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माँ नर्मदा के पवित्र उद्गम अमरकंटक आना मेरा सौभाग्य - कैलाश खेर

कैलाश के सुरों में झूमा अमरकंटक

बगड़ बम ने मचाई धूम

माँ नर्मदा के उद्गम में गूंजा शिवनाद

माँ नर्मदा के पवित्र उद्गम अमरकंटक आना मेरा सौभाग्य - कैलाश खेर

अनूपपुर 3 फ़रवरी 2020/

अमरकंटक नर्मदा महोत्सव का समापन विश्वप्रसिद्ध गायक पद्मश्री पुरुष्कृत कैलाश खेर की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ। यहाँ यह कहना उचित होगा मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा जिस ऊर्जा के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ था वह ऊर्जा कार्यक्रम के समापन तक बनी रही। स्थानीय निवासियों सहित पर्यटकों ने महोत्सव के हर क्षण का आनंद लिया।

कार्यक्रम की समापन संध्या में कैलाश खेर के सुरों ने अमरकंटक में उपस्थित हर एक व्यक्ति को अपने साथ झूमने के लिए मजबूर कर दिया। आमजनो की आनंददायक विवशता इस महोत्सव की सफलता का परिचायक बनी। तेरी दीवानी, तौबा-तौबा, अल्ला के बंदे जैसे प्रसिद्ध तरानो की धुनो ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया तो वहीं बगड़ बम के तांडव ने समूचे अमरकंटक को हिला दिया। हर एक प्राणी हर एक कण शिव भक्ति में डूब गया।

वहीं कार्यक्रम के दौरान उत्साही बालिकाओं ने कैलाश के साथ मंच साझा किया एवं उनके तरानो में झूम उठी। दर्शक दीर्घा ने भी इस दौरान मोबाइल की फ़्लैश लाइट से कैलाश का साथ दिया। सम्पूर्ण वातावरण ऐसा लग रहा था मानो खुले आसमाँ में दर्शक रूपी असंख्य टिमटिमाते तारे एवं कैलाश खेर चंद्र के सामान दैदीप्यमान हों।

इस दौरान कैलाश खेर ने अमरकंटक नर्मदा महोत्सव की परिकल्पना को मूर्त रूप देने वाले कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर एवं विधायक पुष्पराजगढ़ फ़ुँदेलाल सिंह मार्को की प्रशंसा की वहीं प्रशासन के अमरकंटक क्षेत्र को पर्यटन की दिशा में सँवर्धित करने के प्रयास को सराहा। श्री खेर ने कहा अमरकंटक आना मेरा सौभाग्य है यह प्राचीन नगर माँ नर्मदा के पवित्र उद्गम होने के साथ जलवायु की दृष्टि से पर्यटन के लिए उत्तम है। ज़िला प्रशासन का यह प्रयास अमरकंटक को विश्व पर्यटन मानचित्र में लाने में सहायक होगा।

कैलाश खेर का जनजातीय परम्परा से किया गया स्वागत

सुप्रसिद्ध गायक कैलाश खेर का अमरकंटक नर्मदा महोत्सव के दौरान स्थानीय जनजातीय परम्परा से स्वागत किया गया। विधायक पुष्पराजगढ़ फ़ुँदेलाल सिंह मार्को ने कैलाश खेर को बैगा टोपी, बीरन माला एवं गुडुम कोटी पहनाकर स्वागत किया। कैलाश खेर ने स्वागत की इस परंपरा पर मोहित होकर कहा मैं अमरकंटक आकर अभिभूत हो गया।

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