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Thursday, 16 May 2019

इंदिरा गांधी जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा

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ब्यूरो चीफ-: चेतन गुप्ता के साथ रिपोर्टर -//- भूपेंन्द्र पटेल जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश


*पत्रकारों के कार्यशाला के नाम पर आईजीएनटीयू मैं लाखों का भ्रष्टाचार*



अनूपपुर। अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विवि  में भर्रेषाही का आलम यह है कि यहां हर दिन भ्रष्टाचार के अलावा अन्य मामले खुलकर सामने आ रहे है। लाल फीताषाही विष्वविद्यालय के अंदर जमकर चल रही है तो वहीं कुलपति से लेकर उनके सागिर्दो की चांदी ही चांदी है। फर्जी नोटषीट, भवन निर्माण व मटेरियल सामग्री तथा अन्य मामलो में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जहां तक मीडिया कार्यषाला के आयोजन के नाम पर भी लाखों रूपये का गोलमाल विष्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा किया गया। यदि इन तमाम मामलो की जांच कराई जाये तो निष्चित ही विष्वविद्यालय प्रबंधन कटघरे में खड़ा नजर आयेगा। आयोजित हुई थी कार्यषालाइंदिरा गांधी विष्वविद्यालय अमरकंटक में पाॅच दिवसीय संयुक्त प्रषिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 4 फरवरी से लेकर 8 फरवरी 2019 तक आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले के अलावा अन्य क्षेत्रों से पत्रकारों को बुलाया गया था। इस कार्यक्रम में विष्वविद्यालय प्रबंधन जमकर गोलमाल किया।खाने खर्चे के नाम पर किया भ्रष्टाचारफरवरी माह में आयोजित हुए प्रषिक्षण कार्यक्रम में आये हुए पत्रकारों के नाम पर रहने खाने के अलावा आने जाने के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। रहने के नाम पर 25 पत्रकारों के लिए 2 लाख 50 हजार रूपये तथा 50 पत्रकारों को 4 लाख 50 हजार रूपये का खाना 45 पत्रकारों को 5 हजार रूपये की दर से आने-जाने का 2 लाख 25 हजार रूपये का भुगतान किया गया। इसी तरह अन्य खर्चो को मिलाकर 13 लाख 5 हजार 750 रूपये का व्यय फर्जी तरीके से किया गया। स्थानीय पत्रकारों का रहा आना-जानाइंदिरा गांधी विष्वविद्यालय अमरकंटक के भ्रष्ट जनसम्पर्क अधिकारी ने जो कारनामा किया है उसका खुलासा सूचना अधिकार के तहत् सामने आया है। प्रषिक्षण कार्यक्रम में जिन पत्रकारों को बुलाया गया था उनमें अधिकांष पत्रकार अनूपपुर जिले के थे जो प्रतिदिन आना-जाना किया करते थे। उन पत्रकारों को ऐसी कोई व्यवस्था नहीं दी गई जिस व्यवस्था के नाम पर विष्वविद्यालय का पैसा निकालकर जनसम्पर्क अधिकारी हजम गये है। लाखों की दी फाइलकार्यषाला में पहुॅचने वाले पत्रकारों को 750 रूपये की दर से उन्हे फाइले प्रदान की गई है, जिसकी कुल कीमत 33 हजार 750 रूपये का आहरण किया गया। इसी तरह अन्य खर्चो के नाम पर 1 लाख 50 हजार रूपये की राषि कार्यक्रम में व्यय किया जाना बताया गया। जबकि हकीकत में जो राषि कार्यक्रम के नाम पर व्यय किया जाना दर्षाया गया है वह हकीकत से कोसों दूर है। 


इनका कहना है


जब इस मामले में जनसम्पर्क अधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया उन्होने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा और फोन को बार-बार काटते रहे।


एस.एस.शर्मा


जनसम्पर्क अधिकारी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय

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