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Saturday, 1 June 2019

अफसोस तू रुखसत हुआ माहे मुबारक अलविदा।

*अफसोस तू रुखसत हुआ माहे मुबारक अलविदा।                                                                                        रो-रो के दिल ने यूं कहा माहे मुबारक अलविदा।*

 (गोण्डा)

शुक्रवार को रमजान माह के आखिरी जुमे पर क्षेत्र की मस्जिदों में अलविदा की नमाज पढ़ी गई। अलविदा को लेकर सुबह से ही गांवों  और घरों में चहल-पहल रही। नमाजी मस्जिदों में जाने की तैयारियों में मसरूफ रहे। अलविदा को लेकर मस्जिदों में आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ थी। प्रशासन की ओर से मस्जिदों के पास सुरक्षा के पुख्त इंतजाम किए गए थे। मस्जिद के पास पुलिस बल की तैनाती तो की गई थी। ऐ अल्लाह मेरे गुनाहों को माफ कर दे, कह छलके आंसू क्षेत्र के मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज कहीं एक बजे हुई तो कहीं डेढ़ बजे शुरू हुई।वही अल जामे अतुल हशमतिया मुशाहिद नगर माहिम के हशमती जामा मस्जिद में मौलाना क़ारी अब्दुल हफ़ीज़ हशमती ने डेढ़ बजे अदा कराई। वही सादुल्लाह नगर की सुन्नी ग़रीब नवाज़ मस्जिद में मौलाना क़ारी मोहम्मद वसीम बेग़ हशमती ने 1:15 पर अदा कराई। वही  मस्जिदों के खतीबो इमाम  हज़रात ने अलविदा की अहमियत और रमजान की फजीलत पर तफसील से रौशनी डॉली। नमाज के बाद अल्लाह के बारगाह में सबने दुआ की। कहा ऐ खुदा माह-ए-रमजान की इस बरकत से हमारे मुल्क को आबाद कर। हमारी मस्जिदों और मदरसों की हिफाजत फरमा। हमारे मुल्क को बदनिगाही से महफूज़ कर दे दुश्मनों को नेस्तनाबूत कर दे। रोजा, नमाज, जकात, तरावीह, सदका-ए-फित्र को कुबूल फरमा। अपने प्यारे नबी के सदके में हम मुसलमानों को नेक और ईमान के रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमा। ऐ अल्लाह तू रहम वाला है, मेरी गुनाहों को माफ फरमा, आमीन कहते ही लोगों की आंखों से आंसू छलकने लगे। रहमत, बरकत और मगफिरत के अलावा मुल्क की तरक्की एवं अमन चैन के लिए भी दुआ मांगी गई।      


*किस को कहते है अलविदा जुमा*

माह-ए-रमजान का आखिरी जुमा काफी अहम माना जाता है। इसे छोटी ईद का भी दर्जा दिया गया है। जुमा अलविदा रमजान माह के तीसरे अशरे (आखिरी 10 दिन) में पड़ता है। तीसरा अशरा निजात का अशरा होता है। इस जुमे को साल भर पड़ने वाले जुमे से अव्वल (बेहतरीन) माना जाता है। यह अफजल जुमा होता है। इससे जहन्नम (दोजक) से निजात मिलती है। यह आखिरी असरा है, जिसमें एक ऐसी रात होती है, जिसे तलाशने पर हजारों महीने की इबादत का लाभ एक साथ मिलता है। यूं तो जुमे की नमाज पूरे साल ही खास होती है, पर रमजान का आखिरी जुमा अलविदा सबसे खास होता है। अलविदा की नमाज में सच्चे दिल से जो भी दुआ की जाती है, वह जरूर पूरी होती है। अलविदा जुमा के साथ ही रोजेदार ईद की तैयारियों में जुट जाते हैं। कपड़े सिलने से लेकर विभिन्न पकवानों के लिए आवश्यक सामग्री की खरीदारी आज से तेज हो जाती है। अलविदा जुमा अदा करने के बाद हर रोजेदार को बस ईद के चांद के दीदार का इंतजार रहता है।

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