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पुष्पराजगढ़ के अध्यापक संघ ने 20-50 फर्मूले के अनिवार्य सेवा निर्मित आदेश निरस्त किए जाने को लेकर शिक्षा सवर्ग की समस्याओं से समाधान कराए जाने पुष्पराजगढ़ तहसीलदार को सौंपे ज्ञापन

पुष्पराजगढ़ के अध्यापक संघ ने 20-50 फर्मूले के अनिवार्य सेवा निर्मित आदेश निरस्त किए जाने को लेकर शिक्षा सवर्ग की समस्याओं से समाधान कराए जाने  पुष्पराजगढ़ तहसीलदार को सौंपे ज्ञापन 

राजेंद्रराम - मध्यप्रदेश के शिक्षक संघ एवं अध्यापक संघ द्वारा भारत माता की जय स्कूल बचाओ अत्याचार बंद करो की नारा लगाते हुए तहसील प्रांगण पहुँच कर पुष्पराजगढ़ तहसीलदार टी आर नाग को ज्ञापन पत्र सौंपा गया ज्ञापन में उल्लेखनीय है कि 16 अध्यापक शिक्षक सर्वग को 20 वर्ष की सेवा 50 वर्ष की आयु के फार्मूले के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। एवं विभागीय गतिविधियों में सुधार लाने के अध्यापक एवं शिक्षक महासंघ मध्यप्रदेश द्गारा ज्ञापन देकर बताया है कि 20-50 फार्मूला अध्यापक शिक्षक विरोधी है ।इस सरकारी स्तर से वापस लिए जाने की मांग कीए है ।वहीं समाचार पत्रों और मीडिया पर आई खबरें देश के विषय से खबरों में शिक्षकों के परीक्षा में फेल होने की बात कही गई है,जबकि इनमें से अनेक शिक्षा ऐसे है जो किसी परीक्षा में बैठी हीं नहीं है। 26 /1/2001 के बाद शिक्षकों के तीसरे संस्थान होने पर कार्रवाई संबंधी आदेश शासन स्तर से निरस्त किया कराए जाने की बात रखा गया। शिक्षक संघ का कहना है कि हम अधिकार अधिनियम अंतर्गत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक और कक्षा 9 से 12 तक सुबह स्कूल आरंभ होने से लेकर विद्यालय में दिन की समाप्ति तक पल प्रतिपल उच्च विभागीय निर्देशों का पालन करते  हैं और अध्ययन कार्य कराते हैं ।यदि ऐसी स्थिति में परीक्षा परिणाम प्रभावित होता है तो सिर्फ शिक्षकों को ही दोषी माना जाता है लोकतांत्रिक और अन्यायपूर्ण है जो विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम की जिम्मेदारी विभाग में हर स्तर पर तय की जाएगी माह अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र को व्यवहारिक बनाया जाए ताकि बच्चों को वास्तविक लाभ मिल सके प्रवेश प्रक्रिया अप्रैल से अगस्त तक जारी रहने से भी अध्यपन कार्य प्रभावित हो जाती है । जिससे बेस्ट आफ फाइव पद्धति तथा 80अंको के प्रश्न पत्र मंडल परीक्षा के प्रति भय दूर करने विद्यार्थियों को गुणवत्ता युक्त प्रणाम के लिए प्रेरित नहीं करते हैं। जिसके लिए शिक्षकों को दोषी नहीं माना जा सकता, शालेय छात्रों का पाठ्यक्रम समय-समय पर परिवर्तित होता रहता है और विभिन्न प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को शिक्षणों के माध्यम से शिक्षकों द्वारा नई शिक्षण विधियों से अवगत कराते हुए विभागीय परंपरा को लेकर सरकार से अपेक्षा किए हैं कि शिक्षकों को प्रशिक्षण के माध्यम से अपडेट किए जाने की बात कहीं गई है।
 ऐसे अनेक बिंदुओं में जो विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा नहीं अपितु शिक्षक विभाग के नीति निर्धारकों द्वारा तय किए जाते हैं ।जिनकी विसंगतियों को दूर कराने अध्यापक महासंघ ने बार-बार सरकार को अवगत कराया गया है किंतु उन पर अभी तक विचार नहीं किया गया और शिक्षकों को दोष न मानते हुए भी उनके विरूद्ध अनीर्वाय सेवानिवानिवृति की कार्यवाही की गई है।लेकिन शिक्षक संघ ने संदर्भित आदेश एवं विभागीय की विभिन्न अनावश्यक गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कराए जाने की मांग कीए है । ज्ञापन सौंपते वक्त ऐ रहे मौजूद बलराम साहू अध्यक्ष आस, विशंभर अहिरवार अध्यक्ष अध्यापक संघ, पुष्पेंद्र पांडे अध्यक्ष शिक्षक संघ, सोन सिंह मार्को अध्यक्ष शिक्षक संघ ,राजेश नापित, दीपक जयसवाल, पुष्पेंद्र कुमार ,देवेंद्र यादव ,सविता गुप्ता, मनीषा परस्ते, सुधा जयसवाल, स्नेह लता मरावी, सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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