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Saturday, 12 October 2019

बिहार में जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत जल संचय एवं संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया*

*बिहार में जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत जल संचय एवं संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया*
गया, 12.10.2019, 

रिपोर्टः
दिनेश कुमार पंडित 
बिहार से
बिहार के जिला गया में जल जीवन हरियाली पर एक दिवसीए कार्यशाला का आयोजन महाबोधी रिसोट होटल बोधगया में  किया गया जहां माननीय जिलाधिकारी श्रीअभिषेक सिंह ने  दीपप्रज्वलित कर कार्यशाला  उद्घाटन किया।और  संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी, गया श्री अभिषेक सिंह ने बताया कि जल जीवन हरियाली अभियान के लिए गया से बेहतर स्थल बिहार में नहीं हो सकता। विगत दिनों में आए जल संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ जल संकट के कारण न केवल मनुष्य बल्कि पशु, पौधे भी प्रभावित हुए। गया, रोहतास, कैमूर को धान का कटोरा क्षेत्र कहा जाता है, लेकिन जल संकट के कारण इस बार धान का अक्षदान 61% रह गया जो कि हर साल 90 से 95% रहता है और सुखाड़ के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ा और इसके बाद अचानक दो-तीन दिनों तक अत्यधिक वर्षापात हुई और वर्षा का वर्ष भर का विचलन शून्य हो गया। उन्होंने कहा कि 15 से 16 जून 2019 को गया, औरंगाबाद एवं नवादा के करीब सौ से अधिक लोगों की मृत्यु हीट वेव से हुई। मरने वाले लोगों के शरीर का तापमान अचानक 106 से 107 डिग्री सेल्सियस तक हो गया था। जो लोग घर से बाहर थे, वे ज्यादा प्रभावित हुए। समीक्षा क्रम में पाया गया कि या घटना उन्हीं क्षेत्रों में हुई जहां सरफेस वाटर नहीं था, ग्राउंड वाटर का स्तर काफी नीचे था और हरियाली का अभाव था। उन्होंने कहा कि इसमें और अध्ययन करने की आवश्यकता है, लेकिन एक बड़ा कारण मिला। माननीय मुख्यमंत्री, बिहार द्वारा इस घटना की समीक्षा की गई और उसी समय से यह धारणा बन गई कि इस तरह से एक बड़ी योजना का शुभारंभ किया जाए, जिससे सूखे और जल संकट का सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि जल जीवन हरियाली का तात्पर्य है कि जल है तो जीवन है और जीवन के लिए हरियाली आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चेन्नई, मुंबई, पटना में आई बाढ़ को हम न्यूज़ के रूप में देखते हैं। गया, औरंगाबाद, नवादा में हीट स्ट्रोक से 100 लोगों की मृत्यु हुई, उसे भी न्यूज़ के रूप में ही अप्रभावित लोगों ने देखा होगा, क्योंकि जब तक हम प्रभावित नहीं होते हैं तब तक उसकी महत्ता हमें समझ में नहीं आती। जलवायु परिवर्तन किसी क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रहेगा। पुराने लोगों ने देखा है किस तरह से उनके बचपन/जवानी में नियमित रूप से वर्षा होती थी, तापमान प्रत्येक मौसम से नियमित रहता था। लेकिन अब यह अनियमित हो गया है। वर्षा कब होगी और तापमान कब बढ़ेगा यह अनिश्चित हो गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें अपने व्यवहार और जिम्मेदारी को बदलने की आवश्यकता है और यह एक-दो विभाग से नियंत्रित से नहीं हो सकता, इसमें सभी विभाग, सभी एजेंसी को संयुक्त रूप से कार्य करना होगा बल्कि इस अभियान को आम लोगों तक ले जाना होगा तभी जल- जीवन- हरियाली सफल होगा। उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की आवश्यकता है। 
उन्होंने कहा कि जल शक्ति अभियान के तहत मानपुर, डुमरिया, इमामगंज प्रखंड को लिया गया, क्योंकि यहां ग्राउंड वाटर का दोहन ज्यादा हुआ है, जिसके कारण जल समस्या उत्पन्न हुई। ग्राउंड वाटर की जमीन से मिट्टी की अद्धता समाप्त हो जाती है और उस क्षेत्र के पानी का स्रोत सूख जाता है और वहां न केवल पानी की समस्या होती है बल्कि फसल उत्पादन समस्या हो जाती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के 18 प्रखंड जल संकट से प्रभावित हुए हैं, शहरी क्षेत्र में जल स्तर 55 से 60 फीट पर चला गया है। इन समस्या से निपटने के लिए इस अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों का जीर्णोद्धार एवं नये जल स्रोतों का निर्माण किया जाना है और इसके लिए सभी लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, इसके लिए ग्रामीण स्तर पर चौपाल के आयोजन की जरूरत है और जल संचय हेतु तथा ग्राउंड वाटर लेवल रिचार्ज करने हेतु उपाय करने की जरूरत है।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि यहां वाटर लेवल के मामले में बहुत ही विषमताएं हैं यहां तक कि एक पंचायत से दूसरे पंचायत के बीच बहुत अंतर है।
उन्होंने सिंगापुर का उदाहरण दिया और कहा कि सिंगापुर ऐसा शहर है जहाँ स्वक्छ पानी का कोई भी स्रोत नहीं है यह समुद्र के किनारे बसा हुआ है। लेकिन समीप के तीन पहाड़ियों के समीप तीन बड़े-बड़े टैंक बनवाया गया जिनमें वर्षा का जल एकत्रित किया जाता है और 6 महीने तक इसी टैंक से पूरे शहर को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। उन्होंने कहा कि वहां दो तरह से पानी की आपूर्ति की जाती है एक पेयजल के लिए दूसरा अन्य कार्यों के लिए उसी प्रकार हमें भी जल संकट के संदर्भ में सोचना पड़ेगा। 
हमारे यहां मूल स्रोत से घर तक जाते-जाते पानी का 40% बर्बाद हो जाता है, 80% पानी प्रयोग करने के बाद प्रदूष पानी में परिवर्तित हो जाता है जिससे हमारा ग्राउंड वाटर एवं सरफेस वाटर प्रदूषित होता है। स्वच्छ पेयजल का प्रयोग कपड़े धोने, जानवरो को नहलाने एवं अन्य कार्यों में करते हैं। वे पानी का महत्व नहीं समझ पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 2024 तक हर घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के अंतर्गत नल जल योजना के द्वारा वर्ष 2020 तक सभी घरों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति कर दी जाएगी जो संपूर्ण देश में एक अनूठा उदाहरण होगा। 
उन्होंने कहा कि जल- जीवन- हरियाली के तहत जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करना, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग करना, सोकपिट का निर्माण करना, हरियाली के लिए पेड़ लगाना यह सभी कार्य किए जाने हैं।
इसके तहत सभी पदाधिकारियों को अपने अपने परिसर क्षेत्र में पेड़ लगाने का निर्देश दिया गया था लेकिन एक तिहाई के द्वारा कार्य किए गए। वे समझते हैं कि यह सरकारी कार्य हैं लेकिन इसका हमारे भावी पीढ़ी पर बहुत ही बड़ा असर पढ़ने वाला है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं डेढ़ वर्षो में 500 से 1000 पेड़ लगाएं।
उन्होंने कहा कि जहां ग्राउंडवाटर रिचार्ज हो रहा है वहां चापाकल नहीं सूख रहा है। जो लोग पुराने लोग हैं जानते हैं पहले 5 जून से बारिश होती थी अब 25 जून से बारिश होती है पहले बारिश की एक ऋतु होती थी लगातार महीनों बारिश होती थी अब पता ही नहीं चलता है कि वर्षा ऋतु क्या है। वर्षापात का औसत भी घट गया है। औसतन पहले 1250 मिमी वर्षा होती थी जो घटकर अब 900 से 950 मिमी हो गयी है।
उन्होंने कहा कि हम पानी के महत्व नहीं समझ पा रहे है, जिसके कारण यह समस्या हो रही है। इसे समझना होगा और या केवल सरकारी तंत्र से नहीं सभी के सहयोग से होगा। इस अभियान को जन आंदोलन का रूप देना होगा और इसी के तहत 18 एवं 19 अक्टूबर को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता वाटर मैन श्री राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिनमें 18 अक्टूबर 2019 के पूर्वाह्न 7:30 बजे से 10:30 बजे तक सीता कुंड से भूसंडा मोड़, मुफस्सिल थाना, मेहता पेट्रोल पंप होते हुए लखनपुर ग्राम तक जल पदयात्रा का आयोजन वाटर मैन के नेतृत्व में किया जाएगा। श्री सिंह मानपुर में लखनपुर ग्राम में आयोजित कार्यक्रम *आपका प्रशासन आपके द्वार* को भी संबोधित करेंगे। इसके उपरांत अपराह्न 4:00 बजे से जल- जीवन- हरियाली अभियान के तहत जिला स्तरीय पदाधिकारी के साथ बैठक करेंगे और अपराह्न 6:00 बजे से बोधगया प्रखंड में चौपाल का आयोजन किया जाएगा। 
19 अक्टूबर 2019 को संग्रहालय गया के सभा भवन में पूर्वाह्न 7:30 बजे से मानपुर एवं बोधगया के जनप्रतिनिधि/एनजीओ, बोधगया के लोक निर्माण समिति/प्रमुख/ मुखिया/नगर पार्षद/वार्ड सदस्य/बीपीएम एवं जीविका के दीदियों को वाटर मैन श्री राजेंद्र सिंह द्वारा संबोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे योजना की सफलता के लिए इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा सभी लोगों की सहभागिता आवश्यक है तभी यह अभियान सफल हो सकेगा।
कार्यशाला का उद्घाटन जिला पदाधिकारी, गया श्री अभिषेक सिंह के कर कमलों से किया गया। कार्यशाला में को श्री राजीव रोशन, अपर सचिव सह मिशन निदेशक, जल जीवन हरियाली, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार एवं यूनिसेफ के स्वच्छता एवं जल विशेषज्ञ डॉ प्रभाकर सिन्हा तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण पदाधिकारी श्री बंकू बिहारी सरकार द्वारा संबोधित किया।सभी पदाधिकारियों मौजूद थे।

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