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Sunday, 13 January 2019

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नाबालिग को हवस का शिकार बनाने वाले को आजीवन कारावास देखिये
नाबालिग को हवस का शिकार बनाने वाले को आजीवन कारावास देखिये

नाबालिग को हवस का शिकार बनाने वाले को आजीवन कारावास

👉 आरोपी पर अदालत ने 2 लाख रुपए का लगाया अर्थदण्ड

👉 आरोपी ने अपने रसूख के बल पर बदलवा दिए थे खून के नमूने

👉 अपराध की गंभीरता को देखते हुए विद्वान न्यायधीश ने सुनाया फैसला।

👉 पन्ना अदालत ने न्यायिक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए 15 वर्षीय नाबालिग से बलात्कार के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर पीड़ित को न्याय और न्यायिक प्रक्रिया के उच्च मापदंडों को स्थापित कर साफ़ संकेत दे दिया कि अदालतें पीड़ितों को न्याय देने के लिए कृत संकल्पित हैं फिर अपराधी कितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो।

👉 सहायक लोक अभियोजक आशुतोष दिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि नाबालिग युवती के साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायधीश के न्यायालय द्वारा आरोपी को अजीवन कारावास तथा 2 लाख 2 हजार रूपये के अर्ध दण्ड से दण्डित किया गया है।

👉 घटना दिनांक 07.12.15 के समय 11.50 बजे स्टाघफ नर्स सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र देवेन्द्रनगर ने, थाना-देवेन्द्रानगर को इस आशय का पत्र भेजा कि, जिसकी उम्र 15 वर्ष है, पेट दर्द एवं खून आने के कारण सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र देवेन्दननगर में इलाज हेतु भर्ती कराई गई है, जॉंच के दौरान बच्चा बाहर व नाल अंदर था बच्चा लगभग 5-6 महीने का था जो पैदा होने के तुरंत बाद खत्म हो गया।

👉 महिला की हालत गंभीर होने पर उसे जननी वाहन से जिला चिकित्सा लय पन्ना भेजा जा रहा है उक्त सूचना पर थाना देवेन्द्रनगर द्वारा जिला चिकित्सालय पन्ना पहुंचकर पीडिता तथा उसके घरवालों से घटना के संबंध मे पूछतांछ की गई, तथा थाना देवेन्द्रनगर के द्वारा मर्ग-क्रमांक 45/15 कायम किया गया।

👉 और पीडिता से पूछतांछ करने पर उसने बताया कि, आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय के द्वारा तालाब के पास उससे जबरन बलात्कार किया गया और किसी से बताने पर उसे और उसके परिवारवालों को जान से मारने की धमकी दी गई।

👉 आरोपी के द्वारा पीडिता के साथ बलात्कार करने पर पीडिता को गर्भ ठहर गया था, पीडिता को पेट में दर्द होने के कारण उसकी मॉं के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र देवेन्द्रनगर में उसे इलाज हेतु लाया गया था, जहॉं 5-6 माह के शिशु का गर्भपात हुआ।नवजात शिशु का शव परीक्षण और पीडिता के मेडीकल परीक्षण उपरांत, थाना-देवेन्द्रनगर में अपराध क्रमांक 227/15 धारा 376, 506 भा.द.वि. तथा लै.अ.बा.का.सं.अधि. के अन्तंर्गत, आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया, तथा घटनास्थंल थाना-सलेहा क्षेत्र के अन्तअर्गत होने के कारण केस- डायरी मय प्रपत्रों के थाना-सलेहा भेजी गयी।

👉 थाना-सलेहा में असल अपराध क्रमांक 197/15 पंजीबद्ध कर अग्रिम विवेचना प्रारंभ की गई, विवेचना दौरान पीडिता के धारा 164 द.प्र.सं. के कथन माननीय न्यायालय में लेखबद्ध कराये गये। पीडिता,व उसके माता-पिता तथा अन्य साक्षियों के कथन विवेचना के दौरान लेख किये गये।

👉 आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय एवं पीडिता तथा नवजात शिशु के फीमर बोन का एफ.एस.एल सागर की डी.एन.ए फिंगर प्रिटिंग यूनिट से जाँच कराई गई। डी.एन.ए प्रोफाइल में यह अभिमत अंकित किया गया कि, पीडिता नवजात शिशु की जैविक माता है किन्तु आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय नवजात शिशु का जैविक पिता नहीं है इसी आधार पर थाना सलेहा के द्वारा प्रकरण में खात्मा प्रतिवेदन माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

👉 खात्मा प्रतिवेदन पर विचार किये जाने के पूर्व न्या्यालय के द्वारा पीडिता के धारा 164 द.प्र.सं. के कथन, पीडिता की मेडीकल रिपोर्ट, तथा समस्त साक्षियों के धारा 161 द.प्र.सं. के कथनों का अवलोकन कर, गवाहों को जरिये समंस तलब किया गया, न्या्यालय के समक्ष बयान देते समय पीडिता ने यह बताया था कि, आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय द्वारा उसके साथ जबरन बलात्कार किया गया है तथा उसने यह भी बताया था कि, आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय ने उससे कहा था कि, उसने ब्लड सेंपल बदलवा दिया है

👉 और जब मैं न्यायालय कथन देने आ रही थी, तब आरोपी अपनी बड़ी वाली कार में मिला था और धमकी दिया कि, पन्ना ब्यान देने मत जाओं, नहीं तो ट्रेक्टर चढवाकर तुम लोगों को खत्म कर देंगे।

👉 और वह चाहती है कि, ब्लेड सेंपल की दोबारा जॉंच की जाये। न्यायालय के द्वारा पीडिता व उसके माता-पिता के कथनों तथा प्रकरण की समस्त् परिस्थितियों पर विचार करते हुये, थाना सलेहा के द्वारा अप. क्र. 197/15 मे प्रस्तुत खात्मा प्रतिवेदन को अस्वीकार करते हुये, केस डायरी में संलग्न दस्तावेजी साक्ष्य एवं पीडिता और उसके माता-पिता के कथनों के आधार पर आरोपी भूरी उर्फ कुंज बिहारी पाण्डेय के विरूद्ध धारा 376, 506 भा.द.वि. एवं 5/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के अर्न्तगत अपराध का संज्ञान लिया गया था।

👉 माननीय न्यायालय ने अपराध का संज्ञान लेते समय अपने आदेश में यह भी लेख किया है कि, ‘’कोई भी नाबालिक अविवाहित लडकी और उसके माता-पिता, सील को दाव पर लगाकर बलात्कालर जैसे गंभीर अपराध में किसी को झूंठा नहीं फंसाना चाहेंगें, पीडिता ने अपने खात्मा प्रतिवेदन कथनों में अपने साक्ष्य में यह प्रकट किया है, कि आरोपी के द्वारा पैसे तथा प्रभाव का इस्तेसमाल करते हुये ब्लड सेंपल को बदलवा दिया गया है।

👉 इन परिस्थितियों में डी.एन.ए प्रोफाइल में नकारात्मक रिपोर्ट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। आरोपी भूरी उर्फ कुंज बिहारी पाण्डेय के विरूद्ध धारा 376, 506 भा.द.वि. व 5/6 लै.अ.बा.कासं.अधि. के अन्तसर्गत आरोप विरचित किये गये।

👉 अभियोजन की ओर से प्रवीण कुमार सिंह, जिला लोक अभियोजन अधिकारी पन्ना के द्वारा, साक्षियों को जरिये समंस तलब कराकर साक्षियों के कथन माननीय न्यायालय के समक्ष लेखबद्ध कराये गये।

👉 जिसमें पीडिता के द्वारा, आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय के द्वारा बलात्कावर किये जाने की बात बताई गयी थी, पीडिता के माता-पिता के द्वारा भी माननीय न्यायालय के समक्ष हुये कथनों में, आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय के द्वारा उसकी पुत्री के साथ बलात्कादर किये जाने की बात बताई गई थी।

👉 प्रदेश में संभवतः इस तरह का यह पहला मामला है

👉 जिसमें डीएनए. रिपोर्ट नेगेटिव होने पर पुलिस द्वारा खात्मा प्रस्तुत किया गया था और न्यायालय के द्वारा पुलिस का खात्मा प्रतिवेदन अस्वीकार कर संज्ञान में लिया गया था।

👉 प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये महानिदेशक/संचालक लोक अभियोजन, श्री राजेन्द्र कुमार के द्वारा प्रकरण की लगातार मानिटरिंग की गई तथा समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

👉 प्रकरण का विचारण अमिताभ मिश्रा, विशेष न्यायाधीश, जिला-पन्ना के न्यायालय में हुआ।

👉 जिसमें अभियोजन के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और न्यायायिक-दृष्टांतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी भूरी उर्फ कुंजबिहारी पाण्डेय को दोषी मानते हुए कठोर से कठोर दंड से दंडित किये जाने का निवेदन शासकीय लोक अभीयोजन द्वारा किया गया था।

👉 जिसके पश्चात माननीय न्यायालय के द्वारा अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए अभियुक्त भूरी उर्फ कुंज बिहारी पाण्डेय पिता कृष्ण मोहन पाण्डेय, उम्र-32 वर्ष, निवासी ग्राम-कठवरिया, थाना-सलेहा, जिला-पन्ना को धारा 376 भा.द.वि. व धारा 5/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में आजीवन कारावास और 2 लाख रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।

👉 अर्थदण्ड की अदायगी न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास की सजा से दण्डित होगा

👉 आरोपी को 506 भाग 2 में दो वर्ष का कारावास और 2000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

👉 माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में जुर्माने की राशि 2 लाख रूपये अपील अवधि पश्चासत् आहता को जरिये संरक्षक देने के लिये आदेशित किया गया साथ ही आहत को क्षति एवं पुर्नवास के संबंध में पीडित प्रतिकर स्कीम 2015 के अन्तर्गत कार्यवाही के लिये निर्णय की प्रति सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के लिये निर्देशित किया गया।

👉 माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि, आरोपी के द्वारा 15 वर्ष से कम उम्र की अबोध बालिका के साथ किये गये चारित्रि अपराध की गंभीरता को देखते हुये जिसमें आहत के द्वारा एक मृत नवजात भ्रूण को जन्म दिया गया है

👉 आरोपी दया का हकदार नहीं है। इस पूरे प्रकरण में जिला लोक अभियोजन अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह के द्वारा शासन की ओर से सशक्त पैरवी की गयी।

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