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अनुसूचितजनजाति में सम्मलित करने महरा संगठन डाँ,हीरालाल अलावा को सौंपे ज्ञापन आदिवासीयों ने दी समर्थन

अनुसूचितजनजाति में सम्मलित करने महरा संगठन डाँ,हीरालाल अलावा को सौंपे ज्ञापन आदिवासीयों ने दी समर्थन

 आदिवासी की जाति प्रशासनिक त्रुटि से बदल गई 
 
  अनूपपुर- जयस,जय आदिवासी युवा संगठन व महरा समाज संगठन मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में 28/2/2020 दिन शुक्रवार को जयस महापंचायत आमसभा का आयोजन किया गया था  उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय डाँ,हीरालाल अलावा विधान सभा क्षेत्र मनावर विधायक जी से महरा समाज के बारे में डी ए प्रकाश खाण्डे विशेष रूप से विस्तृत से चर्चा कर महरा समाज के बारे में अवगत कराया कि आदिवासियों की जन संख्या कम करने के लिए महरा जाति को अलग कर दिया गया था जबकि बस्तर एवं संपूर्ण छ,ग,का हवाला देकर अवगत कराई
गई जिसे देखते हुए अलावा जी मध्यप्रदेश के आदिवासी सलाहकार समिति के सदस्य है जो अपने संज्ञान में लेते हुए महरा समाज को आदिवासी में सम्मलित कराने की अश्वासन दिया है।उक्त ज्ञापन में पूरन चन्देल महरा संगठन प्रदेश अध्यक्ष बब्बू चन्द्रवंशी,डी ए प्रकाश खाण्डे,प्रवीण चन्द्रवंशी,रमाकांत चन्द्रवंशी,सीताराम,अशोक महरा सहित सैकडो़ महरा समाज के लोगों ने ज्ञापन सौंपे वहीं महरा जाति के लोग मध्यप्रदेश में आदिकाल से निवास कर रहे महरा जाति के लोगों ने मानवीय  भूल की वजह से आदिवासी होने का राष्ट्रीय अधिकार खो दिया है ।स्वतंत्रता पूर्व महरा जाति को आदिवासी  की श्रेणी मे माना गया है.मध्य प्रांत एवं बरार राज्य के अधिसूचना दिनांक 31 मार्च 1949 मे महरा को क्रमांक -69 मे दर्शाया गया है .मध्यप्रदेश गजट 8 दिसंबर 1950 मे भी एब्रोहीजनल ट्राइबल की सूची मे महरा जाति को कृ .-69 मे परिभाषित किया गया है । राजस्व अभिलेखों मे महरा ही लिखा एवं बोला जाता है .शब्दो के मामूली चूक के कारण तात्कालीन लीपकीय त्रुटि को संज्ञान मे नही लिया गया  और आदिवासी महरा जाति को "महार " समझकर अनुसूचित जाति मे शामिल कर दिया गया । समाज के प्रबुद्धजनों और जागरूक लोगो ने समय -समय पर प्रशासन की इस लिपिकीय त्रुटि को लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियो एवं जनप्रतिनिधियों से अपनी जाति के अस्तित्व को बचाने की गुहार लगाई है । 1956 मे मध्यप्रदेश राज्य गठन होने के बाद महरा जाति का आदिवासी वर्ग से विलोपित होना आश्चर्यजनक है .आरक्षण का लाभ लेने हेतु कुछ लोग महार एवं मेहरा जाति बदलकर शासकीय सेवा मे आगये ।  भारतीय संविधान मे वैधानिक रूप से धर्म बदलने का अधिकार है परंतु जाति बदलने का कोई अधिकार  नही है .इस जाति का पारंपारिक व्यवसाय कृषि एवं मजदूरी करना है ;यह समुदाय चंद्रा ,चंद्रवंशी ,कौशल ,वस्त्रकार ,कौसारिया आदि वर्गो मे बंटा है । महरा जाति एक स्वतंत्र जाति है ;इसमे कोई मात्रात्मक एवं उच्चारणगत त्रुटि नही है .इस जाति के साथ कभी भी छूवाछूत नही किया जाता रहा है । महरा जाति का खान -पान ,रहन -सहन ,तीज -त्यौहार के साथ समस्त सामाजिक एवं धार्मिक क्रियाकलाप जनजातियों के समरूप है ।

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