Breaking News

बिशुनपुर में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी त्यौहार

बिशुनपुर में शुक्रवार को बड़े ही धूमधाम  से मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी त्यौहार 

अशोक कुमार पाल
भारत न्यूज लाइव24 हर खबर आप तक
सादुल्लाहनगर/बलरामपुर



ग्राम सभा विशुनपुर खरहना विशुनपुर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दुर्गा माता मन्दिर मे मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी त्यौहार जिससे  ग्रामीण के सभी लोगो के सहयोग से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया। दिन भर श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भजन-कीर्तन किया। रात बारह बजते ही घंटा घड़ियालों के साथ बधाइयां बजनी शुरू हो गईं। श्रद्धालुओं ने गोले व पटाखे दागे और आरती की। महिलाओं ने गोकुल में बजत है बधैया, नंद के घर जन्मे कन्हैया सहित अन्य सोहर गीत गाए। रामबहादुर पाल,मनोज शर्मा,सीता राम,रामफेर लोहार,राज कुमार,बब्लू, रामलखन,राजकुमार आदि समस्त ग्रामीण के लोग मौजूद रहे।

 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार जनपद में कृष्ण भक्तों द्वारा शुक्रवार  मनाया गया है। जन्मोत्सव के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। जगह जगह सजे पूजा पंडालों के माध्यम से भक्त कृष्ण की भक्ति में लीं हो गए हैं। पूजा पंडालों में स्थापित श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं के पट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। पूजा पंडालों में मंत्रोच्चारण के बीच कलश स्थापना कर भक्तों द्वारा पूजन अर्चन व वंदन का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। पर्व के निमित्त नरौली से मिशन अस्पताल रोड पर कई पूजा पंडालों की स्थापना की गयी है। इन पूजा पंडालों में मुरली मनोहर की मोहक छवि वाली प्रतिमाएं स्थापित हुई हैं।

1. श्री कृष्ण के जन्म के समय कई चमत्कार हुए। देवकी की आंठवी संतान के द्वारा वध होने की भविष्यवाणी सुनकर कंस ने अपनी बहन  और अपने जीजा वसुदेव को कारगार में डाल दिया था। और एक एक करके उसकी सारी संतानों का वध करता गया। लेकिन जब देवकी की आंठवी संतान होनी थी तब द्वार पर खड़े पहरेदार मुर्छित हो गये और द्वार स्वत खुल गया। जिस कारण वासुदेव ने अपने आठवें पुत्र को नंद और यशोदा के पास पहुंचाकर उनकी नन्ही बच्ची को लेकर वापस आ गए। जब कंस वहाँ पहुंचा तो वसुदेव और देवकी ने उसे कहा इसे छोड़ दो ये तो लड़की है। पर कंस नहीं माना उसने उस बच्ची को जमीन पर पटकना चाहा। पर वो बच्ची जमीन पर नहीं गिरी उसने एक अलग ही रूप धारण कर लिया। और उसकी मृत्यु की सूचना दी।

2. एक बार की बात है देवराज इंद्र ब्रज के लोगों से बहुत क्रोधित हुए क्योंकि लोग भगवान कृष्ण की बातों को सुनकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे थे और इंद्र देव की पूजा नहीं कर रहे थे। क्योंकि गोकुल के लोगों में इन्द्रोत्सव मनाने की परंपरा थी। क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें दंडित करने के लिए घनघोर वर्षा की जिससे वृंदावन में बाढ़ की संभावना उत्पन्न हो जाए। वृंदावन के लोग डर गए और सभी भगवान कृष्ण की शरण में पहुंचे। भगवान कृष्ण ने उसी समय कृष्ण ने पूरे गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ की छोटी उंगली पर एक छतरी की भांति उठा दिया।

3. कृष्ण को गोविंद नाम से जाने जाने के पीछे भी एक कहानी है। एक दिन भगवान कृष्ण से मिलने के लिए स्वर्ग से कामधेनु नामक गाय पहुंची। गाय ने कृष्ण से कहा कि वह देव लोक से उनका अभिषेक करने आई है क्योंकि कृष्ण पृथ्वी पर गायों की रक्षा कर रहे हैं। उस गाय ने कृष्ण को पवित्र जल से नहलाकर उनका शुक्रिया अदा किया। उसी समय भगवान इंद्र वहां 
प्रस्तुत हुए और उन्होंने श्रीकृष्ण को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपके इन पुण्य कार्यों के लिए पूरे विश्व के लोग आपको गोविंद के नाम से जानेंगे।

4. कृष्ण के हाथों अपने वध की भविष्यवाणी सुनकर भयभीत कंस ने उन्हे मारने के लिए पूतना नाम की रक्षाशनी भेजी। पूतना वृंदावन पहुंची और उसने एक सुंदर महिला का भेस धारण कर श्री कृष्ण का अपहरण कर लिया। और अपने वक्ष पर जहर लगाकर कृष्ण को दूध पिलाने लगी। श्री कृष्‍ण ने पूतना के वक्ष स्‍थल से उसके प्राण ही खींच ल‌िए उस राक्षसी की मृत्यु हो गई।

No comments