Thursday, 19 July 2018

*देश के केरल राज्य में सबरीमाला मंदिर विवाद: मंदिर निजी संपत्ति नहीं, महिलाओं को भी पूजा का अधिकार : SC* *सुप्रीमः* सुत्रो के अनुसार खबर दिनेश कुमार पंडित. रिपोर्टः

*देश के केरल राज्य में सबरीमाला मंदिर विवाद: मंदिर निजी संपत्ति नहीं, महिलाओं को भी पूजा का अधिकार : SC* *सुप्रीमः*
      सुत्रो के अनुसार 
खबर
दिनेश कुमार पंडित.
रिपोर्टः
*(देश के ऐसे राज्य केरल है जहाँ महिलाओं का मंदिर में  प्रवेश निषेध था) अब सभी महिलाओं के लिए खुल गया)*
देखिये
(रूढिवादी दूर किये न्यायालय ने)
  देश के केरल राज्य में    सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर में प्रवेश का अधिकार सभी को है। महिलाओं को भी पूजा करने का अधिकार है। मंदिर निजी संपत्ति नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति है। पुरुषों की तरह महिलाओं को भी प्रवेश करने का हक है। देश की सर्वोच्च अदालत की संवैधानिक पीठ ने केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक का विरोध किया है। पीठ का कहना है कि मंदिर एक पब्लिक प्लेस है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि देश में प्राइवेट मंदिर का कोई सिद्धांत नहीं है। मंदिर कोई प्राइवेट संपत्ति नहीं है, यह पब्लिक प्लेस है। ऐसी सार्वजनिक जगह पर यदि पुरुष जा सकते हैं तो महिलाओं को भी प्रवेश की इजाजत मिलनी चाहिए।प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि यदि कोई कानून नहीं भी हो, तब भी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के मामले में महिलाओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता।
संविधान पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें 10-50 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध के देवस्वोम बोर्ड के फैसले को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई . चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि जब कोई पुरुष प्रवेश कर सकता है तो महिला भी जा सकती है। जो पुरुषों पर लागू होता है, वह महिलाओं पर भी लागू होता है। पीठ ने कहा कि मंदिर में प्रवेश का अधिकार किसी कानून पर निर्भर नहीं है। यह संवैधानिक अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में निहित है।
केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। सबरीमाला मंदिर की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया कि 10 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की महिलाएं मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती हैं। यही नहीं महिला भक्तों को अपने साथ में आयु प्रमाण पत्र भी साथ में लेकर आने को कहा गया है। केरल सरकार ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि उसने भी मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया है। इस पर पीठ ने केरल सरकार की ओर से 2015 और 2017 में दायर विरोधाभासी हलफनामों की तरफ इशारा किया। साल 2015 में दायर हलफनामे में केरल सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था जबकि 2017 में यू- टर्न लेते हुए महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया था।