Friday, 26 October 2018

*चुनावी बेला में किसानों की सुनने वाला कोई नहीं : उमाशंकर पटेल।* *♦तेज खवर पहली नजर* *🅱भारत न्यूज़ लाइव 24 हर* *खवर आप तक* *सीधी ....मध्यप्रदेश*

*चुनावी बेला में किसानों की सुनने वाला कोई नहीं : उमाशंकर पटेल।*

*♦तेज खवर पहली नजर*
*🅱भारत न्यूज़ लाइव 24 हर* *खवर आप तक* *सीधी ....मध्यप्रदेश*

सीधी- चुनाव की इस वेला में अधिकारी कर्मचारी चुनाव में व्यस्त में है। आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर या यूं कहे कि किसी नेता के पास इतना भी समय नहीं कि वे किसानों के हक की बात तो दूर उनके पास जाकर हमदर्दी जता सके। यह चुनाव किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। रविवार को मौसम की मिजाज ने किसानों को चिंता डाल दिया है। बता दें कि सीधी जिले के चुरहट तहसील अंतर्गत लहिया, पिपराह, डिहुली, कुस्परी समेत कई गांवों में बारिश के साथ ओले गिरने से खरीफ की फसल चैपट हो गई हैं। धान, उड़द, मूंग समेत अनेक अन्य कटी फसले खेतों में सड़ रही या खलिहानों में। ऐसे में किसानों की सुनने वाला कोई नहीं, ये उपरोक्त आरोप युवा पत्रकार एवं किसान नेता उमाशंकर पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से लगाया है।
उल्लेखनीय है कि इस साल देर से मानसून आया और औसत स्तर से कम बारिश हुई। अब जब फसल पक चुकी है तो ओलावृष्टि के साथ भीषण बारिष से अपनी नष्ट हुई फसलों को देखकर किसानों के सब्र का बांध टूट गया है। आँखों में आँसू और सिर पर जमानेभर की जिम्मेदारियों का बोझ किसानों को बेजान कर रहा है। कुल जमा पूंजी लगाकर खेतों में झोकने वाले किसानों की फसलें पकने की स्थिति में आने के बाद बारिष और ओलों के कहर से पूरी तरह बर्बाद हो गई है। जिससे किसान अब सरकार की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मगर चुनावी समर में सीधी जिले में रविवार शाम करीब चार बजे अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश के साथ ओले गिरे। इस बीच तेज हवाएं भी चलती रहीं। इस बेमौसम का असर विधानसभा क्षेत्र चुरहट में सर्वाधित रहा। श्री पटेल के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा के बाद चुरहट उपखण्ड़ अधिकारी और संबंधित विभाग द्वारा ओला प्रभावित गांवों में सड़क किनारे खेतों का तूफानी सर्वे कर खानापूर्ति की जा चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सड़क से दूर दराज के खेतों का आकलन सड़क किनारे खेतों में हुए सर्वे को सही माना जाए, क्योकि दूर दराज के खेतों में कोई अधिकारी या कर्मचारी जाने की जहमत नहीं करता। दूसरी बात क्या यह सर्वे पूर्व में हुए सर्वे की तरह महज एक सरकारी खानापूर्ति तक ही सीमित तो नहीं रह जाएगा। श्री पटेल ने मांग कि है कि प्रभावित क्षेत्रों का सही सर्वे कर अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, तूफान से नष्ट हुई फसल का पुरा मुआवजा सुनिश्चित कर किसानों को राहत दिया जाए।