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✍️✍️✍️समस्याओं के मकड़जाल के बीच सत्ता बदलने की कवायद
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समस्याओं के मकड़जाल के बीच सत्ता बदलने की कवायद 

विनोद विरोधी 

बाराचट्टी (गया)। सूबे में विधानसभा चुनाव का तो अभी शंखनाद नहीं हुआ है ,लेकिन चुनाव की तारीख जैसे-जैसे निकट आ रही है, वैसे-वैसे  राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है ।सत्ता व विपक्ष समेत विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने लगी है और अपने-अपने दावे भी शुरू कर दिए हैं ।नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में विख्यात रहा बाराचट्टी (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र रहा है ,जहां वर्तमान में जाने-माने समाजवादी नेत्री दिवंगत भागवती देवी की बेटी व राजद विधायक समता देवी इस सीट पर काबिज है ।गत 2015 के बिहार विधानसभा के चुनाव में राजद -जदयू गठबंधन ने लोजपा प्रत्याशी सुधा देवी को शिकस्त देकर अपनी जीत दर्ज की थी ।लेकिन इस बार समीकरण बदला हुआ है ।राजद- जदयू का गठबंधन अलग अलग है ।वहीं जदयू का गठबंधन भाजपा से है ।राज्य में जदयू से गठबंधन टूटने के बाद राजद विधायिका समता देवी जहां क्षेत्र में विकास कार्यों को अंजाम देने में पीछे पड़ गई ,जिसका खामियाजा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ सकता है ।क्योंकि विकास की अनदेखी को लेकर अनेक चर्चा है ।आज भी कई महत्वपूर्ण सड़कें बदहाल है ।शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई के क्षेत्र में महज दिखावा बनकर रह गया है ।ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि वर्तमान विधायिका का क्षेत्र स्थानांतरण कर किसी अन्य का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। वहीं सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेता भी अपनी-अपनी सीट के लिए नजर गड़ाए हैं ।बाराचट्टी में सत्ता से वंचित रही भाजपा भी इस बार अपना दावा जता रही है । गत लोकसभा चुनाव में अपना सीट बलिदान दे चुकी है। गया लोकसभा सीट भाजपा के कब्जे में रहा है ,लेकिन वह जदयू के लिए छोड़ चुकी थी। जहां से दिवंगत भागवती देवी के बेटे विजय कुमार ने ही अपनी जीत दर्ज की है ।हालांकि भाजपा अपने उम्मीदवार के नामों की पता नहीं खोल रही है ।वहीं एनडीए गठबंधन में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी भी बाराचट्टी सीट पर अपना दावा जता रही है ।पार्टी का मानना है कि गत चुनाव में हमारे उम्मीदवार के आने से गठबंधन के मतों में भारी इजाफा हुआ था और जीत के करीब रहे हैं। वैसे लोजपा में कई दावेदार हैं, लेकिन दो तीन उम्मीदवारों की चर्चा काफी चल रही है। इनमें बिहार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे सुधा देवी, बाराचट्टी के एक पूर्व जिला परिषद रही रेणुका देवी एवं पार्टी में तेज तर्रार नेता के रूप में उभरे रीता गहलोत का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है ।इसके अलावा राज्य में सत्तारूढ़ जदयू से भी कई प्रत्याशी अपना-अपना ताल ठोक रहे हैं ।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों को भुनाने में जुटे हैं ।वैसे यह बात सामने भी उभरकर आ रही है कि यदि एनडीए में पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा का विलय अथवा शामिल होती है तो वे स्वयं अथवा अपने करीबी रिश्तेदारों को भी यहां से चुनाव लड़ा सकते हैं ।इनमें यहां से पूर्व में जदयू के प्रतिनिधित्व कर चुकी व जीतन मांझी की समधीन ज्योति मांझी का नाम शुमार है ।अवसर को भापकर पाला बदलने में माहिर जीतनराम मांझी यदि यहां से चुनाव लड़ते हैं तो एक बार फिर यह सीट हॉट सीट हो जाएगी ।1997 में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके मांझी को गत लोकसभा के चुनाव में इस क्षेत्र से पिछड़ना पड़ा था। लोकसभा चुनाव में राजद महागठबंधन के उम्मीदवार थे। हालांकि राजद महागठबंधन से मोहभंग होने के बाद अभी तक तय नहीं हो पाया है कि वे एनडीए गठबंधन में शामिल होंगे अथवा नहीं ।सीटों का बंटवारा को लेकर इन दोनों के बीच काफी नूरा कुश्ती चल रही है ।इसके अलावा बसपा तथा शोषित समाज दल सरीखे कई राजनीतिक पार्टियां क्षेत्र का नक्शा बदलने को आतुर है और इसके लिए एड़ी चोटी एक कर सकते हैं ।गत विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी प्रत्याशी रहे हरेंद्र सिंह भोक्ता ने अपनी ताक़त के बदौलत तीसरे पायदान पर कामयाबी पाकर अपनी पहचान बनाई थी। इधर एनडीए गठबंधन के मुखिया रहे नीतीश कुमार द्वारा सूबे में कथित विकास का ढिंढोरा पीट जाने का पोल खोलने एवं बिहार लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद के नीतियों व सिद्धांतों को लेकर शोषित समाज दल भी राजनीतिक अखाड़े में कूदने का दम बना रखी है ।इसके अलावा भी कई उम्मीदवार चुनाव मैदान आने को व्याकुल हैं ,जो सत्ता के समीकरण का खेल बिगाड़ सकते हैं ।इन उम्मीदवारों में के बारे में फिलहाल अंदाजा ही लगाया जा रहा है ।लेकिन बाराचट्टी के 13, मोहनपुर के 17 एवं बोधगया के प्रखंड के 8 पंचायतों को मिलाकर बने क्षेत्र में शिक्षा ,स्वास्थ्य ,सड़क, सिंचाई समेत अन्य पिछड़ेपन की समस्या आज ही खड़ी है। वही जातिवाद, संप्रदायवाद का बोलबाला चरम पर है ।जिसे आज तक राजनीतिक दलों के राजनेता भुनाकर सत्तासीन हुए हैं। एक बार फिर सत्ता बदलने की कवायद शुरू हो गई है। इसमें कौन बाजी मारेगा आने वाला समय बताएगा?

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