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अनुमंडल लोक शिकायत न्यायालय से लेकर फैमिली कोर्ट के चक्कर लगाने के बावजूद भी नहीं मिल रहा है न्याय :- सफी खातून l

अनुमंडल लोक शिकायत न्यायालय से लेकर फैमिली कोर्ट के चक्कर लगाने के बावजूद भी नहीं मिल रहा है न्याय :- सफी खातून l 

टेकारी गया बिहार से  शिकायत न्यायालय से लेकर फैमिली कोर्ट के चक्कर लगाते लगाते थक चुकी हूं l परंतु गरीबों का फरियाद सुनने वाला कोई नहीं l यह उक्ति सूफी खातून मोहम्मद इकबाल हुसैन  उर्फ राशिद हुसैन ग्राम पड़रिया, थाना पंचानपुर ओपी जिला गया बिहार का कहना है l बताते चलें कि सूफी खातून मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार शादी किया था l शादी होने के 1 वर्ष के बाद ससुराल पक्ष वाले लड़की के साथ मारपीट गाली-गलौज से लेकर दहेज मे रूपए पैसे के अलावे गाड़ी टीवी की मांग करते हुए प्रताड़ित किया, नहीं देने  पर सूफी खातून को छोड़कर एक अन्य  महिला के साथ शादी करने का मामला प्रकाश में आया है l सूफी खातून की बात सच मानी जाए तो कहना है कि अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण न्यायालय टिकारी से लेकर फैमिली कोर्ट न्यायालय के चक्कर लगाते लगाते थक चुकी हूं परंतु गरीब को न्याय नहीं मिल पा रहा है l आज स्थिति यह है कि मैं दाने दाने के लिए मजबूर हूं लेकिन मेरी विनती कोई सुनने वाला नहीं l सूफी खातून अपनी पीड़ा को जाहिर करते हुए कहती हैं कि फैमिली न्यायालय कोर्ट से आदेश पारित किया गया कि जीवन चलाने के लिए मेरे पति को प्रतिमाह निर्धारित  रुपए देनी है l परंतु कई माह बीत जाने के बावजूद भी मेरे पति द्वारा जीवन भत्ता नहीं दिया गया है l न्यायालय ने मेरे पति को  गिरफ्तार करने हेतु वारंट भी जारी किया l परंतु थाना अध्यक्ष चंदौती  मनमानी रवैया के कारण मेरे पति की गिरफ्तारी कोर्ट के वारंट आदेश के बावजूद भी नहीं किया गया है l  मैं दुखी हूं l सूफी खातून ने आगे  बताया कि जब मैं थाने पर गया तो मुझे न्याय की जगह और मेरे ऊपर ही मुकदमा कर देने की बात कहीं जाती है l आखिर महिलाओं का न्याय कब मिलेगी l बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसी आवाज बुलंद करने वाले भारत के प्रधानमंत्री का सपना को साकार कौन करेगा l  ऐसे कई सवाल है जो महिलाओं सोचने को मजबूर करती है l सफी  खातून ने  वरीय पुलिस अधीक्षक गया एवं फैमिली न्यायालय कोर्ट गया से अविलंब पति की गिरफ्तार करने की मांग करते हुए  बकाए जीवन भत्ता राशि उपलब्ध कराने की मांग किया है l अब देखना होगा कि सूफी खातून की फरियाद पर प्रशासन और न्यायालय पति की गिरफ्तारी के बाद बकाया जीवन भत्ता दिला पाती है या फिर दर-दर की ठोकरें खाने की मजबूर ही रह पाती है l लेकिन जिस प्रकार से महिलाओं के साथ दहेज उत्पीड़न एवं मारपीट की घटना करते हुए महिला को छोड़ने की बात घट रही है जिसे जितनी भी निंदा की जाए कम है l इस तरह की घटनाओं एवं समस्याओं से निदान करने के लिए सामाजिक बुद्धिजीवी एवं राजनीतिज्ञों जनों को आगे आने की आवश्यकता है l तभी समाज में फैल रही कुरीतियों को दूर किया जा सके l

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