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विकास कार्यो के पैसे का बन्दर बांट, विकास से कोसो दूर गांव

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*👉🏻विकास कार्यो के पैसे का बन्दर बांट, विकास से कोसो दूर गांव
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*लालापुर प्रयागराज*

*💫सरकार ने स्वक्ष भारत मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च किया। वही सांसद से लेकर बिधायक तक गांव की गलियों में सफाई अभियान चलाकर जनता को स्वक्ष भारत मिशन का संदेश दिया। लेकिन जब इस गांव की गंदगी व रास्ता,गलियों का जल भराव देखकर ऐसा लगता है कि सायद गांव में विकास कार्यो को सिर्फ कागजों पर ही कराया गया।इस गांव की जनता नही पूरे गांव की गली व रास्ते अपने आप बया कर रही है।ग्रामीणों ने लिखत कई बार शिकायत भी किया लेकिन निस्तारण नही हुआ। ग्राम अमिलिया तरहार के ग्रामीणों ने बताया कि एक रास्ता बनाया गया जो विधायक निधि से बनया गया,वही जो भी कुछ कार्य हुआ था ओ भी पांच साल पहले पूर्व प्रधान स्यामू निषाद के द्वारा किया गया था,वही गांव में जल भराव से लेकर कीचड़ रहित 6 रास्ता आज भी है जिस पर महिलाओं से लेकर बच्चे व शव दाह करने वाले लोग क्षेत्र के इसी कीचड़ में चलकर जाते है।1-राजेश कुमार के घर से अजय कुमार के घर तक,2-विजय त्रिपाठी के घर से फूल चन्द निषाद के घर तक 3-राजा तिवारी के घर से मोती त्रिपाठी के घर तक कीचड़ समसान घाट जाने वाला रास्ता 4-गोकुल त्रिपाठी के घर से मुन्नू के दुकान तक कीचड़ 5-श्री नाथ के घर अधुम के घर तक कीचड़6-अम्बिका आदिवासी के घर से काली सड़क के बीच कीचड़ जिस पर गांव के लोग आज भी इन गलियों पर चलने पर मजबूर है।गांव के जय प्रकाश त्रिपाठी, व अखिलेश त्रिपाठी,रामानन्द द्विवेदी, जय प्रकाश त्रिपाठी, राजा तिवारी, अखिलेश त्रिपाठी, शन्तोष द्विवेदी, ज्ञान आदिवासी, मन्नू आदिवासी, शिवमूरत आदिवासी, दिनेश आदिवासी, आदि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ब्लाक के अधिकारी की मिली भगत से पूरे गांव में विकास नही हुआ है आखिर विकास का आया हुआ पैसा इन रास्तों में क्यो नही लगाया गया,।वही सायद न नाली बनी न ही रास्ता,सिर्फ कागज में ही बनाकर पैसे का बन्दर बाट हो गया।वही शिकायत कर्ता जय प्रकाश ने बताया कि हमने कई बार लिखित शिकायत माननीय मुख्यमंत्री,जिलाधिकारी प्रयागराज, परगनाधिकारी बारा, खण्ड विकाश अधिकारी शंकरगढ़ से की। लेकिन आज तक जांच अधिकारी ने इन रास्ते को देखना वाजिब नही समझा न ही शिकायत कर्ता को बुलाया। वही गांव की विमला देवी पत्नी बिजय त्रिपाठी, इन्द्रकली पत्नी मनसुख ने बताया कि हम गरीब महिला के पास दो जून की रोटी के लिए मुस्तैद है वही चार साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कालोनी आयी थी जिस पर एक किस्त प्राप्त हुयी उसी पैसे से दीवाल खड़ी हो गयी है छत के लिए चार साल से इन्तिजार कर रहे है दूसरी किस्त आज तक न मिल पाने से आवास अधूरा पड़ा हुआ है।इन सब को देखकर ऐसे लगता है कि आज तक किसी अधिकारी ने न इस गांव के विकास को देखा न ही इस गरीब महिला के सिर के ऊपर छत के बारे में सोचा।उक्त बावत प्रधान विमला देवी का कहना है कि अभी तक जो विकास कार्य हुये है उनका भुगतान न होने की वजह से विकास नही हो पाया। वही इस बाबत खण्ड विकास अधिकारी जसरा देवेन्द्र ओझा से पूछा गया तो उनका साफ कहना था कि अभी ए प्रकरण मेरे पास तक नही आया है अगर शिकायती पत्र मेरे पास आएगा तो जाँच करते हुए कार्यवाही निश्चित होगी।*

*✍️पी सी पाण्डेय*

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