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कर्मचारियों की मनमानी से बैंक उपभोक्ता हो रहे परेशान

*पिछोर में स्टेट बैंक की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त*

*कर्मचारियों की मनमानी से बैंक उपभोक्ता हो रहे परेशान
*

शिवपुरी ब्रेकिंग न्यूज



 *घण्टो इंतजार के बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिलता पैसा*

*आज सुबह से देर शाम तक भिखारियों की तरह खड़े रहते हैं बैंक ग्राहक*

शिवपुरी जिले के पिछोर में भारतीय स्टेट बैंक की व्यवस्था इस समय पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है जहां एक और नगर के लोगों का काम कभी भी समय पर पूरा नहीं हो पाता छोटे-छोटे काम को लोगो को महीनों चक्कर लगाना पड़ता है और उसमें भी बाहर कई कई घंटों तक ग्राहकों को लाइन में खड़ा रहना पड़ता है बमुश्किल जैसे तैसे बैंक के अंदर गार्डों की दो चार बातें सुनने के बाद जब प्रवेश मिलता है तो अंदर कर्मचारियों का रौद्र रूप देखकर ग्राहक सहम जाते हैं ग्राहकों के  सामने सबसे बड़ी जटिल समस्या यह है कि इस समय पिछोर में एकमात्र राष्ट्रीयकृत बैंक भारतीय स्टेट बैंक है जिसमें मजबूरी से उन्हें अपना खाता चलाना पड़ रहा है विकल्प न मिलने का फायदा बैंक के कर्मचारी पूरी तरह से उठा रहे हैं और अंदर स्वंय तो आपस में बातों में मशगूल रहते हैं और जैसे ही कोई ग्राहक अपने काम की कहता है तो उसको  बुरी तरह से फटकार लगाकर बाहर निकालने का रास्ता दिखाते है ज्यादा बात करो तो प्रकरण दर्ज कराने की धमकी दी जाती है । इससे पिछोर स्टेट बैंक के ग्राहक अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं पिछोर का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि पिछोर की पक्ष विपक्ष की राजनीति इस मामले में पूरी तरह शून्य है आज तक किसी भी राजनेता जनप्रतिनिधि ने इस व्यवस्था को ठीक करने की जहमत नहीं उठाई स्वयं लल्लो चप्पो करके अपना काम निकालने वाले पिछोर के नेता इस बाबत पिछोर के लोगों को परेशानी में डले रहने को मजबूर किए हुए हैं अतः यदि
पिछोर नगर में आपका खाता  स्टेट बैंक में है तो आप यह मत समझिये कि आप स्टेट बैंक के ग्राहक हैं । ग्राहकों को भी अपने अधिकार होते हैं लेकिन स्टेट बैंक पिछोर में सारे अधिकार सिर्फ कर्मचारियों के लिए सुरक्षित हैं। बैंक कर्मचारी बड़े उपभोक्ताओं को छोड़कर बाकी उपभोक्ताओं को किसी कर्जदार से कम नहीं समझते, यह कर्मचारी यह भूल जाते हैं कि उनकी तनख्वाह इन्हीं उपभोक्ताओं के लेनदेन से निकलती है।

पिछोर में बैंक के कर्मचारियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। काम ना करने या स्टाफ  की कमी होने पर सर्वर नहीं होने का बहाना बना लिया जाता है। 
 तह. पिछोर में संचालित एसबीआई बैंक, जहां आए दिन बैंक कर्मियों द्वारा मनमानी के चलते ग्राहकों को परेशान होते हुए देखा जा रहा है। गुरुवार को बैंक पहुंचे उपभोक्ताओं को नए कर्मचारियों के आजाने से घंटो परेशान होना पड़ रहा है उपभोक्ताओं को केवल kyc जैसे कामों के लिए 5-5 दिन आना पड़ रहा है और फिर स्टाफ अपने मनमर्जी काम किया जाता है
 लोगों ने बताया कि सुबह से बैंक कर्मियों द्वारा कंप्यूटर खराब होने का बहाना बनाया जाता है और दर्जनों महिला पुरुष उपभोक्ता यहां अपने काम के लिए इंतजार में बैठे रहते है
 बैंक में तैनात कर्मचारियों द्वारा यहां आए दिन कामकाज के लिए आने वाले उपभोक्ताओं को कभी लिंक नहीं आने का बहाना तो कभी कंप्यूटर खराब होने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। इसके चलते बैंक से जुड़े ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 
तथा नए कर्मचारियों द्वारा बैंक ग्राहकों से गलत भाषा का प्रयोग कर मना कर दिया जाता है
 
*अकाउंटेंट करता है अपनी मनमानी*
 सूत्रों के अनुसार बैंक अकाउंटेंट हरीश भागवानी पिछोर शाखा मैं कार्यरत हैं। जिनकी मनमानी सिर चढ़ कर बोलती है और उपभोक्ता बहुत परेशान रहते हैं। बैंक खाता तक खोलने के लिए वह यह बोलते मना कर देते है कि छोटा खाता ही ठीक है। ग्राहक देव गुप्ता ने बताया कि मेरा छोटा खाता था तो हरीश जी ने मना कर दिया कि मै तुम्हारा बड़ा खाता नहीं खोलूंगा यही सही है। और धमकी देती हुए कहा कि ऐसा कर दूंगा कि कभी एसबीआई में अकाउंट नहीं खुलेगा और धक्के देते हुए बाहर कर दिया इस संबंध में बैंक मैनेजर से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। परंतु संपर्क नहीं हो पाया। वहीं इन्हीं की तरह कर्मचारी मृत्युंजय सिख ने भी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए एक ग्राहक का फॉर्म फेक दिया और जहां जाना है जाओ हाथ माथ जोड़ने से कुछ नहीं होगा।

अतः बड़ी तादाद में ग्राहक बैंक के बाहर भीड़ लगाए खड़े रहे, जो ग्राहक अंदर जाने की कोशिश करता उसको गेट पर खड़ा पुलिसकर्मी रोक देता और कहता कि 1 या 2 घंटे बाद काम शुरू होगा और अगर कोई बड़ा उपभोक्ता या प्रभावशाली व्यक्ति बैंक के अंदर जाता तो पुलिसकर्मी कुछ नहीं बोलता

यही नहीं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बैंक के कुछ कर्मचारी तो शराब पीकर कार्य करते है और ग्रामीण लोग सुबह 9 बजे से लाइन में लगे शाम को 4 बजे तक काम नहीं कर पाते और वहां कुछ लोगो गार्ड बैंक मैनेजर के फोन पर अंदर कर देते है

लेकिन थोड़ी कोशिश करके बैंक के बाहर खड़ी भीड़ को तो देख लीजिए इनके भी परिवार हैं इनको भी कोरोना संक्रमण हो सकता है। आपको सिर्फ बैंक कर्मचारियों को ही नहीं बचाना है हमारे ऐसे सामान्य लोगों के लिये भी कोरोना संक्रमण से बचने ने के रास्ते बनाते रहिए।

एक तरफ प्रशासन और सरकार 2 गज की दूरी बनाने पर जोर दे रहे हैं  दूसरी तरफ जब बैंक की लापरवाही और मनमाने आचरण की वजह से बैंक के बाहर भारी भीड़ जमा होती है तो बैंक के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय ग्राहक से संयम बरतने की उम्मीद जताई जाती है आखिर यह दोहरा आचरण क्यों? जिस तरह से भीड़ बैंक के बाहर लगी थी उसमें अगर एक व्यक्ति भी कोरोना संक्रमित हो तो कितने लोग संक्रमित हो सकते हैं क्या इस पर भी प्रशासन गौर करेगा?
यह तो कोरोना काल का मामला है सामान्य दिनों में भी इस बैंक का रवैया सामान्य ग्राहकों के लिए निहायत मनमाना रहता है

इनका कहना है 
मैं दिनांक 25 तारीक से आज दिनांक 28 तक सुबह 8 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बैंक में खड़ा रहा लेकिन मेरा काम नहीं हुआ जिसमे बैंक कर्मचारी मृत्युजंय सर से लगातार हाथ जोड़कर निवेदन किया परन्तु उन्होंने मेरी एक ना सुनी और अभद्रता से मुझसे कहा हाथ जोड़ने से कुछ नहीं होगा हटो यहां से
सहदेव भार्गव (उपभोक्ता)

मेरे खाते में से रुपए नहीं निकले जा रहे है 3 दिन से मै बैंक के चक्कर काट रहा हूं मुझे हर बार बोल दिया जाता है कि आपका बैंक खाता बंद नहीं करेंगे चाहे आप कुछ करिए
देव गुप्ता ( बैंक खाता धारक)

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