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✍️होमोग्लोबिन स्तर कम न होने दें 
थैलीसिमरिया बच्चों में बमेंद्र  विश्वनाथ आनंद👇


होमोग्लोबिन स्तर कम न होने दें थैलीसीमिया बच्चों में : बमेन्द्र
 विश्वनाथ आनंद
औरंगाबाद - जन्म तो ईश्वर देते हैं पर समय पड़ने पर उनकी प्राण रक्षा आप और हम कर सकते हैं, रक्तदान करके।मैं बात कर रहा हूँ थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों का जो हमारे और आपके रक्त के सहारे जिन्दा हैं।जन्म के तीन माह बाद से ही बच्चों में थैलीसीमिया का लक्षण दिखने लगता है lऔर उनके शरीर में लाल रक्त कण बनना बन्द हो जाता है।ऐसे बच्चों को माह में एक से दो यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जिससे वो जीवित रहते हैं।उक्त बातों की जानकारी औरंगाबाद के समाजसेवी एवं पथ प्रदर्शक संस्था के सचिव बमेन्द्र कुमार सिंह ने सदर अस्पताल के शिशु वार्ड में कहीं।शिशु वार्ड में थैलीसीमिया पीड़ित पाँच वर्षीय शिवम कुमार को रक्त चढ़ाया जा रहा था,जिसका होमोग्लोबिन का स्तर 5 ग्राम पर आ गया था।
             बमेन्द्र ने भेंट वार्ता के दौरान संवाददाता को पथ प्रदर्शक द्वारा इन दिनों थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों को जागरूक करते हुए सख्त हिदायत दिया जा रहा है कि बच्चोँ में होमोग्लोबिन का लेबल आठ ग्राम से कम न होने दें।थैलीसीमिया से ग्रसित होते हुए भी बच्चों को यदि स्वस्थ रखना है तो नौ से दस ग्राम होमोग्लोबिन का स्तर रहने पर ही खून चढ़वा दें अन्यथा बच्चों का लीवर कमजोर हो सकता है, स्प्लीन और ग्लैण्ड बढ़ जाने से स्थिति खराब हो सकती है।बमेन्द्र ने बताया कि थैलीसीमिया बच्चों में  सीबीसी, एचबीसी एवं सिरम सैराटिन की जांच हर तीन महीने पर कराना आवश्यक है ताकि बच्चों को स्वस्थ रखा जा सके।बमेन्द्र थैलीसीमिया
 पीड़ित बच्चों के अभिभावकों से भी आग्रह कर रहे है कि इस महामारी मे रक्त संकट को देखते हुए आपलोग भी रक्तदान के लिए आगे आएं और अपने परिवार, मित्र और रिश्तेदारों से रक्तदान कराएं ताकि समय पर सभी थैलीसीमिया बच्चों को रक्त उपलब्ध हो सके।

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