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Saturday, 24 November 2018

मशरक:सत्तू, मूली खाने की परम्परा आज भी कायम* 🔴 *पंकज कुमार सिंह*

*मशरक:सत्तू, मूली खाने की परम्परा आज भी कायम*
🔴 *पंकज कुमार सिंह*

छपरा जिला के मशरक थाना क्षेत्र में कार्तिक पुर्णिमा के दिन सत्तू मूली खाने की पुरानी परम्परा रही है जो आज भी कायम है। थोड़ी कमी जरूर आयी है। आधुनिकता में लुप्त होती पौराणिकता के पिछे कई कारण है। नौजवान लोग सतुआ खाने में लो स्टेंडर समझते है। वहीं स्वास्थ्य कारणों से बुर्जुग सतुआ खाने से परहेज करने लगे है। कहीं कहीं घाटों पर फैली गंदगी व नदी में ठहरे गंदे पानी भी सतुआ खाने में परेषानी पैदा करती है। बच्चे भी सतुआ से ज्यादा जलेबी, रसगुल्ला, फास्टफुड खाने की मांग करते है। कहीं आने वाले दिनों में यह परम्परा खत्म हो जाए तो कहा नहीं जा सकता। इसे बचाने की जरूरत है। वहीं  आज  इस  परम्परा को  जीवित रखते हुए मशरक (बडहिया टोला) निवासी मोहन ओझा के  पुत्र मनन कुमार ओझा ने सतुआ भोज का आयोजन किया । सतुआ भोज की  शुरुआत स्थानीय समाजसेवी  मशरक पूर्वी के मुखिया प्रतिनिधि अमर सिंह ने किया । उन्होंने कहाँ  की  इस  आधुनिकता के युग में ऐसे आयोजन के लिए  मनन ओझा को  धन्यवाद् । वहीं मनन ओझा ने कहाँ की  अगले साल  से  इस  आयोजन को  बृहद तरीक़े से  मनाया जाएंगा । उपस्थित लोगों में  बैधनाथ सिंह, विश्वनाथ सिंह, राजू सिंह, फुलेना ओझा, और सैकड़ों लोगों ने सतुआ भोज का आनंद लिया ।

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