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भौंती- भारतीय जीवन दर्शन में मनुष्य की जीवन यात्रा जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त चलती है । इस यात्रा में मनुष्य को अनेक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है ।

सादर प्रकाशनार्थ
*सरस्वती शिशु मंदिर*भौंती में बसंत पंचमी पर विद्यारंभ संस्कार*
भौंती- भारतीय जीवन दर्शन में मनुष्य की जीवन यात्रा जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त चलती है । इस यात्रा में मनुष्य को अनेक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है ।
जीवन की इन बदलती परिस्थितियों में जीवन निर्वाह के लिए ऋषि-मुनियों ने कुछ विधि-विधान बताए हैं जिनका पालन करने से जीवन सुखमय बनता है शास्त्रों में इन नियमों को संस्कार नाम दिया गया है मनुष्य जीवन में में ऐसे सोलह संस्कार होते हैं उनमें से एक है 'विद्यारम्भ संस्कार' ।
हिन्दू धर्म के अनुसार विद्यारम्भ संस्कार अति आवश्यक माना गया है । विद्यारम्भ का अर्थ है कि शिशु को शिक्षा के प्रारंभिक स्तर से परिचित कराना , हिन्दू धर्म के अनुसार जिस प्राणी को विद्या नहीं आती उसे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के चारों फलों से वंचित रहना पड़ता है विद्या की प्राप्ति के लिए विद्यारम्भ संस्कार अति आवश्यक है ।
इसी सनातन परंपरा का निर्वहन करने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर भौंती में बसंत पंचमी पर शिशुओं का एक साथ वैदिक पद्धति से विद्यारम्भ संस्कार किया जाएगा ।
लालयेत पञ्चवर्षाणि दशवर्षाणि तडयेत ।
प्राप्ते तु शोडशे वर्षे पुत्र मित्रवत आचरेत ।।
अर्थात पाँच वर्षों तक बालक का लालन पालन करना चाहिए, दस वर्षों तक बालक को ताड़ना चाहिए तथा सोलह वर्ष तक उसके साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए ।
इसी तारतम्य में विद्याभारती मध्यभारत प्रान्त में एक साथ 30000 विद्यालयों में एक समय पर किया गया तथा भौंती ग्राम के सरस्वती शिशु मंदिर  में आयोजित किया गया।
यह भव्य आयोजन माघ शुक्ल पञ्चमी बसन्त पञ्चमी - विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के प्राकट्योत्सव पर दिनाँक - 30 जनवरी 2020 दिन - गुरुवार, समय - प्रातः 09:00 बजे से यज्ञवेदी बनाकर मंत्रोच्चारण एवं यज्ञ के साथ किया गया ।
इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में ग्राम के गणमान्य नागरिक एवम् माता पिता  ने पधारकर अपने शिशुओं का विद्यारम्भ संस्कार कराया।
उक्त जानकरी शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य श्री प्रदीप सिंह चौहान  द्वारा द्वारा प्रदान की गई ।

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