मगध प्रमंडल का अनुसूचित जनजाति जनजाति,(महादलित दलित) का महा रैली का जिसका उद्घाटन दीपप्रज्वलीत कर कियाःमाननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार* 31,102018 रिपोर्टः दिनेश पंडित का रिपोर्ट गया से बि - BHARAT NEWS LIVE 24

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Wednesday, 31 October 2018

मगध प्रमंडल का अनुसूचित जनजाति जनजाति,(महादलित दलित) का महा रैली का जिसका उद्घाटन दीपप्रज्वलीत कर कियाःमाननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार* 31,102018 रिपोर्टः दिनेश पंडित का रिपोर्ट गया से बि

*मगध प्रमंडल का अनुसूचित जनजाति जनजाति,(महादलित दलित) का महा रैली का  जिसका  उद्घाटन दीपप्रज्वलीत कर कियाःमाननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार*
31,102018
रिपोर्टः
दिनेश पंडित का रिपोर्ट
गया से
बिहार के जिला  गया में  गांधी मैदान प्रमंडलीय महादलित महा रैली में आए लोगों का अभिनंदन करता हूं। सफल आयोजन के लिए तमाम आयोजनकर्ताओं को बधाई देता हूं। जबसे काम करने का मौका मिला है जो हमारी प्रतिबद्धता है न्याय के साथ विकास के प्रति। उसको ही ध्यान में रखकर हमने काम किया है। और प्रारंभ से हमने यह कोशिश की है कि न्याय के साथ विकास का मतलब लोग समझें। न्याय के साथ विकास का मतलब समाज के हर तबके और हर इलाके का विकास है। हर तबके के विकास की बात करते हैं तो यह ध्यान रखना है कि समाज का जो हिस्सा किनारे में है। जिसकी उपेक्षा हुई है। हासिए पर रहने वाले लोगों को मुख्य धारा में लाना है। यह बात पहली दिन से कही है मैंने। यही मेरा नजरिया है। इसी कारण सभी कार्यों को इसी दृष्टिकोण से देखा है। काम संभाला तो देखा कि साढ़े 12 प्रतिशत बच्चे स्कूलों से बाहर हैं। स्कूलों में पहुंचाने का प्रयास शुरु किया। 22 हजार से ज्यादा नए स्कूल खोले गएं। पुराने स्कूलों में लाख से ज्यादा कमरे बनाए गएं। तीन लाख से अधिक शिक्षकों का नियोजन किया गया। साढ़े 12 प्रतिशत बच्चे जो स्कूलों से बाहर हैं वे किस तबके के हैं इसका सर्वेक्षण कराया गया तो पता चला कि दलित-महादलित और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे इसमें सबसे ज्यादा हैं। पता चला। बड़े बच्चों के लिए महादलित टोलों में टोला सेवक को नियोजित किया। इसी तरह से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए तालीमी मरकज व शिक्षा स्वयंसेवक का चयन किया गया। टोला सेवक की संख्या 20 हजार से ज्यादा, शिक्षा स्वयंसेवक की संख्या करीब 10 हजार। इनलोगों को प्रतिनियुक्त कर बच्चों को पढ़ाने और तीसरे-चैथे क्लास में एडमिशन के लायक बनाने का निर्देश दिया। पांच साल के अंदर साढ़े 12 प्रतिशत की संख्या एक प्रतिशत से भी कम हो गई। इसके बाद शिक्षा स्वयंसेवकों व टोला सेवकों को अनुसूचित जनजाति जनजाति काम दिया है।

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