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जल-जीवन-हरियाली को लेकर हुई बैठक

*जल-जीवन-हरियाली को लेकर हुई बैठक
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गया, 1 फरवरी 2020, आयुक्त महोदय के सभागार में आयुक्त मगध प्रमंडल, गया श्री असंगबा चुबा आओ की अध्यक्षता में जल-जीवन-हरियाली योजना की प्रगति की समीक्षा बैठक की गई। बैठक में अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग,अंचल गया द्वारा बताया गया कि जिले में कुओं के सर्वेक्षण की गति धीमी है। आयुक्त महोदय ने क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी मगध प्रमंडल को निर्देश दिया कि वे अपने पर्यवेक्षण में गया जिले के कुओं का पर्यवेक्षण कराने के साथ ही नल-जल योजना के क्रियान्वयन का भी पर्यवेक्षण कर कार्य में तेजी लाएं। 
बैठक में अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग, अंचल गया द्वारा बताया गया कि गंगा जल उदवह योजना के लिए 2836 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। गया, बोधगया एवं राजगीर शहरों के लिए पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए इस महत्वपूर्ण योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के कई जिलों में भू-जल स्तर काफी नीचे गिर गया है, ख़ासकर दक्षिण बिहार में वर्षापात की कमी एवं जल के अधिक दोहन से पानी की अत्यधिक कमी का संकट मंडरा रहा है। इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए यह तय किया गया है कि बाढ़ वाले चार महीने में गंगा का पानी, जो बर्बाद हो जाता है और बहकर बंगाल की खाड़ी में गिर जाता है, को एकत्रित कर राजगीर, गया और बोधगया में पानी के संकट को दूर किया जा सकता है। क्योंकि ये शहर धार्मिक एवं पर्यटक के दृष्टिकोण से अंतरराष्ट्रीय महत्व का है। इन शहरों में आने वाले वर्षों में पानी की किल्लत और बढ़ने वाली है। वर्ष 2020-21 में इस क्षेत्र में पानी की मांग 49 एम०सी०एम० हो जाने का अनुमान है। इसलिए जल-जीवन-हरियाली के अंतर्गत दूरगामी सोच के तहत गंगाजल को इन शहरों में जलापूर्ति करने की सुविधा है। बताया गया कि एक साल में इस योजना को पूर्ण करने के लिए चार एजेंसियों के बीच कार्य का वितरण किया गया है। कार्य पूर्ण हो जाने के उपरांत अगले एक वर्षों तक निर्धारित क्षेत्रों में जलापूर्ति करने का दायित्व इन्हीं चार एजेंसियों को दी गई है और उसके बाद जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। आयुक्त महोदय ने इस योजना के लिए गया जिले में किसी प्रकार की समस्या होने की जानकारी पूछने पर अधीक्षण अभियंता ने बताया कि 30 एकड़ जमीन रैयती 217.78 एकड़ वन विभाग,92 एकड़ बिहार सरकार एवं 4 एकड़ बंदोबस्ती,1.47 गैर-मजरूआ तथा अवगिला में वन विभाग के 22 एकड़ जमीन पड़ रही है। आयुक्त महोदय ने इसके निराकरण करने के लिए जिलाधिकारी एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक रखने का निर्देश दिया।समीक्षा के क्रम में आयुक्त महोदय ने अधिक्षण अभियंता लघु जल संसाधन, अंचल गया को निर्देश दिया कि अगले वित्तीय वर्ष में कार्य-योजना बनाकर पौधरोपण का कार्य व्यापक रूप से कराया जाए। उन्होंने कहा कि नहर और सड़क के बीच जितने भी जमीन है उनमें कम ऊंचाई वाले पौधे लगाए जाएंगे जिससे नहर क्षतिग्रस्त न हो।
समीक्षा के क्रम में आयुक्त महोदय ने औरंगाबाद के मदनपुर इलाके एवं गया औरंगाबाद सीमा के पास आमस के समीप जो 4-5 पहाड़ियां हैं वहाँ वर्षा के दिनों में पानी बर्बाद हो जाता है। इस क्षेत्र का सर्वे कराकर एक बड़ा चेक डैम का निर्माण करवाकर जल संकट को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्य लघु सिंचाई के बदले जल संसाधन को करना होगा। आयुक्त महोदय ने जल-जीवन-हरियाली के तहत अतिक्रमण के संबंध में जानकारी मांगी तो बैठक में संबंधित विभाग द्वारा बताया गया कि अतिक्रमण की समस्या नहीं है। 
पटना- गया पथ में सड़क निर्माण कार्य की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि जहानाबाद जिले में पड़ने वाली जमीनों में सरकारी जमीनों को भी स्थानीय लोगों द्वारा रैयती बताकर स्थानीय न्यायालय के माध्यम से कार्य स्थगित करा दिया जा रहा है। यह समस्या सर्वाधिक जहानाबाद जिले में ही है। आयुक्त महोदय ने निदेश दिया कि ऐसे मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अंचलाधिकारी और अमीन को लेकर जमीन के दावेदार के समक्ष जमीन की मापी करा कर समस्या का निराकरण कराया जाए। ऐसे मामले में विलंब करने से कार्य में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
बैठक में क्षेत्रीय उप निदेशक, योजना एवं विकास विभाग, मगध प्रमंडल, वन संरक्षक,मगध अंचल, गया, क्षेत्रीय उप निदेशक, कृषि,मगध प्रमंडल गया क्षेत्रीय उप निदेशक, पंचायती राज, मगध प्रमंडल,गया, अधीक्षण अभियंता,जल संसाधन विभाग, अंचल, गया,
अधीक्षण अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग,अंचल गया, अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई अंचल (औरंगाबाद प्रक्षेत्र) पटना उपस्थित थे।

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