रवण किया जाता रहा है. 

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस संक्रमण के बीच पूर्व में जेपीएन सदर अस्पताल  द्वारा सभी पांच योग्यताओं को पूरा किये जाने के बाद वहां के लेबर रूम को 97 प्रतिशत व मैटरनिटी आॅपरेशन थियेटर को 89 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे. वहीं शेरघाटी के अनुमंडल अस्तपताल को लेबर रूम के लिए लिए सभी पांच अर्हताओं के पूरा किये जाने पर 92 प्रतिशत अंक प्राप्त हुआ था. लक्ष्य सर्टिफिकेशन के बाद जेपीएन सदर अस्पताल केन्द्र सरकार की ओर से अस्पताल की मैटरनिटी सेवाओं का जायजा लिया जाता रहेगा. सर्टिफिकेशन के बाद केंद्र की टीम अस्पतालों के रखरखाव पर निरंतर नजर भी रखेगी.

लक्ष्य कार्यक्रम का उद्देश्य ​मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करना: 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-4) के अनुसार भारत में संस्थागत जन्मों का प्रतिशत वर्ष 2015-16 में बीते 10 सालों में 38.7% से बढ़कर 78.9% दर्ज किया गया. एक अनुमान के मुताबिक 46 फीसदी मातृ मृत्यु दर के साथ 40 प्रतिशत से अधिक जन्म के समय मौत व पांच से कम मौत का 25 प्रतिशत प्रसव के समय होता है. यदि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं तो प्रतिवर्ष मातृ मृत्यु दर को कम कर आधा किया जा सकता है. इस रोकी जा सकने वाली मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 11 दिसंबर 2017 को लक्ष्य कार्यक्रम की शुरूआत की. इस कार्यक्रम का उद्देश्य इंट्रापार्टम और तत्काल होने वाली माताओं व नवजात शिशुओं की देखभाल सेवाओं में गुणवत्तापूर्ण सुधार है. इसके साथ ही इसके तहत लेबर रूम और मातृत्व ओटी में गुणवत्ता में सुधार करना है.

लक्ष्य सर्टिफिकेशन अस्पताल कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम: 

लक्ष्य प्रमाणीकरण की उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रबंधक, फार्मासिस्ट, एकाउंटेंट, डेटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य प्रमुख प्रशासनिक कर्मचारियों ने भी कड़ी मेहनत की है. जेपीएन अस्पताल में वर्ष 2018 से शुरू होने वाले लक्ष्य सर्टिफिकेशन की यात्रा के दौरान, लेबर रूम स्टाफ के साथ-साथ प्रसूति ओटी कर्मचारी, प्रशासनिक कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, ग्रुप डी स्टाफ और प्रत्येक सदस्य ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है. नैदानिक चर्चा और मासिक गुणवत्ता सुधार बैठकों जैसी गतिविधियों को शुरू किया गया है और प्रक्रिया के पालन की घटनाओं को मजबूत किया गया है. ओएससीई (ऑब्जेक्टिव स्ट्रक्चर्ड क्लिनिकल एग्जामिनेशन) के माध्यम से एलआर एंड मैटरनिटी ओटी के सभी कर्मचारियों का कौशल मूल्यांकन डिलेवरी, जीरो-डिफेक्ट क्वालिटी प्रसूति एवं नवजात देखभाल के लिए काम शुरू किया गया है. यह गतिविधि चिकित्सा अधिकारियों और सीनॉक मेंटर्स द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है. नैदानिक दिशा-निर्देशों का कार्यान्वयन, लेबर रूम क्लिनिकल रास्ते, रेफरल प्रोटोकॉल, सुरक्षित जन्म सूची और सर्जिकल सुरक्षा जाँच सूची अभी चलन में है. लक्ष्य प्रमाणीकरण की उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रबंधक, फार्मासिस्ट, एकाउंटेंट, डेटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य प्रमुख प्रशासनिक कर्मचारियों ने भी कड़ी मेहनत की है.

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