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एमयू के स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग में नेट जेआरएफ पर हो रहे सात दिवसीय कार्यशाला का अंतिम दिन

*एमयू के स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग में नेट जेआरएफ पर हो रहे सात दिवसीय कार्यशाला का अंतिम दिन
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गया में
बिहार मगध विश्वविद्यालय बोधगया में एमयू के स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग, एवं भारतीय लेखा परिषद, पटना शाखा की ओर से "वाणिज्य में यूजीसी एनटीए नेट जेआरएफ" विषय पर सात दिवसीय अभिविन्यास कार्यशाला की आखिरी दिन की शुरुआत आयोजन सचिव डॉ० धरेन कुमार पाण्डेय ने प्रतिभागियों के संबोधन से शुरू किया। पहले सत्र में विशेषज्ञ आशीष कुमार गुप्ता ने व्यवसायिक वातावरण से संबंधित प्रश्नों का विश्लेषण कराया। विशेषज्ञ ईशा धवन ने आंकड़ा निर्वचन से संबंधित तथ्यों की चर्चा की। वहीं विशेषज्ञ वरुण कुमार राय ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का गहन अध्ययन करते हुए प्रतिभागियों के व्यक्तिगत भिन्नता को आधार बनाते हुए उनका मनोबल भी बढ़ाया। सत्र के अंत में अरनी व्यवसायी प्रबंध संस्थान, अरनी विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश के पूर्व सहायक निर्देशक प्रोफेसर के. वी. एस. मदान ने वीडियो कॉलिंग द्वारा प्रतिभागियों से चर्चा करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यशाला के समापन समारोह की शुरुआत सरस्वती वंदना एवं कुलगीत के साथ हुआ। कार्यशाला अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश नंदन शर्मा ने अध्यक्ष (समापन समारोह) प्रोफेसर बी. राम यादव, डीन, मानविकी संकाय, मविवि को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। प्रोफेसर देवेंद्र प्रसाद ने अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर मुख्य अतिथि प्रोफेसर ब्रजेश कुमार, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं व्यावसायिक प्रबंध, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया को सम्मानित किया। प्रोफेसर चितरंजन ओझा ने विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुब्रमनियन शनमुगम, वाणिज्य एवं व्यावसायिक प्रबंध, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर समान्नित किया। आयोजन सचिव डॉ० धरेन कुमार पाण्डेय ने रिपोर्टियर प्रोफेसर रवि शंकर शर्मा, जहानाबाद कॉलेज एवं विशेषज्ञ आशीष कुमार गुप्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। वहीं कार्यशाला सचिव श्रीमती विनीता कुमारी ने विशेषज्ञ ईशा धवन, लखनऊ विश्वविद्यालय को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। प्रोफेसर गिरीश नंदन शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। तत्पश्चात प्रोफेसर रवि शंकर शर्मा ने सात दिन के कार्यशाला का रिपोर्ट पढ़ा।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर शनमुगम ने सभा का सम्बोधन करते हुए कहा कि शिक्षक एक महान पेश है। शिक्षक देश के निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वह जेआरएफ के लिए प्रयाश करें। उन्होंने कहा कि इस बजट में सरकार ने शोध एवं विकाश हेतु बहुत राशि का आवंटन किया है। शोधार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रमाणित करने के बहुत अवसर उपलब्ध हैं। मुख्य अतिथि प्रोफेसर ब्रजेश कुमार ने कार्यशाला की सफल आयोजन के लिए सबको बधाई देते हुए कहा कि वाणिज्य केवल एक विषय नहीं है बल्कि एक व्यापक विषय है। उन्होंने कहा कि वाणिज्य एक समुंद्र है जिसे नदी में सीमित रखा गया है। उन्होंने प्रतिभागियों को टेक्स्ट बुक पढ़ने की सलाह दी।
समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर बी. राम यादव ने कार्यशाला की उम्दा रिपोर्ट पेश करने के लिए प्रोफेसर रवि शंकर शर्मा की प्रशंसा की। उन्होंने आगे कहाँ की इस तरह के कार्यक्रम विश्वविधालय में बहुत कम आयोजित हुए हैं और विभागाध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश नंदन शर्मा को इसके लिए बधाई दी। ऐसे कार्यक्रम से विद्यार्थियों को एक दिशा प्राप्त होती है जो उन्हें शोध हेतु बहुत कारगर साबित होती है। उन्होंने आगे प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के टिप्स का अनुशरण करने की अपील की। मुख्य अतिथि द्वारा वरुण कुमार राय, विवेक शंकर, मनीष कुमार, नवीन कुमार एवं रंजन कुमार को, जिन्होंने कार्यशाला के सफल संचालन हेतु अपना महत्वपूर्ण समय दिया था, प्रसंशा सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। विशिष्ट अतिथि द्वारा वहां मौजूद प्रतिभागियों को भागीदारी सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि ने प्रतिभागी नीतीश कुमार को मोस्ट पंक्चुअल पार्टिसिपेंट का सर्टिफिकेट प्रदान किया। मविवि के पूर्व छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर सत्य रत्न सिंह ने भी वाणिज्य विभाग के इस प्रयास की सराहना की। प्रोफेसर देवेन्द्र प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन दिया जिसमे विशेष रूप से इस कार्यक्रम को भरपूर कवरेज देने हेतु मीडिया बंधुओं को धन्यवाद दिया। राष्ट्रगान के साथ इस सात दिवसीय कार्यशाला का समापनकिया गया।

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