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जल-जीवन-हरियाली योजना- गया में किए गए कार्य*

*जल-जीवन-हरियाली योजना- गया में किए गए कार्य*
*गया को मिलेगा गंगा का पानी*
गया,18 दिसंबर 2019
रिपोर्टः
दिनेश कुमार पंडित
बिहार के जिला गया में  तीव्र गति से हो रहे जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण असंतुलन को देखते हुए खासकर गया में इस वर्ष आए हीट स्ट्रोक और जल संकट के मद्देनजर बिहार में जल जीवन हरियाली योजना चलाने का निर्णय लिए गए और इस निर्णय के अधीन 11 सूत्री कार्यक्रम निर्धारित किए गए, जिसके तहत पुराने जल स्रोतों का सर्वे उनका जीर्णोद्धार नए जल स्रोतों का निर्माण वर्षा जल संचयन के उपाय के तहत रूफटॉप हार्वेस्टिंग जल, भूगर्भ जल रिचार्ज करने हेतु स्वच्छता एवं तालाब हड़ताल का जीर्णोद्धार पारंपरिक ऊर्जा यथा सौर ऊर्जा के संस्थापक पर बल के तहत लक्ष्य निर्धारित किए गए। गया जिला में जल जीवन हरियाली के तहत बहुत तीव्र गति से कार्य किए गए क्योंकि यह योजना गया जिला की समस्या को ध्यान में रखकर ही लाई गई है, इसलिए गया में कार्य की गति सर्वाधिक रहे गया के जल संख्या को जल संकट से उबारने के लिए गंगा नदी का पानी गया में लाए जाने की कालजई योजना भी बनाई गई है, जिसका प्रस्ताव आज गया में आयोजित कैबिनेट में पारित किया गया। आइए एक नजर डालते हैं जल के तहत किए गए कार्यों पर -
जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत गया जिला के विभिन्न अवयवों में किए गए कार्य का विवरण निम्नलिकित है-
तालाब, आहर एवं पइन:-1 एकड़ से अधिक जमीन में अवस्थित तालाबों की संख्या 691, लघु जल संसाधन विभाग से जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ संरचना के संख्या 33, पूर्ण कराए गए कार्य की संख्या 08, 1 एकड़ से कम जमीन में अवस्थित तालाबों की संख्या 4754, ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से जीर्णोद्धार हेतु कार्य प्रारंभ कराए गए संरचना की संख्या 169, कार्य पूर्ण कराए गए कार्यों की संख्या 43, जिले में आहरों की संख्या 2794, जीर्णोद्धार प्रारंभ किए गए आहरों की संख्या 579, जीर्णोद्धार पूर्ण कराए गए आहरों की संख्या 354, जिले में पइनों की संख्या 2729, जीर्णोद्धार प्रारंभ किए गए पइनों की संख्या 381, जीर्णोद्धार पूर्ण कराए गए संख्या 261है।
कुआं:- जिले में अवस्थित सार्वजनिक कुओं की संख्या शहरी क्षेत्र में 76 ग्रामीण क्षेत्र में 5361, कुल 5437, जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ संरचना की संख्या शहरी क्षेत्र में 03 ग्रामीण क्षेत्र में 102, जीर्णोद्धार पूर्ण कराये गए संरचना की संख्या शहरी क्षेत्र में 01 ग्रामीण क्षेत्र में 54 है।
चापाकल:- जिले में अवस्थित पीएचईडी, पंचायत, योजना अथवा अन्य किसी भी निधि से निर्मित चापाकल की संख्या शहरी क्षेत्र में 1521, ग्रामीण क्षेत्र में 46,177 इस प्रकार कुल 47,698 चापाकल हैं।
चेक डैम:- छोटे-छोटे नदियों नालों में एवं पहाड़ी क्षेत्रों में जल संग्रहण क्षेत्रों में चेक डैम एवं जल संचयन के लिए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 581, वन पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 152 एवं जल संसाधन विभाग द्वारा 186 संरचनाओं में कार्य प्रारंभ किया गया है। जिनमें से ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 217, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 152 एवं लघु जल संसाधन विभाग द्वारा 139 संरचनाओं में कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं। 
इस प्रकार ग्रामीण विकास विभाग ने 37.35%, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 100% एवं ललित लघु जल संसाधन विभाग ने 74.73% कार्य पूर्ण कर चुका है।
नए जल स्रोतों का सृजन:- गया जिला में नए जल स्रोतों का सृजन वर्ष 2019-20 में कुल 4976 वर्ग किलोमीटर में किया गया है, जिनमें ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 194 लघु जल संसाधन विभाग द्वारा एक कृषि विभाग द्वारा 04, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा 17 एवं अन्य विभाग द्वारा 05 कुल 221 नए स्रोत के सृजन का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 192, लघु जल संसाधन विभाग द्वारा 01, कृषि विभाग द्वारा 04, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा 17 और अन्य विभाग द्वारा 04 संरचनाओं में कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इस प्रकार कुल 218 संरचनाओं में कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिनमें से ग्रामीण विकास विभाग ने 32 रचनाओं में कार्य पूर्ण कर लिया है।
छत पर वर्षा जल संचयन :-जल- जीवन- हरियाली अभियान के तहत गया जिला में अवस्थित सभी सरकारी भवनों का सर्वेक्षण कराया जा चुका है। भवन निर्माण विभाग के 222, शिक्षा विभाग के 3077, स्वास्थ्य विभाग के 26 अन्य विभाग के 499 कुल 3824 सरकारी भवन अवस्थित हैं, जिनमें छत वर्षा जल संचयन (Rain water harvesting) संरचना का निर्माण कराया जाना है। भवन निर्माण विभाग के 75 में, शिक्षा विभाग के 345, स्वास्थ्य विभाग के 01 और अन्य विभाग के 118 भवनों में, कुल 540 भवनों में निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिनमें से भवन निर्माण विभाग ने 69, शिक्षा विभाग ने 310, स्वास्थ विभाग ने 01 और अन्य विभाग ने अपने 31 भवनों में कार्य पूर्ण कर लिया है। इस प्रकार कुल 411 भवनों में छत वर्षा जल संचयन के कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जो 76.25% की उपलब्धि दर्शाता है।
वृक्षारोपण एवं पौधाशाला:- जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत सघन वृक्षारोपण एवं पौधशाला सृजन का कार्यक्रम व्यापक पैमाने पर किया गया है। वर्ष 2019- 20 में वन विभाग द्वारा कुल 6,37,640 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से 6,36,285 पौधे लगाए गए हैं। वन विभाग के अंतिम गणना के अनुसार उनके क्षेत्र में 52,18,714 पौधे जीवित हैं। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2,019-20 में 10,04,200 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से 8,24,200 पौधे लगाए गए हैं। अंतिम गणना के अनुसार 6,71,566 पौधे जीवित हैं। इस प्रकार कुल लक्ष्य 16,41,840 के विरुद्ध 14,60,485 पौधे लगाए गए और अभी वर्तमान में सभी पौधों वृक्षों को मिलाकर 58,90,280 पौधे जिले में जीवित हैं।
जैविक खेती एवं टपकन सिंचाई:- इसके लिए जिले की कुल कृषि योग्य भूमि 4,52,825 एकड़ है, जिनमें से 500 एकड़ में जैविक खेती की जा रही है तथा 30.20 एकड़ में टपकन सिंचाई (ड्रिप स्प्रिंकल) से खेती की जा रही है।
सौर ऊर्जा:- जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत सौर ऊर्जा उपयोग को प्रोत्साहन एवं ऊर्जा की बचत के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत गया जिला के 1393 भवनों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से भवन निर्माण विभाग के 222, शिक्षा विभाग के 1,003, स्वास्थ्य विभाग के 48 एवं अन्य विभाग के 120 भवन हैं। इनमें से स्वास्थ्य विभाग के 01 अन्य विभाग के 07 भवनों में सौर ऊर्जा संस्थापित किया जा चुका है, जिनकी क्षमता 231 केवीए है।
सार्वजनिक जल संचयन की कुल संरचना:- जल-जीवन- हरियाली अभियान के अंतर्गत सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं को चिन्हित कर अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत जल-जीवन- हरियाली पोर्टल पर सुदूर संवेदन से उपलब्ध कराए गए जल संचयन संरचनाओं की संख्या 9722 है। जिला स्तर पर चिन्हित अतिरिक्त जल संचयन रचनाओं के संख्या 2409 है। निरीक्षण कर चिन्हित किए गए जल संरचनाओं की संख्या सार्वजनिक क्षेत्र में 4413 एवं निजी क्षेत्र में 2222 है। ऐप के माध्यम से अतिक्रमित चिन्हित संरचनाओं की संख्या 518 है, संख्या तथा पीकर मित्र नहीं पाए गए संरचनाओं की संख्या 4655 है। अतिक्रमण संरचनाओं में से 283 संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने हेतु अतिक्रमणवाद चलाकर नोटिस निर्गत किए जा चुके हैं तथा 08 अतिक्रमणवाद में अंतिम आदेश पारित किए जा चुके हैं और 83 संरचनाओं को अंतिम रूप से अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। अतिक्रमण मुक्त कराये गए संरचनाओं का प्रतिशत 16.2 है।

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