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✍️करमा पूजा एवं एकादशी का पर्व बिहार में धूम धाम से मनाया जाता है





करमा पूजा  एवं एकादशी का पर्व बिहार  धूम में से मनाया जाता है
रिपोर्ट
दिनेश कुमार पंडित
बिहार में करमा पर्व  एवं एकादशी पर्व के धुम से मनाया जाता है. त्यौहारों में  से एक है और काफी  लोकप्रिय है. यह पर्व भादो महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह पर्व सिर्फ झारखंड में ही नहीं मनाया जाता बल्कि बिहार, बंगाल, असम, ओड़िशा, तथा छत्तीसगढ़ में भी पूरे हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जाता है. इस पर्व को मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य है बहनों द्वारा भाईयों के सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की जाती है. लोगों की परंपरा रही है कि धान की रोपाई हो जाने के बाद यह पर्व मनाया जाता रहा है.

इस मौके पर नवागढी देवी स्थान की रहने वाली नेहा ने बताया कि पेड़-पौधे की पूजा का प्रथा सदियों चली आ रही है प्रकृति के प्रति मानव समाज की यह परम्परा बहुत पुरानी है आदिमानवों ने जब प्रकृति के उपकार को समझा तब वह इसके प्रति श्रद्धावन हो उठा. यह आज भी इसकी प्रासंगिकता है. इसमें प्रकृति का संदेश निहित है. जैसे करम में करम डाली, सरहुल में सखुआ फूल, जितिया में कतारी आदि का पूजा करते आ रहे हैं. पौराणिक ग्रंथों में भी यह कहा गया है - वनस्पत्यै नम: वनस्पतियों को नमन करते हैं।

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