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जीबीएम में महिला दिवस पर विधिक शिविर का आयोजन

जीबीएम में महिला दिवस पर विधिक शिविर का आयोजन 

गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय, गया एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के गया के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर महाविद्यालय परिसर में 'लाॅ ऐंड प्रसिजर आॅफ अडॉप्शन' विषय पर विधिक जागरण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अडवोकेट श्रीमती इंदु सहाय उपस्थित थीं। उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता भी की।  प्रधानाचार्य प्रो० जावेद अशरफ ने नारी-शक्ति के सम्मान में दर्शक-दीर्घा में बैठने का निर्णय लेते हुए मौके पर उपस्थित मुख्य अतिथि श्रीमती सहाय, राजनीति विज्ञान की प्राध्यापिका डाॅ० शगुफ्ता अंसारी, अंग्रेजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉo कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी, दर्शन शास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉo श्वेता सिंह, श्रीमती ईमा हुसैन तथा शिक्षकेत्तर कर्मी श्रीमती रीता देवी से मंच का गौरव बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने उपस्थित सभी महिलाओं और छात्राओं का अभिनंदन करते हुए अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मंच का संचालन करते हुए डाॅ० प्रियदर्शनी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उन्हें कानूनी रूप से भी जागरुक होने की जरूरत है, ताकि उन्हें अपने कर्तव्यों के साथ-साथ अपने अधिकारों और आगे बढ़ने हेतु संविधान द्वारा प्रदत्त अवसरों का भी ज्ञान हो। उन्होंने अपनी स्वरचित कविता 'मैं आधुनिक युग की सीता' के माध्यम से समस्त नारी-शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा - 'जो लोग हितैषी होंगे मेरे, उन पर स्नेह लुटाऊंगी, अन्यथा रावणों के समक्ष मैं कालरात्रि बन जाऊंगी!' डॉ० शगुफ्ता अंसारी ने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के पीछे निहित उद्देश्यों तथा इस आयोजन के इतिहास पर प्रकाश डाला। डॉo श्वेता सिंह ने एक सफल महिला बनने के पीछे संघर्ष को सबसे जरूरी बतलाया। श्रीमती ईमा ने कहा कि आज नारियों को अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचानने की जरूरत है। मुख्य अतिथि अडवोकेट इंदु सहाय ने स्वयं को गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय की ही पूर्ववर्ती छात्रा होने पर खुशी जतायी। उन्होंने विषय पर प्रकाश डालते हुए पति-पत्नी में  तलाक हो जाने के बाद बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेवारी के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने 'अडाॅप्शन' से संबंधित गंभीर नियम-कानूनों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समानता के अधिकार के तहत शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने और न्यायालय की शरण लेने में तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिए। प्रधानाचार्य प्रो० अशरफ ने उपस्थित सभी लोगों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कार्यक्रम के आयोजन में डीएलएसए (डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी) के सदस्य श्री विकास कुमार को भी उनकी सक्रिय भूमिका के लिए धन्यवाद दिया ।

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