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बौद्ध धर्म एवं सनातन धर्म परंपराओं पर परिचर्चा का आयोजन

बौद्ध धर्म एवं सनातन धर्म परंपराओं पर परिचर्चा का आयोजन
  बिहार के गया में मगध विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के कांफ्रेंस हॉल में परिचर्चा का आयोजन किया गया। चर्चा का मुख्य विषय- "बौद्ध धर्म एवं सनातन परंपराओं का समन्वय" पर आधारित था. परिचर्चा में मुख्य अतिथि के तौर पर मान्यवर श्री इंद्रेश कुमार जी-(अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं धर्म संस्कृति संगम सहित 40 संस्थाओं के संरक्षक) उपस्थित रहें। साथ ही मगध विश्वविद्यालय के वी.सी. प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद, स्वामी सत्यप्रकाश, स्वामी पुष्करानंद, श्री राजेश लांबा, श्री राम नवमी प्रसाद जी, भी मंच पर उपस्थित रहें। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं अतिथियों को अंग वस्त्र प्रदान कर किया गया। परिचर्चा का शुरुआत स्वामी परमानंद जी ने किया, जिसमें वे बौद्ध धर्म एवं सनातन परंपराओं की महानता पर प्रकाश डाला। परिचर्चा के दौरान मान्यवर इंद्रेश जी ने कहा कि- हिंदुस्तान दुनिया की सभी मत पंथो को स्वीकार किया और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जितनी भी धर्म है, वे भारत में शांतिपूर्वक जीवन यापन कर सकते हैं- यही भारत की महानता है। भारत बौद्ध मत को शांति का मार्ग बताते हुए, उन्होंने कहा कि अज्ञान से ज्ञान की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, दुख से सुख की ओर, ले जाना हमें बौद्ध मत सिखाता है। सनातन और बौद्ध धर्म ग्रंथ दुनिया को चलना सिखाया, नई-नई शोध इन दोनों धर्मों के ग्रंथों के माध्यम से हुआ है। अपने विचार को ही श्रेष्ठ बताना, मतभेद उत्पन्न करना होता है। मतभेद बस केवल एक धर्म से दूसरे धर्म के बीच ही नहीं होता। एक धर्म के अंदर भी होता है, जहां हिंसा और असहिष्णुता भी पाया जाता है। श्रीमान ने बताया कि सनातन और बौद्ध परंपरा अगर दोनों एक हो जाते हैं, तो इस दुनिया का सबसे बड़ा मैत्री, विकास, शांति, सम्मान, ज्ञान, प्रकाश इत्यादि का परिचायक होगा- जो पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। मान्यवर के उद्बोधन के बाद, मंचासीन अतिथियों के द्वारा भी परिचर्चा के विषय पर विचार रखा गया। इस परिचर्चा का संचालन ब्रह्मचारी विकास चैतन्य जी ने किया। साथ ही मगध विश्वविद्यालय के बुद्धिमान प्रोफ़ेसर, डॉक्टर, बौद्ध धर्म के अनुयायि, गया के प्रबुद्ध नागरिक, संत समाज के लोग, और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि उपस्थित रहें। कार्यक्रम के दौरान राणा प्रताप जी, अंजनी जी, उमेश रंजन जी, कामता प्रसाद जी, अनिल स्वामी जी, रुपेश जी, अभिषेक जी, सत्येंद्र जी, संजीत जी सहित गणमान्य नागरिक गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन हम सभी के मार्गदर्शक प्रोफेसर डॉ सुशील कुमार सिंह- (निदेशक शिक्षा विभाग, मगध विश्वविद्यालय) के नेतृत्व में हुआ। जिसमें अमरनाथ मेहरवार जी, रंजीत जी, आनंद शंकर जी, अंकित शिवम जी, अमित जी, प्रभात जी, सोनल जी, विवेक जी, अविनाश जी, और मनीष परमार का भूमिका काफी सराहनीय रहा।

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