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जरही में महरा समाज की संगोष्टी संपन्न

जरही में महरा समाज की संगोष्टी  संपन्न

ग्राम ईकाई का हुई गठन

राजेन्द्रग्राम-तहसील पुष्पराजगढ़ अन्तर्गत आदर्श ग्राम पंचायत जरही में समाज की संगोष्टी हुई 
जिसमें सर्वप्रथम में डाँ,बाबा साहेब अम्बेडकर जी की छाया चित्र में द्गीप प्रज्वलित कर फूल माला से स्वागत किया गया यह कार्यक्रम श्री धूपलाल महरा की अध्यक्षता में रखा गया महरा समाज के मुख्य अतिथि श्री रामभगत महरा जिला अध्यक्ष विशिष्ट अतिथि,ददन राम चन्द्रवंशी,डी,ए,प्रकाश खाण्डे,बब्बू प्रसाद चन्द्रवंशी,
कोलई राम,कमलेश कुमार साबो,भुजलू प्रसाद,मुकेश कुमार जनपद सदस्य,हरीदीन महरा,श्याम लाल महरा,कार्यक्रम की संयोजक पूरन चन्देल प्रान्तीय अध्यक्ष द्गारा आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का संरक्षक,भूपत महरा,भगवान दास महरा,झक्कू महरा,ओमकार महरा,बेसाहन महरा,रामदुलारे,रामभान महरा,शिव प्रसाद महरा,प्रबंधक,नारायण प्रसाद,सुरेश चन्देल,बृजमोहन,अशोक प्रसाद,समालू प्रसाद,रामदायाल,नवल प्रसाद,भगवान दास खाल्हे जरही सहित महरा समाज के लोग एकृत्रित होकर संगोष्टी कार्यक्रम किया गया जिसमें महरा समाज ग्राम जरही में ग्राम ईकाई कागठन कर घोषणा की गई एवं शपथ कराया गया की मैं महरा समाज के लिए अपनी निश्वर्वात भाव से कार्य करने की वचन देता हूं।ग्राम ईकाई की अध्यक्ष अशोक प्रसाद,उपाध्यक्ष,ओमकार महरा तथा सचिव छोटेलाल तेंदवे एवं कोषा अध्यक्ष नरायण प्रसाद को घोषित किया गया है। जिससे समाज के लोगों को यह बताया गया है की हमारे द्गारा ग्राम ईकाई गठन किया गया समाज के लोगों को इनकी बातों का पालन करने की प्रेणा दी गई है।

महरा समाज को महार समझकर अनुसूचित जाति मे कर दिया शामिल
आदिवासी की जाति प्रशासनिक त्रुटि से बदल गई 
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मध्यप्रदेश मे आदिकाल से निवास कर रहे महरा जाति के लोगो ने मानवीय  भूल की वजह से आदिवासी होने का राष्ट्रीय अधिकार खो दिया है .स्वतंत्रता पूर्व महरा जाति को आदिवासी  की श्रेणी मे माना गया है.मध्य प्रांत एवं बरार राज्य के अधिसूचना दिनांक 31 मार्च 1949 मे महरा को क्रमांक -69 मे दर्शाया गया है .मध्यप्रदेश गजट 8 दिसंबर 1950 मे भी एब्रोहीजनल ट्राइबल की सूची मे महरा जाति को कृ .-69 मे परिभाषित किया गया है । राजस्व अभिलेखों मे महरा ही लिखा एवं बोला जाता है .शब्दो के मामूली चूक के कारण तात्कालीन लीपकीय त्रुटि को संज्ञान मे नही लिया गया  और आदिवासी महरा जाति को "महार " समझकर अनुसूचित जाति मे शामिल कर दिया गया । समाज के प्रबुद्धजनों और जागरूक लोगो ने समय -समय पर प्रशासन की इस लिपिकीय त्रुटि को लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियो एवं जनप्रतिनिधियों से अपनी जाति के अस्तित्व को बचाने की गुहार लगाई है । 1956 मे मध्यप्रदेश राज्य गठन होने के बाद महरा जाति का आदिवासी वर्ग से विलोपित होना आश्चर्यजनक है .आरक्षण का लाभ लेने हेतु कुछ लोग महार एवं मेहरा जाति बदलकर शासकीय सेवा मे आगये ।  भारतीय संविधान मे वैधानिक रूप से धर्म बदलने का अधिकार है परंतु जाति बदलने का कोई अधिकार  नही है .इस जाति का पारंपारिक व्यवसाय कृषि एवं मजदूरी करना है ;यह समुदाय चंद्रा ,चंद्रवंशी ,कौशल ,वस्त्रकार ,कौसारिया आदि वर्गो मे बंटा है । महरा जाति एक स्वतंत्र जाति है ;इसमे कोई मात्रात्मक एवं उच्चारणगत त्रुटि नही है .इस जाति के साथ कभी भी छूवाछूत नही किया जाता रहा है । महरा जाति का खान -पान ,रहन -सहन ,तीज -त्यौहार के साथ समस्त सामाजिक एवं धार्मिक क्रियाकलाप जनजातियों के समरूप है ।

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