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टीला में चल रही रामकथा में सुनाया रावण-जटायु युद्ध का प्रसंग

टीला में चल रही रामकथा में सुनाया रावण-जटायु युद्ध का प्रसंग


करैरा ÷ सुख और दुख रात व दिन के समान है। जिस प्रकार घोर अंधेरी रात के बाद प्रकाशमय दिन का भी उदय होता है, इसलिए हमें दुखों से घबराना नहीं चाहिए क्योंकि इसके बाद सुख जरूर आएगा। यह बात टीला में चल रही श्रीराम कथा वाचक ज्योती शास्त्री ने रामकथा के सातवें दिन उपस्थित श्रद्धालुओं से कही। टीला में सिध्द बाबा मंदिर पर  श्रीराम कथा वाचक ज्योती शास्त्री ने आरण्य कांड में शूर्पणखा द्वारा राम के साथ विवाह का प्रस्ताव रखना, लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटना, मरिच का स्वर्ण मृग बनना व साधु वेश में रावण का सीता हरण करना, रावण व जटायु युद्ध व राम का शबरी के हाथों झूठे बेर खाना आदि प्रसंग सुनाए। इस दौरान आचार्य संत डाॅ. गोवर्धनराम शिक्षा शास्त्री ने कहा मनुष्य जब भगवान का भजन करता है और उसके जीवन दु:ख या कष्ट भी आता है तो उससे दुखी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा हम रामकथा सुन रहे है तो जीवन में मर्यादा का भी पालन करना चाहिए क्योंकि मर्यादा का पालन करने से ही भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते है। साथ ही रामभक्त हनुमान का मुद्रिका प्रकरण भी सुनाया। कथा में करैरा बिधायक जसवंत सिंह जाटव  अमन लोधी आमोल सहित  सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




Editor prajapati

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