पत्रकार चंदन को उग्रवादियों द्वारा पिट पिट कर हत्या एसआईटी पत्रकार हत्या की जांच करेगी, एसपी चतरा मे एक के बाद एक, पत्रकार की हत्या से पत्रकारजगत दुखी ---------------------------------------- सि - BHARAT NEWS LIVE 24

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Wednesday, 31 October 2018

पत्रकार चंदन को उग्रवादियों द्वारा पिट पिट कर हत्या एसआईटी पत्रकार हत्या की जांच करेगी, एसपी चतरा मे एक के बाद एक, पत्रकार की हत्या से पत्रकारजगत दुखी ---------------------------------------- सि

पत्रकार चंदन को उग्रवादियों द्वारा पिट पिट कर हत्या

एसआईटी पत्रकार हत्या की जांच करेगी, एसपी

चतरा मे एक के बाद एक,  पत्रकार की हत्या से पत्रकारजगत दुखी
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सिमरिया :  पत्थलगड़ा निवासी पत्रकार चंदन तिवारी को सोमवार शाम को अपहरण कर जंगल में ले जाकर पिट पिट कर निर्मम हत्या कर दी गयी है । इस बाबत पत्रकार के पिता रघुवीर तिवारी ने आवेदन लिख कर हत्यारे उग्रवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा अविलम्ब गिरफ्तार करने की बात कही है ।जानकारी के अनुशार चंदन तिवारी आज अखबार के लिए पत्थलगड़ा से सवांद सकलंन के लिए कार्य कर रहे थे। सोमवार के शाम समाचार संकलन कर पत्थलगड़ा चौक पर मौजूद थे ।इसी बीच दोअज्ञात युवक आये और कुछ बात करने को लेकर चौक से दूर ले गये ।मामला को समझ पाते कि तबतक अपहरण कर सुनशान  बलथरवा जंगल मे ले जाया गया ।जहां हाथ बांध कर पिटाई करते हुवे हत्या कर दी गई। देर शाम हो जाने के कारण घरवाले ने 9 बजे रात्रि को चार बार फोन करने के बाद पाँचवा फोन में चंदन के मोबाइल रिसीव किया गया जहां फोन पर कहा गया कि आप लोग आ जाइये और हमें जंगल से ले जाइए ।हमको काफी मारा गया है साथ में एक बोतल पानी भी लेते आइए लेकिन फोन रिसीव करने वाला कौन था इसे गंभीरता से नहीं लिया गया ।आनन फानन में परिवार के सदस्य एव परिजन रात्रि को जंगलो में ढूढते हुए सुनशान जंगल के सड़क किनारे  मृत चंदन की शव बरामद कर घर लाया गया ।पत्रकार चंदन निष्पक्ष खबर लिखने को लेकर सुर्खियों में हमेशा रहा करते थे । मृतक पत्रकार चंदन के दो पुत्री एक पुत्र  है जिसमें छोटा पुत्र की उम्र मात्र एक वर्ष है । वैसे में परवरिस की जिम्मेवारी अब दादा पर टिका है ।उग्रवादी टीपीसी के खिलाफ कई बार खबर लिखने को लेकर कई बार उग्रवादियों द्वारा धमकी भी दी गई थी जिसके लेकर नजदीकी थाना में  सनहा दर्ज भी कराया था  हत्या की खबर मिलते हीं क्षेत्र में आग की तरह फैल जाने के कारण एसपी अखलेश वी बरियार अपने दल बल के साथ घटना स्थल एवं मृतक के घर पहुँच कर उचित कानूनी कार्रवाई एवं दोषी उग्रवादियों के खिलाफ अविलम्ब गिरफ्तारी की बात कही है । आगे कहा है कि अभी गंभीरता से जांच पड़ताल की जा रही है साथ हीं चौक पर लगे सीसीटीवी की फुटेज भी खंगालने में लगे है ।यह बहुत हीं कायरता पूर्ण घटना है ।जहां पत्रकार देश के चौथे स्तम्भ होते है उसी चौथे स्तम्भ को निर्मम हत्या होना लोक तंत्र की हत्या है। चंदन की शव पोस्टमार्टम से आने के बाद पास के ही शमशान घाट में  सुपुर्द खाक किया गया। फिलहाल पुलिस के वरीय पदाधिकारी कैम्प कर रखा है।  बता दें कि समाज की हक हुक़ूक़ के साथ देश की आजादी की हिफाज़त करने वाले को कलम की सिपाही की संज्ञा दी जाती रही है। लोकतंत्र में डरा हुआ पत्रकार मरा हुए नागरिक को जन्म देता है। आजाद भारत मे चतरा जिला के दो पत्रकारों की हत्या से पत्रकारिता पर कोई दुषप्रभाव पड़ने वाला नहीं है। क़ानून के मुहाफ़िज़ अपनी दायित्वों का निर्वाहन करती रहेगी । यह उनकी अपनी जिम्मेदारी है।पत्रकार देश और समाज के कामों को अंजाम देते रहेंगे ।यह पत्रकारों की अपनी जिम्मेदारी है। अपराधियों , उग्रवादियों , आंतकवादियों और तस्करों समेत सबकी बातों और कारनामों से जनता को अवगत कराने का बीड़ा पत्रकार उठाए हुए हैं।अपनी सुरक्षा को लेकर गुहार लगाने वाले दूसरे की सुरक्षा मे सहयोग नहीं कर सकते हैं ।कबीरदास जी ने कहा है कि  कबीरा खड़ा बाज़ार में ले लुवाठी हाथ। जो घर जारे आप वोह चले हमारे साथ।
जनता सब तरफ से थक हार कर पत्रकार को ललचाई हुई नजर से देखती है।यहां भी अगर डर दिखेगा तो जनता मे मायूसी ,निराशा और असन्तोष का वातावरण पैदा होगा । पत्रकार की हत्या मे शामिल लोग,  असल में देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था के चौथे स्तम्भ पर हमला किया है। ऐसे हमला और अपराधियों के खिलाफ सख्त और जल्द क़ानूनी करवाई से दूसरे अपराधियों के हौसला पस्त होगा। लोकतंत्र की प्रहरियों की मानसम्मान और जान की हिफाजत करने की जिम्मेदारी जो महसूस करते है । उन्हें अग्रणी भूमिका निभाने की जरूरत है। पत्रकार तो हर समय निहत्था ही रहता है।हर किसी की आवाज़ पर हर समय सम्मान देना  पत्रकारों की फितरत मे शामिल है। पत्रकारों को मारना कोई बहादुरी नहीं है।नपुंसकता और बुजदिली का प्रमाण है। पत्रकारों की लेखनी से यदि सहमत नहीं हैं तो अपना पक्ष रखने का प्रयास करने की जरूरत है। पत्रकार तो जुबान और बेज़ुबान सब की आवाज़ है। पत्रकार जगत को डराना , धमकाना, और जान मार कर लोकतंत्र को गूंगा बनाने की यह प्रवृति किसी भी द्रष्टिकोण से उच्चित नहीं है।
पत्रकार चंदन तिवारी के पिता रघुवीर तिवारी, चाचा अजय तिवारी और विजय तिवारी की प्रारंभिक जीवन काल निहायत ही खस्ता हालत में गुजरी है।जानकर बताते हैं कि बड़ी मुशक्त के बाद फिलहाल स्थिति में सुधार हुआ है।पत्रकार चंदन का पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को पुलिस ने सुपुर्द कर दिया है । पुलिस कप्तान अखिलेश वी वारियर घटना की गम्भीरता को देखते हुए मृतक के घर जा कर परिवार और आश्रितों से मिलने के साथ हत्या के कारणों की आशंकाओं और सम्भावनाओं को समझने की कोशिश किये।पुलिस कप्तान मामले की गहराई से जांच और तत्काल जरूरी करवाई करने के लिए हिदायत दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे मामले को एसआईटी से जांच कराने की बात कहा हैं। देखना यह होगा कि हत्यारे चंदन तिवारी की हत्या के पीछे उद्देश्य किया थी।यह तभी संभव है जब पुलिस असल हत्यारे को गिरफ्तार करने में कामयाब हो पाती है। वैसे मृतक  घटना की सम्भावना व्यक्त करते हुवे कुछ लोगों के खिलाफ सनहा भी दर्ज कराया था । कई लोगों के खिलाफ पथलगड्डा थाना में  दर्ज कराया था। घटना की खबर सुन जिले के कई जनप्रतिनिति  राजद के मनोज चंद्रा,जेवीएम के रामदेव सिंह भोगता ,भाजपा के उज्वल दास एवं प्रखण्ड व जिला के पत्रकार शामिल थे ।

मोकिम अंसारी
सिमरिया

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